Monday - 30 January 2023 - 5:52 PM

आचार संहिता लागू हो चुकी है, ना करें ये भूल

लखनऊ डेस्क। चुनाव आयोग के द्वारा लोकसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही पूरे देश में आचार संहिता लागू हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि अगर किसी ने आचार संहिता तोड़ी तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि वोटिंग से 48 घंटे पहले और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउड स्पीकर की इजाजत नहीं होगी। आचार संहिता के उल्लंघन करने वालों की शिकायत के लिए मोबाइल ऐप के माध्यम से दी जा सकती है।

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इस बार मतदान केेंद्र पर सीसीटीवी कैमरा भी लगाये जायेगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह भी साफ कर दिया जो भी चुनाव लड़ेगा वह अपना आपराधिक रिकॉर्ड भी बतायेंगा। इतना ही नहीं पेड न्यूज पर भी चुनाव आयुक्त सख्त कदम उठा सकता है। इसके साथ ही चुनाव आयुक्त की सोशल मीडिया पर पैनी नजर होगी और इसके साथ ही विज्ञापन पर जो खर्च होगा कि उसे चुनाव खर्च में जोड़ा जायेगा।

कई बार लोग जानकारी ना होने पर ऐसी गलती कर बैठते हैं कि उन्हें बाद में पछताना पड़ता है। इसलिए कुछ जरुरी बाते जान ले जिससे कि आप किसी मुश्किल में ना फंसे।

आचार संहिता के विषय में जानें

आचार संहिता को चुनाव समिति द्वारा बनाया गया वो दिशानिर्देश होता है जिसे सभी राजनीतिक पार्टियों को मानना होता है। चुनाव के दौरान आचार संहिता को बहुत महत्‍वपूर्ण माना जाना है।

सत्तारुढ़ दलों के लिए चुनाव आचार संहिता लागू होने का बड़ा मतलब होता है। क्योंकि इसके बाद कोई भी सरकार मतदाताओं को लुभाने वाली घोषणा नहीं कर सकती है।

– चुनाव आचार संहिता चुनाव आयोग के बनाए वो नियम हैं, जिनका पालन हर पार्टी और हर उम्मीदवार के लिए जरूरी है।

– इनका उल्लंघन करने पर सख्त सजा हो सकती है। चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। एफआईआर हो सकती है और उम्मीदवार को जेल जाना पड़ सकता है।

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– चुनाव के दौरान कोई भी मंत्री सरकारी दौरे को चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता।

– सरकारी संसाधनों का किसी भी तरह चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

– यहां तक कि कोई भी सत्ताधारी नेता सरकारी वाहनों और भवनों का चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता।

– केंद्र सरकार हो या किसी भी प्रदेश की सरकार, न तो कोई घोषणा कर सकती है, न शिलान्यास, न लोकार्पण और ना ही भूमिपूजन।

– सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होता, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो। इस पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है।

– उम्मीदवार और पार्टी को जुलूस निकालने या रैली और बैठक करने के लिए चुनाव आयोग से आर्डर लेना होता है। इसकी जानकारी निकटतम थाने में देनी होती है।

– सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को देना होती है।

– कोई भी पार्टी या उम्मीदवार ऐसा काम नहीं कर सकती, जिससे जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़े या घृणा फैले।

– मत पाने के लिए रिश्वत देना, मतदाताओं को परेशान करना भारी पड़ सकता है। व्यक्ति टिप्पणियां करने पर भी चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकता है।

– किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार या भूमि का उपयोग नहीं किया जा सकता।

– मतदान के दिन मतदान केंद्र से सौ मीटर के दायरे में चुनाव प्रचार पर रोक और मतदान से एक दिन पहले किसी भी बैठक पर रोक।

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