Thursday - 6 May 2021 - 6:32 PM

भोपाल में रेमडेसिविर को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

जुबिली न्यूज डेस्क

देशभर में रेमडेसिविर को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। कोरोना के इलाज में कारगर रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर भोपाल के निजी मेडिकल कॉलेज में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है।

एमपी के भोपाल में एक निजी मेडिकल कॉलेज में कोरोना के गंभीर मरीजों को रेमडेसिविर की वजह सामान्य इजेक्शन दिया गया।

भोपाल के एल. एन. मेडिकल कॉलेज की एक नर्स अस्पताल से रेमडेसिविर चुराकर बाजार में ब्लैक में बेंचकर पैसे कमा रही थी।

जब इंजेक्शन ब्लैक करने वाला व्यक्ति पुलिस की पकड़ में आया तो मामले का खुलासा हुआ। मामले की मास्टर माइंड नर्स फरार है।

क्या है मामला?

एल. एन. मेडिकल कॉलेज में पदस्थ एक नर्स शालिनी वर्मा की ड्यूटी कोरोना संक्रमण के शिकार गंभीर रोगियों की देखरेख में थी।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक जान बचाने में मददगार साबित हो रहे रेमडेसिविर इंजेक्शनों को गंभीर रोगियों को लगाने की बजाय नर्स चुराकर प्रेमी झलकन सिंह के जरिए खुले बाजार में 20 से 30 हजार रुपये में बिकवा रही थी।

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कैसे हुआ खुलासा

दरअसल मेडिकल कॉलेज में भरती एक गंभीर कोरोना मरीज को रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत थी। परिजन इंजेक्शन की तलाश कर रहे थे। नर्स ने अपने प्रेमी झलकन को सूचित किया।

झलकन ने जरूरतमंद परिजनों से संपर्क साधा। दोनों के बीच पैसों को लेकर खींचतान चली। खींचतान के बीच गंभीर रोगी की मौत हो गई। लेकिन परिजनों ने गोपनीय तरीके से पूरा मामला पुलिस के संज्ञान में ला दिया।

पुलिस ने झलकन पर नजर रखना शुरू किया। उसे इंजेक्शन ब्लैक में बेचने की जुगतबाजी करते हुए शुक्रवार को पुलिस ने धर लिया गया। पुलिस ने उसकी जेब से रेमडेसिविर का एक इंजेक्शन भी बरामद किया।

पुलिस ने झलकन से पूछताछ की तो चौकाने वाला मामला सामने आया। झलकन सिंह ने बताया कि एल. एन. मेडिकल कॉलेज के कोरोना के गंभीर मरीजों की देखरेख में उसकी प्रेमिका नर्स शालिनी की भी ड्यूटी है।

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जिन गंभीर रोगियों की जान बचाने के लिए अस्पताल प्रबंधन रेमडेसिविर इंजेक्शन जारी करता, नर्स उनमें कुछ रोगियों को सामान्य इंजेक्शन लगाकर रेमडेसिविर इंजेक्शन गायब कर देती थी।

अभियुक्त झलकन सिंह ने एक और सनसनीखेज खुलासा किया। उसने बताया कि उसने जे. के. अस्पताल के एक डॉक्टर शुभम पटेरिया को भी रेमडेसिविर इंजेक्शन ब्लैक में बेचा। डॉक्टर से उसका सौदा 13 हजार रुपये में तय हुआ था।

डॉक्टर ने इंजेक्शन का ऑनलाइन पैमेंट उसे किया था। पुलिस इस मामले की भी पड़ताल कर रही है। डॉक्टर से पूछताछ की भी अपुष्ट खबर है।

नर्स शालिनी हुई फरार

झलकन की गिरफ्तारी की भनक लगते ही नर्स शालिनी वर्मा फरार है। फिलहाल पुलिस पता करने में जुटी है कि पूरा गोरखधंधा यह प्रेमी-प्रेमिका कितने दिनों से कर रहे थे। कितने इंजेक्शनों को अस्पताल से गायब करके नर्स ने अपने प्रेमी के जरिये खुले बाजार में मनमाने दामों पर बिकवाया? पुलिस यह पता करने में भी जुटी हुई है कि पूरे गड़बड़झाले में अस्पताल के और स्टॉफ या डॉक्टरों का हाथ तो नहीं है।

मालूम हो कि कई राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों की तरह मध्य प्रदेश एवं भोपाल में भी रेमडेसिविर इंजेक्शनों को लेकर भारी मारा-मारी है। इंजेक्शन ब्लैक होने की शिकायतें आम हैं।

भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया के सेन्ट्रल स्टोर से करीब 800 इंजेक्शन चोरी होने की वारदात भी सामने आयी थी। स्टॉफ और कुछ डॉक्टर इस हेराफेरी में शामिल थे। सभी पर एक्शन हुआ है।

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रेमडेसिविर इंजेक्शनों की कमी, कालाबाजारी और अनावश्यक स्टोर करने की शिकायतों को दूर करने के लिये सरकार इन इंजेक्शनों को जिला प्रशासन की टीमों के जरिये बंटवा रही है। बड़ी संख्या में अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।

अस्पतालों से हर दिन गंभीर मरीजों का पूरा ब्यौरा मंगाया जाता है। नामजद इंजेक्शन इश्यू कर सरकारी और निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम में भरती कोरोना के गंभीर रोगियों को लगाने के लिए भेजे जाते हैं।

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