“तेहरान को जलना ही होगा…!’ मंत्री के बयान के बाद इजरायल ने ईरान पर बरसाईं मिसाइलें, बड़े हमले की तैयारी में नेतन्याहू”

यरुशलम/तेहरान। मिडल-ईस्ट में चल रही रस्साकशी अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां महाशक्तियों की नसीहतें भी बेअसर साबित हो रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी सलाह को दरकिनार करते हुए इजरायल ने सोमवार तड़के ईरान के सीने पर जोरदार पलटवार कर दिया।

यह हमला इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की बात मानकर शांत रहने का फैसला किया था। लेकिन रविवार रात ईरान की मिसाइलों के जवाब में सोमवार सुबह इजरायली लड़ाकू विमानों ने जो किया, उसने पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

आमतौर पर इजरायली एयरफोर्स दुश्मन की सीमा में घुसकर तबाही मचाने के लिए जानी जाती है, लेकिन इस बार इजरायल ने बेहद सधे हुए और सुरक्षित तरीके से हमला किया।

  • रणनीति: इजरायल का दावा है कि उसका कोई भी विमान ईरानी हवाई क्षेत्र (Airspace) में दाखिल नहीं हुआ।
  • लोकेशन: मिसाइलें इराक के आसमान और भूमध्य सागर में तैनात इजरायली युद्धपोतों से रिमोटली दागी गईं।
  • निशाना: तेहरान, इस्फहान, तब्रीज और पश्चिमी ईरान के मिलिट्री बेस और आतंकी ठिकाने।

ईरान की आईआरजीसी (IRGC) ने भी पुष्टि की है कि इस हमले में हवा से मार करने वाली अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ है।

2. “तेहरान को जलना ही होगा” – क्या यह महज शुरुआत है?

इस हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इजरायल इतने पर ही रुकेगा? जवाब है- शायद नहीं। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर का हालिया बयान “तेहरान को जलना ही होगा” अब हकीकत में बदलता दिख रहा है।

अंदर की बात: इजरायली डिफेंस सोर्सेज के मुताबिक, यह सिर्फ एक ट्रेलर था। इजरायल बैक-टू-बैक कई और बड़े हमलों की रूपरेखा तैयार कर चुका है, जिसका मकसद ईरान की रीढ़ तोड़ना है।

हमला करने के तुरंत बाद इजरायल को पता है कि पलटवार भयानक हो सकता है। इसलिए देश को तुरंत ‘वॉर मोड’ पर डाल दिया गया है:

  • स्कूल और ट्रांसपोर्ट: देश के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को घटाकर 75% क्षमता पर कर दिया गया है।
  • मेडिकल इमरजेंसी: सभी अस्पतालों को अंडरग्राउंड बंकरों से काम करने का सख्त निर्देश दिया गया है।
  • एयरपोर्ट: हालांकि, इजरायल एयरपोर्ट अथॉरिटी ने अभी फ्लाइट्स के संचालन को सामान्य रखा है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका की मध्यस्थता की भूमिका पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। ट्रंप के कहने के बावजूद नेतन्याहू का यह कदम दिखाता है कि इजरायल अब अपनी सुरक्षा नीतियों के लिए वाशिंगटन का मोहताज नहीं रहना चाहता।

दूसरी तरफ, ईरान ने पहले ही धमकी दे रखी है कि अगर तनाव बढ़ा तो वह दुनिया का दूसरा सबसे अहम समुद्री रास्ता बंद कर देगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था ठप हो सकती है। अगर ईरान अब जवाबी कार्रवाई करता है, तो मिडल-ईस्ट की यह आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकती है।

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