Wednesday - 28 September 2022 - 9:26 AM

संवेदनशील और विनम्र राजनेता हैं गोविंद सिंह राजपूत

कृष्णमोहन झा

मध्यप्रदेश शासन के वरिष्ठ मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का आज जन्मदिवस है। उनकी जन्म तारीख तो मुझे याद नहीं है परंतु कई वर्ष पूर्व एक बार जब जन्माष्टमी की पुनीत तिथि को मेरी उनसे अचानक भेंट हुई तब उन्होंने बताया था कि जिस दिन सागर  जिले के नरयावली ग्राम में उनका जन्म हुआ था उस दिन जन्माष्टमी थी, इसीलिए उनके माता-पिता पिता ने उनका गोविंद नामकरण किया था। गोविंद सिंह राजपूत से भेंट का वह अनूठा प्रसंग आज भी मेरे मानस पटल पर अंकित है और प्रति वर्ष जब जन्माष्टमी  की पुनीत तिथ निकट आने लगती है तब मुझे सहज ही वर्षों पूर्व गोविंद भाई के साथ अनायास हुई उस मधुर भेंट का सहज ही स्मरण हो आता है। गोविंद सिंह राजपूत मध्य प्रदेश सरकार के पास महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है और संगठन के कामों में भी उनकी व्यस्तता जगजाहिर है परंतु  बीते वर्षों में मैं जब भी उनसे मिला हूं  मुझे हमेशा यही अनुभूति हुई  है कि उन्हें अपने राजनीतिक कद और मंत्री पद का तनिक भी अहंकार नहीं है।

वे सहज सरल और हर दिल अजीज राजनेता हैं ।उनके चेहरे पर हमेशा छाई रहने वाली निष्छल मुस्कान और उनकी मृदुवाणी में ऐसा जादू है जो किसी अनजान व्यक्ति को भी संक्षिप्त भेंट ही अपने चुंबकीय आकर्षण में बांध लेती है इसीलिए आपको समाज के हर वर्ग में उनके प्रशंसक मिल सकते हैं लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। निजी जीवन वे जितने सहज सरल और विनम्र हैं , एक मंत्री के रूप में वे उससे कहीं अधिक सख्त और अनुशासन प्रिय हैं। उनकी टेबल पर आपको कभी महीनों पुरानी पेंडिंग फाइलों का अंबार  देखने को नहीं मिलेगा । उनकी गणना शिवराजसिंह चौहान मंत्रिमंडल के उन सदस्यों में प्रमुखता से होती है जो अपने विभाग में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन में जरा भी शिथिलता बर्दाश्त नहीं करते।

यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सबसे विश्वासपात्र मंत्रियों में शामिल हैं। मुझे यह स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं है कि उनके साथ मेरी प्रगाढ़ मैत्री है परंतु हमारी इस प्रगाढ़ मैत्री हम दोनों ने अपनी इस प्रगाढ़ मैत्री को कभी भी अपने दायित्वों के निष्ठा पूर्ण  निर्वहन में कभी बाधक नहीं बनने दिया । एक निष्पक्ष पत्रकार के रूप में जब भी मैंने सरकार के किसी फैसले की तीखी आलोचना भी की है  तब

न तो हमारे संबंधों में तनिक सी भी खटास आई ,न ही उन्होंने मुझसे सरकार के पक्ष में कलम चलाने का आग्रह किया। दबाव की बात तो मैं स्वप्न में भी नहीं सोच सकता क्योंकि यह तो गोविंद भाई के स्वभाव में ही नहीं है।

आज उनका जन्मदिन है।इस शुभ अवसर पर उन्हें मैं अपनी ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए गर्व के साथ कह सकता हूं कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र की जनता के लाड़ले गोविंद भैया मेरे मित्र हैं।यह भी एक सुखद संयोग ही माना जा सकता है कि सागर जिले के नरयावली गांव के एक संभ्रांत कृषक परिवार में जन्मे तीक्ष्ण बुद्धि के धनी गोविन्द सिंह राजपूत ने बचपन में ही अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय देकर ‘होनहार बिरवान के, होत चीकने पात’ कहावत को सच साबित कर दिया था। उनके तीन दशक के राजनीतिक सफर में जिन्हें उनको नजदीक से देखने का सौभाग्य मिला है उनके लिए गोविन्द सिंह राजपूत एक दृढनिश्चयी और प्रबल इच्छा शक्ति के धनी कर्मयोगी हैं।

