Friday - 27 November 2020 - 2:34 PM

छठ पूजा : डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का ये है महत्व

जुबिली न्यूज़ डेस्क

छठ महापर्व का आज तीसरा दिन है। छठ पूजा के तीसरे दिन व्रत रखने वाली महिलाएं आज शाम को डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। इसलिए इस संध्या अर्घ्य भी कहा जाता है। उगते सूर्य को अर्घ्य देने की रीति तो कई व्रतों और त्योहारों में है लेकिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा केवल छठ में मनाई जाती है।

इससे पहले बांस की टोकरी को फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू और पूजा के सामान से सजाया जाता है। और सूर्यास्त से कुछ समय पहले सूर्य देव की पूजा होती है फिर डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है और उसकी पांच बार परिक्रमा की जाती है।

इस लिए दिया जाता है डूबते सूर्य को अर्घ्‍य

ऐसा माना जाता है कि, सायंकाल में सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। इसलिए छठ पूजा में शाम के समय सूर्य की अंतिम किरण प्रत्यूषा को अर्घ्य देकर उनकी उपासना की जाती है। इससे व्रत रखने वाली महिलाओं को दुगना लाभ मिलता है। इसके साथ ही जो लोग डूबते सूर्य की उपासना करते हैं, उन्हें उगते सूर्य की भी उपासना जरूर करनी चाहिए।

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ज्योतिषचार्यों का कहना है कि ढलते सूर्य को अर्घ्य देने से कई तरह की मुसीबतों से छुटकारा पाया जा सकता है। यही नहीं ऐसा करने से सेहत से जुड़ी कई समस्याएं भी दूर होती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार ढलते सूर्य को अर्घ्य देने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

छठ पूजा का समय

संध्या सूर्य अर्घ्य: 20 नवंबर, दिन शुक्रवार, सूर्योदय: 06:48 बजे और सूर्यास्त: 05:26 बजे।

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