Thursday - 2 February 2023 - 8:03 PM

कैफे काफी डे के संस्थापक वी जी सिद्धार्थ का मिला शव

न्यूज़ डेस्क

कैफे काफी डे के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ का शव मिला है। पुलिस ने मेंगलुरु में होइग बाजार के पास नेत्रावती के तट से उनकी लाश बरामद की। वे करीब 36 घंटे से लापता थे और लगभग दो सौ लोग नेत्रावती नदी में खोजबीन कर रहे थे।

इस बात का खुलासा मेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर संदीप पाटिल नेकिया उन्होंने बताया कि ‘उन्हें आज सुबह एक लाश मिली। इसकी पहचान के लिए हमने परिवार के सदस्यों को सूचित कर दिया है। अभी शव को वेनलॉक हॉस्पिटल ले जा रहे हैं। उसके बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा जायेगा।

पुलिस के अनुसार सिद्धार्थ बीते सोमवार को बेंगलुरू से सक्लेशपुर के लिए निकले थे, लेकिन उन्होंने बीच रास्ते में अपने ड्राइवर को मेंगलुरू चलने को कहा। उन्हें अंतिम बार सोमवार रात नेत्रावती नदी पर पुल के पास देखा गया था।

पुलिस ने बताया कि सिद्धार्थ के कार चालक बसवराज पाटिल ने मेंगलुरू में एक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया। दर्ज मामले के अनुसार, ‘सिद्धार्थ नेत्रावती नदी के पुल पर कार से यह कहकर उतर गए कि वह थोड़ी देर सैर करना चाहते हैं, साथ ही ड्राईवर को पुल के दूसरे छोर पर इंतजार करने को कहा लेकिन एक घंटे बाद भी नहीं लौटे।’

वहीं, पुलिस इस बात का अंदाजा लगा रही है कि सिद्धार्थ बहती नदी में कूद गए होंगे तभी ड्राइवर को वहां नहीं मिले। बता दें कि सिद्धार्थ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और यूपीए-2 सरकार में विदेश मंत्री (2009-2012) रह चुके एस. एम. कृष्णा के सबसे बड़े दामाद थे। कृष्णा 1999 से 2004 के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं।

लेटर में सिद्धार्थ ने माफ करने को कहा

वहीं, इस मामले में सिद्धार्थ द्वारा लिखा गया एक पत्र सामने आया है। इस लेटर में सिद्धार्थ ने कर्मचारियों और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को लिखा है कि सभी वित्तीय लेनदेन मेरी जिम्मेदारी है। कानून को मुझे और केवल मुझे जवाबदेह रखना चाहिए।

27 जुलाई को लिखे पत्र में सिद्धार्थ ने कहा कि मुझे उन सभी लोगों को निराश करने का बहुत अफसोस है, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया। मैंने लंबे समय तक लड़ाई लड़ी लेकिन आज मैंने हार मान ली क्योंकि मैं और दबाव नहीं बना सकता था। उन्होंने आगे लिखा कि मेरा इरादा कभी भी किसी को धोखा देने या गुमराह करने का नहीं था, मैं एक उद्यमी के रूप में विफल रहा हूं। यह मेरी ईमानदारी है। मुझे उम्मीद है कि किसी दिन आप मुझे समझेंगे, माफ करेंगे।

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