यूं तो गोविंद सिंह राजपूत की सहज सरल और हर दिल अजीज शख्सियत के बारे में काफी कुछ लिखा जा सकता है परंतु  उनकी रुचि तो हमेशा यह जानने में रही है कि उनके अपने दायित्वों के निर्वहन में कहीं कोई चूक परिलक्षित हो तो उसे तत्काल उनकी जानकारी में लाया जाए ताकि उसका अविलंब परिमार्जन किया जा सके। संत कबीर का दोहा ” निंदक नियरे राखिये ,आंगन कुटी छवाय, बिन पानी साबुन बिना,निर्मल करत सुभाय।” उनके राजनीतिक जीवन का आदर्श रहा है |

सागर जिले के अंतर्गत नरयावली गांव के एक साधारण कृषक परिवार में जन्मे गोविंद सिंह राजपूत ने जब प्रबंधन में स्नातकोत्तर उपाधि अर्जित की तो वे किसी प्रतिष्ठित संस्थान में मोटी तनख्वाह वाली नौकरी हासिल कर अपने सुंदर भविष्य के सपने को साकार करने का विकल्प भी चुन सकते थे परंतु उन्होंने राजनीति के माध्यम से समाज सेवा की पथरीली राह पर चलने का विकल्प चुनकर पीड़ित मानवता की सेवा को अपने जीवन का चरम लक्ष्य बना लिया। अपने दो अग्रज बंधुओं की भांति कर्मठ समाजसेवी गोविन्द सिंह राजपूत के अंदर छिपे एक प्रखर नेता के गुण तो उनकी किशोरावस्था में ही उजागर होने लगे थे।

सबको साथ लेकर चलने का उनका स्वभाव हमेशा ही उनके चाहने वालों की संख्या में इजाफा करता रहा और यह सिलसिला तब से लेकर आज तक निरंतर जारी है । यही कारण है कि गोविन्द सिंह राजपूत राज्य विधानसभा के सुरखी निर्वाचन क्षेत्र से चार बार शानदार जीत हासिल कर जीत चुके हैं। उक्त निर्वाचन क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता का यह आलम है कि वे किसी भी दल से चुनाव लड़ें,जीत उनकी ही होती है। हर चुनाव वे पार्टी प्रत्याशी के रूप में नहीं बल्कि गोविन्द सिंह राजपूत के रूप में जीतते आए हैं।सुरखी में उन्हें सभी से गोविन्द भैया संबोधन मिला हुआ है जिसके पीछे प्रगाढ़ आत्मीयता का भाव होता है । इसमें दो राय नहीं हो सकती कि उनके परमार्थी स्वभाव ने ही उन्हें अपने क्षेत्र की जनता का लाडला नेता बनाया है।

‌‌ ढाई साल पहले मध्यप्रदेश की तत्कालीन कमलनाथ सरकार के पराभव की पटकथा लिखने वाले कांग्रेस विधायकों में गोविन्द सिंह राजपूत बड़ा चेहरा थे । दरअसल 2018 के विधानसभा चुनावों के बाद जब राज्य में कमलनाथ सरकार का गठन हुआ तब जनता से किए वादों को भूलकर वह सरकार भ्रष्टाचार और अंतर्विरोधों का शिकार हो गई तब उन्हें लगा कि अगर यह सरकार आगे भी चलती रही तो प्रदेश में विकास का पहिया थम जाएगा इसलिए उन्होंने अपने साथी विधायकों के मिलकर सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गत वर्ष जिन 26 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव संपन्न हुए उनके नतीजों से भी यह प्रमाणित हो गया कि उनका यह फैसला उनके क्षेत्र की जनता की भावनाओं के अनुरूप हथा। गौरतलब है कि सुरखी विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव ्गोविन्द सिंह राजपूत ने 2018 से भी अधिक मतों के अंतर से जीता था। गोविन्द सिंह राजपूत आज मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की टीम के एक वरिष्ठ सदस्य है । सरकार के सभी महत्वपूर्ण फ़ैसलों में उनकी राय अहम होती है। उनकी प्रशासनिक और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार सौंपा गया है । सरकार के वरिष्ठ मंत्री के रूप में वे हर जिम्मेदारी के निर्वहन में वे सफल रहे हैं। जब भी मेरी उनसे मुलाकात का अवसर आता है तब मैंने हमेशा यह अनुभव किया है कि उनके अंदर प्रदेश के द्रुतगामी विकास की एक ललक है। वे जमीन से जुड़ेे ऐसे समर्पित राजनेता हैं जिनके पास कोई भी व्यक्ति कभी भी अपनी समस्या के समाधान के लिए पहुंच सकता है।

