Friday - 25 September 2020 - 1:44 AM

कांग्रेस से गांधी छीनने वाली बीजेपी से कैसे छिटक गए हनुमान

अविनाश भदौरिया

‘आज मंगलवार है, हनुमान जी का दिन है, हनुमान जी ने दिल्ली में आज अपनी कृपा बरसाई है, हनुमान जी का धन्यवाद, प्रभु का बहुत-बहुत धन्यवाद। हम सभी प्रभू से यही कामना करते हैं कि आने वाले 5 साल में हमें ऐसे ही दिशा दिखाते रहे। हमें शक्ति दे।’ ये शब्द हैं दिल्ली के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने अरविन्द केजरीवाल के संबोधन के। अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली चुनावों के रुझान सामने आने के बाद अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और एक झटके में ही उन्होंने राम भक्त बीजेपी से हनुमान जी को छीनते हुए अपने पाले में खड़ा कर लिया।

अरविन्द केजरीवाल के इस करतब को देखकर अनायास वो दिन याद आ गए जब 2014 में बीजेपी ने सत्ता हासिल की और फिर पीएम मोदी ने बड़े ही सलीके से कांग्रेस से महत्मा गांधी को छीनते हुए एक नए गांधीवाद को गढ़ा। स्वच्छ भारत मिशन में गांधी जी का चश्मा हो या फिर पीएम मोदी के संबोधन कई बार ऐसा लगा कि वाकई में गांधी जी के विचारों और सपनों को कांग्रेस नहीं बीजेपी पूरा करने में जुटी हुई है।

यहां हम महत्मा गांधी और हनुमान जी का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो संत और भगवान होने के साथ ही राजनीति के सिम्बल भी हैं। आम आदमी के लिए ये आस्था के प्रतीक हैं लेकिन सियासत में इनका प्रयोग पार्टीयां अपने खास उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विशेष सन्देश देने के लिए करती हैं। और ये सब चुनावी रणनीति का कौशल होता है।

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राजनीति में प्रतीकों और उनसे जुड़ी भावनाओं का महत्व सबसे अधिक प्रभावशाली होता है। इसी लिए यहां नेताओं के कपड़ों का रंग भी चुनने में बड़ी सावधानी बरती जाती है। यानी कि सियासत में कुछ भी यूँ ही नहीं होता फिर वो चाहे हनुमान चालीसा का पाठ हो या फिर गांधी पूजा का अनुष्ठान।

कुल मिलाकर भगवान से लेकर महापुरुषों तक सभी को राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे के तहत अपनाते हैं और तिरस्कार करते हैं। इसकी एक बानगी महाराष्ट्र में वीर सावरकर को लेकर भी देखी जा सकती है। फ़िलहाल हमारा मुद्दा है कि जिस बीजेपी ने कांग्रेस से महात्मा गांधी, सरदार पटेल और आंबेडकर छीन लिए क्या अब आम आदमी पार्टी उसी बीजेपी से हिंदुत्व के सिम्बल माने जाने वाले भगवान राम के परम शिष्य हनुमान और राष्ट्रवाद को छीनने की तैयारी में है ?

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राष्ट्रवाद की बात इस लिए करना जरुरी है क्योंकि दिल्ली का पूरा चुनाव शाहीनबाग के साए में हुआ और इस दौरान पाकिस्तान से लेकर टुकड़े-टुकड़े गैंग तक कई मुद्दे गरम रहे। यहां तक की चुनावी रैली के दौरान बीजेपी नेता प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल को ‘आतंकवादी’ तक बना दिया था। शायद यही वजह है कि, पार्टी के नेता गोपाल राय ने राष्ट्रवाद पर एक लम्बा चौड़ा भाषण दिया। इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी ने अपना एप लॉन्च कर दिया है। ट्वीट पर इसकी जानकारी देते हुए आप ने लिखा है कि राष्ट्र निर्माण के लिए AAP से जुड़े। इसके आलावा आम आदमी पार्टी के दफ्तर के बाहर भी नया पोस्टर लगा दिया गया है, जिसमें राष्ट्रनिर्माण का जिक्र है।

हालांकि आप का राष्ट्रवाद बीजेपी के राष्ट्रवाद से उसी तरह अलग है जैसे कांग्रेस के गांधी से मोदी के गांधी। आम आदमी पार्टी के मुताबिक, काम ही असली राष्ट्रवाद है। जिससे आम जनता का हित हो।

मजे की बात तो ये है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ हो चुका है तब हनुमान जी ने बीजेपी को वरदान न देकर आप को आशीर्वाद दे दिया है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी को आत्म मंथन करने की जरुरत है कि, कहीं भगवान नाराज तो नहीं और ऐसा है तो क्यों ?

(अगली कड़ी में बताएंगे ‘बीजेपी से क्यों नाराज हैं हनुमान’, तब तक के लिए जुड़े रहिए जुबिली पोस्ट न्यूज़ से)

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