खून के रिश्ते नहीं पसीजे तो अंतिम संस्कार के लिए आगे आये डीएम और एसपी

जुबिली न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. बिहार के पूर्णिया जिले में खून के रिश्तों में ऐसी नफरत देखने को मिली जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. पिता और सगे भाई ने ऐसा कारनामा अंजाम दिया जिसकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है. पूर्णिया के दीवानगंज इलाके के वार्ड नम्बर छह में रहने वाले नवीन मंडल की दिल का दौरा पड़ने से हुई मौत के बाद नवीन के पिता और सगे बड़े भाई ने नवीन के शव को अपने घर में नहीं लाने दिया. नवीन की दोनों बेटियां अपने पिता की लाश लेकर एम्बुलेंस में बैठी रहीं लेकिन बेटे की लाश देखने के लिए पिता न तो घर से निकला और न ही उसे अपने घर में लाने दिया.

अपने ही दरवाज़े पर एम्बुलेंस में लेटे नवीन मंडल को घर में प्रवेश दिलाने की कोशिशें पूरे मोहल्ले ने की. पुलिस ने भी घर में जाकर बात की. बात नहीं बनी तो डीएम और एसपी भी वहां पहुंचे लेकिन नवीन के घर वालों ने कह दिया कि जब उससे कोई रिश्ता ही बाकी नहीं रहा तो फिर उसकी लाश से हमें क्या मतलब है. इस परिवार ने नवीन की बेटियों को भी अपनाने से इनकार कर दिया है.

मौत के बाद भी जब खून के रिश्ते नहीं पसीजे तो डीएम और एसपी ने जनप्रतिनिधियों की मदद से नवीन के दाह संस्कार का इंतजाम किया. बताया जाता है कि बाप-बेटे के सम्बन्ध तो 25 साल पहले ही तब खत्म हो गए थे जब नवीन मंडल ने अपनी मामी के साथ शादी कर ली थी. इस रिश्ते के बाद पूरे परिवार ने उनसे रिश्ता तोड़ लिया था. तब से वह अपने परिवार के साथ पंचायत भवन में रहते थे. दो साल पहले पत्नी की मौत के बाद से अपनी बेटियों मोनी और सोनी की देखरेख की ज़िम्मेदारी भी उन्हीं पर आ गई थी. अचानक से हार्ट अटैक के बाद उनकी भी मौत हो गई तो बेतोयों को देखने वाला कोई नहीं रह गया.

अंतिम संस्कार के लिए श्मशान तक उनकी बेटियों ने कंधा दिया. स्थानीय गाँव के मुखिया अंगद मंडल और गाँव के लोग कंधा देकर श्मशान तक ले गए. अंतिम संस्कार के बाद मोनी और सोनी को भी उस घर में प्रवेश नहीं मिला. कहा गया कि जब हमारा नवीन से कोई सम्बन्ध नहीं है तो उसकी बेटियों से क्या मतलब. फिलहाल गाँव के मुखिया ने उनके रहने का इंतजाम किया है.

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