गोविन्द भाई हमेशा व्यवस्था सुधारने की दिशा में प्रयास रत रहते है उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग में लम्बे समय से बस ऑपरेटर और मॉलवाहक वाहनों के स्वामी प्रदेश में मोटरयान कर की दर अधिक होने से वजह से अन्य राज्यों में अपने वाहनों का पंजीयन करा लेते हैं। जिससे प्रदेश को राजस्‍व की हानि हो रही है इसे रोकने के लिए हमने मोटरयान कर में छूट देने का निर्णय लिया है । इसी प्रकार प्रदेश में यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए मप्र में नेशनल परमिट पर संचालित होने वाली बसें मासिक कर ज्‍यादा होने के कारण अन्‍य राज्‍यों में पंजीयन के लिए चली जाती हैं। इसे कम करने के लिए अब नेशनल परमिट की बसों में प्रति सीट 700 रुपये प्रतिमाह की जगहअब 200 रुपये प्रति सीट प्रतिमाह किया जा रहा है|

इसके साथ ही प्रदेश में महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए परिवहन विभाग द्वारा संचालित सभी यात्री वाहनों में पैनिक बटन एवं व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने का कार्य प्रारंभ हो जाएगा। प्रारंभिक चरण में इन कम्‍पनियों के माध्‍यम से पैनिक बटन एवं व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने का कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। अब प्रदेश में सभी प्रकार के यात्री वाहनों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्‍चित हो सकेगी।

गोविन्‍द भाई बड़े भावुक होकर बताते है कि प्रदेश की माताएं एवं बहनें अब कभी भी यात्री वाहन जैसे बस, कैब, टैक्‍सी एवं आटो रिक्‍सा इत्‍यादि में सफर के दौरान किसी भी प्रकार का खतरा महसूस होने पर पैनिक बटन दबाकर परिवहन विभाग द्वारा बनाये गए कंट्रोल एवं कमाण्‍ड सेंटर में संदेश पहॅूचा सकेंगी |इस संदेश पर माता एवं बहनों को तत्‍काल डायल 100 की सहायता आटो‍मेटिक रूप से प्राप्‍त हो जाएगी। गोविन्द भाई कहते है कि मुझे हमेशा यह तकलीफ रहती थी कि बसों में चलने वाली हमारी मातायें ,बहने, बेटियों को छेड़ छाड़ की घटनाओं का सामना  करना पड़ता था|

मुझे लगता था कि कोई ऐसी व्यवस्था हो जिससे इस प्रकार की घटनाओं पर नियंत्रण लग सके लगातार प्रयासो के बाद हम इस कार्य को करने जा रहे है|उनका यही गुण गोविन्द सिंह राजपूत को गोविन्द सिंह राजपूत बनाता है।यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री के रूप में गोविंद सिंह राजपूत की यह सराहनीय पहल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव पर लाल किले की प्राचीर से जनता से किए गए उस आह्वान के अनुरूप है जिसमें उन्होंने समाज में नारियों के गौरव और सम्मान की रक्षा को समाज का सर्वोपरि कर्तव्य निरूपित किया था। गोविंद सिंह राजपूत की पहल पर शिवराज सरकार का फैसला निःसंदेह अन्य राज्यों की सरकारों के लिए भी प्रेरणादायी साबित होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं) 

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