Sunday - 23 January 2022 - 1:42 AM

बुन्देलखण्ड में एक बार फिर सूखा, ये जिला होगा सबसे अधिक प्रभावित

  • बुन्देलखण्ड में चित्रकूट को छोडकर सभी जगह औसत के सापेक्ष न्यूनतम वर्षा

डा. संजय सिंह

बुन्देलखण्ड में सूखे का संकट फिर एक बार दिखायी देने लगा है। उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड के 13 जिलों में हुयी वर्षा के विश्लेषण में निकलकर आ रहा है कि इस वर्ष चित्रकूट में औसत वर्षा के सापेक्ष 51 प्रतिशत अधिक वर्षा हुयी है, वही महोबा में अब तक औसत 638 मी0मी0 वर्षा होनी चाहिए थी जिसके सापेक्ष 293 मी0मी (46 प्रतिशत) वर्षा हुयी है।

दूसरे नम्बर पर जालौन है जहां पर 680 मी0मी0 के सापेक्ष 392 मी0मी0 (58 प्रतिशत) वर्षा हुयी है। तीसरे नम्बर पर झांसी है जहां पर 717 मी0मी0 के सापेक्ष 474 मी0मी0 (66 प्रतिशत) वर्षा हुयी है।

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चौथे नम्बर पर ललितपुर है जहां पर 787 मी0मी0 के सापेक्ष 560 मी0मी0 (71 प्रतिशत) वर्षा हुयी है। पांचवे नम्बर पर छतरपुर है जहां पर 900 मी0मी0 के सापेक्ष 644 मी0मी0 (71 प्रतिशत) वर्षा हुयी है। छठवे नम्बर पर दतिया है जहां पर 716 मी0मी0 के सापेक्ष 541 मी0मी0 (74 प्रतिशत) वर्षा हुयी है। सातवे नम्बर पर टीकमगढ है जहां पर 846 मी0मी0 के सापेक्ष 670 मी0मी0 (79 प्रतिशत) वर्षा हुयी है।

आठवे नम्बर पर बांदा है जहां पर 801 मी0मी0 के सापेक्ष 673 मी0मी0 (84 प्रतिशत) वर्षा हुयी है। नौवे नम्बर पर पन्ना है जहां पर 1034 मी0मी0 के सापेक्ष 865 मी0मी0 (84 प्रतिशत) वर्षा हुयी है। दसवे नम्बर पर सागर है जहां पर 1025 मी0मी0 के सापेक्ष 871 मी0मी0 (85 प्रतिशत) वर्षा हुयी है। ग्यारहवे नम्बर पर हमीरपुर है जहां पर 974 मी0मी0 के सापेक्ष 834 मी0मी0 (86 प्रतिशत) वर्षा हुयी है। बारहवे नम्बर पर दमोह है जहां पर 996 मी0मी0 के सापेक्ष 915 मी0मी0 (92 प्रतिशत) वर्षा हुयी है।

पिछले 20 सालों में बुन्देलखण्ड में 13 वर्ष सूखे के रहे है, यह 14 चौदहवी साल है जब बुन्देलखण्ड में सामान्य से बहुत कम वर्षा हुयी है। बुन्देलखण्ड में 15 सितम्बर तक ही वर्षा होती है। यदि आने वाले दिनों में वर्षा हो गयी तब तो ठीक है वरना रबी की फसल बुबाई बहुत बडे क्षेत्रफल में नहीं हो पायेगी।

जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक डा. संजय सिंह कहते है कि इस वर्ष देश में सामान्य मानसून रहा, पूरे देश में जहां बाढ आ रही है वही बुन्देलखण्ड सूखाग्रस्त है। जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण बुन्देलखण्ड में हर दो साल में सूखा हो रहा है यदि बुन्देलखण्ड में यही क्रम चलता रहा तो यह इलाका रेगिस्तान की तरह हो जायेगा।

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इस वर्ष बुन्देलखण्ड के तालाब पूरी तरह से नही भर पाये है, जिसका असर आने वाले दिनों में भूगर्भीय जल स्तर पर पड़ेगा। कुए और हैण्डपम्प जनवरी में ही सूखने लगेगे। न्यूनतम वर्षा का प्रभाव सबसे अधिक महोबा में देखने को मिलेगा, जहां सबसे कम वर्षा हुयी है।

पर्यावरणविद डा. योगेश बन्धू कहते है कि बुन्देलखण्ड में आने वाले दिनों में जल संकट और अधिक बढेगा।

किसान देशराज अहिरवार ने बताया कि इस वर्ष बरसात ना होने के कारण उरद, मूंग, मूगफली की फसलें बर्बाद हो गयी है। उरद की तो कटाई भी किसान नहीं कर रहे है, तिल भी वर्षा के अभाव में सूख रही है। अब वर्षा ना होने से रबी की फसल की बुबाई की समस्या आयेगी।

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