Wednesday - 3 June 2020 - 9:05 PM

साल भर से पहले बाज़ार में नहीं आ पायेगी कोरोना वैक्सीन

जुबली ब्यूरो

नई दिल्ली। कोरोना वैक्सीन को लेकर अमरीका, फ़्रांस और चीन की तरफ से कोरोना वैक्सीन को तैयार कर लिए जाने के दावे किये जाते रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि अब तक कोरोना को हरा पाने वाली कोई भी वैक्सीन बाज़ार में नहीं है।

इससे निबटने के लिए मौजूदा समय में लॉक डाउन के सिवाय कोई उपाय नहीं है। इस महामारी से खुद को बचा लेना ही सबसे बेहतर तरीका है। दुनिया के तमाम देशों ने इसे अपनाया है और इसके बेहतर परिणाम दिखे हैं।

कोरोना वायरस की शुरुआत चीन से हुई थी। चीन ने ही सबसे पहले कोरोना की वैक्सीन खोजने की दिशा में काम भी शुरू किया था। चीन ने दावा किया है कि वह कोरोना को खत्म करने वाली वैक्सीन का आविष्कार कर चुका है। अब सिर्फ इसका क्लीनिकल ट्रायल बाकी रह गया है। चीन के इस दावे पर दुनिया को बहुत ज्यादा उत्साहित होने की ज़रुरत नहीं है।

प्रभावित देशों के लोगों को चाहिए कि वह अपने-अपने देशों की सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई राय पर पूरी तरह से अमल करें क्योंकि चीन जिस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल की बात कर रहा है उस ट्रायल में कम से कम छह महीने का वक्त लगेगा और वैक्सीन कामयाब साबित हुई तो भी बाज़ार तक उसे आने में साल भर का वक्त लग सकता है।

जानकारी के अनुसार चीन इस वैक्सीन को बनाने के बाद अब ट्रायल के लिए ऐसे लोगों की तलाश में लगा है जो खुद पर इस वैक्सीन का परीक्षण कराने के लिए खुद को छह महीने के लिए खुद को समर्पित कर दें। चीन के कैनसिन बायोलाजिक्स ने एकेडमी ऑफ़ मिलट्री मेडिकल साइन्सेज़ के साथ मिलकर इस वैक्सीन के परीक्षण के लिए लोगों की तलाश शुरू कर दी है।

हालांकि डाक्टरों ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि इस वैक्सीन का उन लोगों पर कोई इन्फेक्शन नहीं होगा जिन पर इसका परीक्षण किया जाना है लेकिन कोरोना वायरस की महामारी ने जितनी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया है उसने इसे लेकर डर का ऐसा माहौल तैयार किया है कि फिलहाल खुद पर परीक्षण कराने के लिए चीन को अब तक कोई मिला नहीं है।

इस वैक्सीन के परीक्षण के लिए चीन को 18 साल की उम्र से 60 साल की उम्र तक के तमाम लोगों की ज़रुरत है क्योंकि क्लीनिकल परीक्षण में यह देखा जाना ज़रूरी है कि इस वैक्सीन का असर किस उम्र के व्यक्ति पर किस तरह से होता है। ज़ाहिर है कि 18 से 60 साल की उम्र के तमाम लोगों की तलाश बहुत आसान नहीं है।

हालांकि चीन ने यह भरोसा दिलाया है कि अप्रैल के महीने में वह हर हाल में इस वैक्सीन का परीक्षण शुरू कर देगा लेकिन इस वैक्सीन के परिणाम सामने आने में छह महीने का वक्त तो लगेगा ही। जानकारी के अनुसार इस वैक्सीन का मानव शरीर पर परीक्षण किये जाने की अनुमति भी दी जा चुकी है।

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