Saturday - 23 November 2019 - 8:04 AM

यूपी के वित्त विभाग में शासन पर भारी है एक अधिकारी

जुबिली न्यूज ब्यूरो

यूपी के सरकारी खजाने पर निगरानी रखने वाले महकमे की निगरानी करने वाले खुद ही आरोपों के घेरे में आ गए हैं ।

सहकारी समितियां एवं पंचायतें की लेखा परीक्षा विभाग के मुखिया पर ही भ्रष्टाचार और शासन के आदेशों के निर्णय और तबादलों एवं नियुक्तियों में भ्रष्टाचार करने के आरोपित हो चुके हैं , बावजूद इसके उनके खिलाफ अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

वित्त विभाग के अंतर्गत मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायती उत्तर प्रदेश का एक बड़ा महकमा है जिसका काम है कि सहकारी समितियों एवं ग्राम पंचायतों में किए जा रहे कार्यों का ऑडिट करके भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए, लेकिन सरकारी समितियां एवं पंचायतें के लेखा परीक्षा विभाग के मुखिया अवनीन्द्र दीक्षित पर ही अनियमितताओं के आरोप लग गए ।

शासन के रोक के बावजूद लेखा परीक्षा कार्मिकों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा

ताजा मामला लेखा परीक्षा कार्मिकों को सहकारी समितियां एवं पंचायत विभाग से दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार लेखा परीक्षा विभाग में लेखा परीक्षा कार्मिकों की संख्या पूरी स्ट्रेन्थ की लगभग 42% थी उसमें से भी 10% कर्मी रिटायर हो गए। लेखा परीक्षा कार्मिकों की कम संख्या बल को देखते हुए शासन ने इस विभाग से किसी भी दूसरे विभाग में प्रतिनियुक्ति पर कार्मिकों के जाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत करने से मना कर दिया और इसकी नोट शीट पर मुख्यमंत्री की स्वीकृति भी लेने की बात बताई जा रही है ।

मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी ने भी शासन को अवगत करा दिया कि किसी भी कार्मिक को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा ,लेकिन मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी अवनीन्द्र दीक्षित ने सितंबर 2019 में 11 लेखा परीक्षा कार्मिकों को दूसरे विभाग में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए गुपचुप तरीके से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया।

विभाग में चर्चा है कि इन अनापत्ति प्रमाण पत्रों को जारी करने के पीछे कहीं वित्तीय भ्रष्टाचार भी रहा है । ऐसी शिकायतों का संज्ञान लेते हुए शासन ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया और अपर मुख्य सचिव ,उत्तर प्रदेश शासन ने पत्र संख्या आडिट-1- 1032 /दस-2019-3 22 (7)/18 दिनांक 12 अक्टूबर 2019 के द्वारा 11 तारीख को जारी किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र को निरस्त करते हुए प्रतिनियुक्ति पर गये उन सभी कार्मिकों को अन्य विभागों से तत्काल कार्यमुक्त करा कर वापस विभाग में बुलाने का फरमान जारी कर दिया ।

लेकिन इन अनापत्ति प्रमाणपत्रों को जारी करने वाले मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी तथा कमेटी पर कोई भी कारवाई नहीं की गयी।

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ट्रांसफर किये गये लिपिकों को नहीं किया कार्यमुक्त

शासनादेश संख्या-आडिट -1-616 /दस-2019- 320(2)/2018 दिनांक 30.06.2019 के द्वारा लेखा परीक्षा कार्यालय के लखनऊ स्थित मुख्यालय में वर्षों से जमे लिपिक जो अब प्रशासनिक अधिकारी के पद पर प्रमोट हो चुके थे, उन्हे शासन ने जनपदों में ट्रांसफर कर दिया था।

विभागीय सूत्रों के अनुसार वित्त सचिव की बैठक में मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी ने बताया था कि ट्रांसफर हुए सभी कार्मिकों को कार्यमुक्त कर दिया जायेगा ,इसका बैठक की कार्यवृत्ति में भी उल्लेख है । बावजूद इसके मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी ने तैनाती स्थल के लिये अब तक इन लिपिकों को कार्यमुक्त नहीं किया।

मुख्यालय में इस बात की चर्चा आम है कि कई लिपिकों ने अपनी नौकरी मुख्यालय से शुरू की और अब तक उनका कभी ट्रांसफर नहीं किया गया । यहां तक कि शासन स्तर से उनका ट्रांसफर हो गया है फिर भी मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी ने उन्हे अब तक रिलीव नहीं किया । कर्मचारियों का कहना है कि मुख्यालय के ये लिपिक जो चाहते हैं वही अधिकारी करते हैं और बिना पैसे लिये कोई काम नहीं होता।

(जुबिली पोस्ट के अगले अंक में पढिए विभाग के और कारनामे)

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