Monday - 3 August 2020 - 3:21 PM

WHO से अलग हुआ अमेरिका

जुबिली न्यूज डेस्क

अमेरिकी  राष्ट्रपति ने अपने विश्व स्वास्थ्य संगठन से से अलग होने के अपने बयान पर अमल करना शुरु कर दिया है। डब्ल्यूएचओ से अमरीका के बाहर निकालने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।

मई के अंतिम सप्ताह में हीअमरीकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने इसका एलान कर दिया था जब उन्होंने संगठन पर कोरोना महामारी के दौरान चीन की तरफदारी करने का आरोप लगाया था।

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हालांकि यूरोपीय संगठन और अन्य लोगों ने उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा था, मगर ट्रंप ने इससे इनकार करते हुए कहा कि वो इस पैसे को कहीं और इस्तेमाल करेंगे।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अब संयुक्त राष्ट्र और अमरीकी संसद को इस बारे में औपचारिक तौर पर सूचित कर दिया है। हालांकि अमरीका के विश्व स्वास्थ्य संगठन से हटने की प्रक्रिया के पूरी होने में एक साल लगेगा।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफ न डुजारिक ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि अमरीका ने संगठन से हटने की सूचना दे दी है जो 6 जुलाई 2021 से प्रभावी होगा।

अमरीकी सांसद और विदेश संबंध समिति के वरिष्ठ सदस्य, डेमोक्रेट सेनेटर रॉबर्ड मेनेंडीज ने भी इसकी पुष्टि करते हुए ट्वीट किया है- “कांग्रेस को सूचना मिली है कि अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने महामारी के बीच में आधिकारिक तौर पर अमरीका को विश्व स्वास्थ्य संगठन से हटा लिया है। इसके बाद अमरीका के लोग बीमार रहेंगे और अमरीका अकेला।”

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वहीं अमेरिका सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि अमरीका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को उन सुधारों का विस्तृत ब्यौरा दिया था जो वो चाहता था कि लागू किए जाएं, मगर संगठन ने इससे इनकार कर दिया।

अधिकारी ने कहा – “चूँकि उन्होंने इन जरूरी सुधारों को अपनाने से मना कर दिया, हम आज उनके साथ अपने संबंध खत्म कर लेंगे।”

वहीं नवंबर में होने वाले अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन ने कहा है कि वो राष्ट्रपति बनते ही फैसले को पलट देंगे।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है- “राष्ट्रपति बनने के पहले ही दिन मैं विश्व स्वास्थ्य संगठन का फिर से सदस्य बन जाऊंगा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना नेतृत्व बहाल करूंगा।”

मालूम हो कि अमरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन में सबसे ज़्यादा आर्थिक योगदान देता है। उसने 2019 में संगठन को 40 करोड़ डॉलर दिए थे जो उसके कुल बजट का 15 प्रतिशत हिस्सा है।

अमेरिका के इस कदम के बाद डब्ल्यूएचओ की आर्थिक हालत और कोरोना महामारी को रोकने के उसके कई कार्यक्रमों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

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