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लोकसभा चुनाव 2019: बांसगांव लोकसभा सीट का इतिहास

 

बांसगांव गोरखपुर जिले का एक तहसील है। इसका इतिहास काफी रोचक है। बांसगांव का सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ाव रहा है और इसके अलावा किसी जमाने में कौशल राज का अन्न भण्डार भी रहा है।

पंजाब के बाद एक पट्टी में सबसे ज्यादा गेंहू इसी क्षेत्र में होता है। यहां की सबसे बड़ी विडंबना है कि  यहां प्रशासनिक और राजनीतिक हर तरह के संसाधन दिखते हैं लेकिन विकास नहीं दिखता। यही कारण है की लम्बे समय से इस क्षेत्र को जिला बनाने की मांग उठ रही है। यह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र होने के साथ-साथ विधानसभा सीट भी है।

बांसगांव श्रीनेत राजपूतों के निवास केंद्र के रूप में विख्यात है। श्रीनेत राजपूत अश्विन महीने में अपनी वर्षों पुरानी परंपरा की वजह से भी जाने जाते है। परंपरा के अनुसार राजपुताना महिलायें अष्टमी के दिन जमा होकर मां दुर्गा की आराधना करती है और श्रीनेत राजपूत नवमी को बांसगांव की कुलदेवी को अपना खून चढ़ाते हैं।

आबादी/ शिक्षा

बांसगांव यूपी के सबसे पुराने तहसीलों में से एक है। 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की आबादी 4,47,172 है जिसमें पुरुषों की संख्या 2,24,553 और महिलाओं की संख्या 2,22,619 है। यहां कुल 65 हजार परिवार रहते हैं।

यूपी के लिंगानुपात 912 के मुकाबले यहां प्रति 1000 पुरुषों पर 991 महिलायें है। कुल आबादी में से 3.4 प्रतिशत लोग शहरों में जबकि 96.6 प्रतिशत लोग गांवों में रहते है। यहां की औसत साक्षरता दर 71.35 प्रतिशत है जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 82.88 प्रतिशत और महिलाओं की साक्षरता दर 59.89 प्रतिशत है।

वर्तमान में यहां कुल मतदाता की संख्या 1,760,090 है जिसमें महिला मतदाता 779,762 और पुरुष मतदाता की संख्या 980,235 है। बांसगांव देश के 250 अति पिछड़े जिलों में आता है। यह यूपी का 34वां जिला है जिसे अति पिछड़ा अनुदान निधि कार्यक्रम के तहत सहायता मिलती है।

राजनीतिक घटनाक्रम

बांसगांव लोकसभा क्षेत्र में राजनीतिक उठापटक बहुत रही है। बांसगांव लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 67वें नंबर की सीट है। अस्तित्व में आने के बाद से ही यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही है।

बांसगांव लोकसभा में यूपी विधानसभा की कुल पांच सीटें आती है जिसमें चौरीचौरा, बांसगांव, चिल्लूपार, रुद्रपुर और बरहज शामिल है। बांसगांव की विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। वर्तमान में यहां से सांसद भाजपा के कमलेश पासवान हैं।

बांसगांव में पहली बार 1962 में चुनाव हुए। उन दिनों यह यूपी की 38वीं लोकसभा सीट हुआ करती थी। 1962 में हुए आम चुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महादेव प्रसाद ने जीत दर्ज की। 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, 1971 में कांग्रेस और 1977 में भारतीय लोकदल ने यह सीट अपने नाम की।

1980 में महावीर प्रसाद ने कांग्रेस(आई) और 1984 और 1989 में कांग्रेस के टिकट पर लगातार तीन बार जीत दर्ज की। 1991 में राज नारायण ने भारतीय जनता पार्टी को यहां पहली बार जीत दिलाई।

1996 में चुनाव जीतकर समाजवादी पार्टी की सुभावती देवी बांसगांव की पहली महिला सांसद बनी। 1998 और 1999 में एक बार फिर राज नारायण ने भारतीय जनता पार्टी को यहां जीत दिलाई। 2004 में कांग्रेस के महावीर प्रसाद बसपा के श्रीनाथ जी को हराकर लोकसभा पहुंचे।

2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के कमलेश पासवान विजयी रहे हैं। गोरखपुर में जन्मे कमलेश पासवान सोलहवीं लोकसभा में खाद्य, उपभोक्ता मामलों, वाणिज्य और जन वितरण प्रणाली की स्थाई समिति के सदस्य है।

 

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