Tuesday - 7 February 2023 - 11:26 PM

इलेक्ट्रिक बस नहीं आयी रास, अब रह गयी सिर्फ यादें

जुबिली पोस्ट ब्यूरो

लखनऊ। बिना प्रदूषण फैलाए लखनऊ से कानपुर के बीच यात्रियों को लाने ले जाने वाली इलेक्ट्रिक बसें यात्रियों को रास नहीं आई। 21 अगस्त 2018 को शुरू हुई यह बस सेवा छह महीने भी नहीं चल सकी। अब उसकी आवाजाही बंद कर दी गई है। इसका कारण महंगा किराया और धीमी गति बताया गया।

जब यह बस चली थी तो लोगों में बस को लेकर उत्साह था लेकिन परफारमेंस ने लुटिया डूबो दी। चार महीने अनियमित रूप से चलने के बाद दिसंबर से यह बस सेवा बंद चल रही है। यह बस स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बेहतर थी।

डीजल से न चलने की वजह से धुआं नहीं उठता था। बस के भीतर डीजल की दुर्गंध से कुछ लोगों को होने वाली उल्टी की समस्या नहीं होती थी। खासकर बीमार व्यक्ति और डीजल के धुएं से एलर्जी वाले लोग इस बस में यात्रा करते थे। इससे हवा में जहरीली गैसें भी नहीं घुलती थीं।

ऐसी थी इलेक्ट्रिक बस

इलेक्ट्रिक बस में 6000 वोल्ट की छह बैटरियां थीं। नॉन एसी बस में चार बैटरियां थीं। पहने एक महीने के लिए नॉन एसी बस चली थी। साढ़े तीन घंटे में फुल चार्ज होने वाली यह बस एक बार में फुल चार्ज होने पर 300 किमी जा सकती थी। यह बस लखनऊ से सुबह सात बजे और दोपहर तीन बजे चलती थी। कानपुर पहुंचने का समय सुबह नौ और शाम पांच बजे का था और आधे घंटे बाद रवाना होती थी।

महंगा किराया पड़ गया भारी

इलेक्ट्रिक एसी बस सेवा के विफल होने के पीछे सबसे बड़ी वजह जनरथ एसी बस का सस्ता किराया और धीमी स्पीड थी। कानपुर से लखनऊ के बीच चलने वाली एसी बसों मे सबसे सस्ता किराया जनरथ सेवा का है। लखनऊ-कानपुर का किराया 137 रुपये है। वॉल्वो बस का किराया 250 रुपये, स्कैनिया का किराया 276 रुपये है। जबकि नॉन एसी जनरल बस का किराया 105 रुपये है। वहीं, इलेक्ट्रिक बस का किराया 227 रुपये था।

सुस्त रफ़्तार थी मुख्य वजह

इलेक्ट्रिक बस की अधिकतम स्पीड 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित थी लेकिन भीड़ की वजह से 60 से 70 ही अधिकतम औसत स्पीड रही। इससे कानपुर से लखनऊ के बीच आने जाने में बस को ढाई से तीन घंटे लगते थे। जबकि एसी और नॉन एसी बस महज डेढ़ से दो घंटे में पहुंच जाती थीं। अगर किराया कम कर दिया जाता तो इस बस को नियमित रूप से चलाया जा सकता था।

फिलहाल लखनऊ से अब इलेक्ट्रिक एसी बसें नहीं आ रही हैं। इसमें यात्रियों की संख्या कम थी लेकिन कुछ लोगों के लिए यह बस मुफीद थी। कुछ लोग इसका इंतजार करते थे लेकिन जनरथ एसी बस सस्ती थी। पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य दोनों के लिए मुफीद थी। कोशिश होगी कि यह बस सेवा जारी रहे।

अतुल जैन, क्षेत्रीय प्रबंधक (कानपुर), परिवहन निगम

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