BHEL और SAIL पर बड़ा संकट! छिन जाएगा महारत्न दर्जा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियों भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) को उनके वित्तीय प्रदर्शन में सुधार लाने के लिए एक वर्ष का समय दिया है। यदि इस अवधि में दोनों कंपनियां निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरती हैं, तो उनका महारत्न (Maharatna) दर्जा घटाकर नवरत्न (Navratna) किया जा सकता है।
यह पहली बार है जब किसी महारत्न कंपनी को प्रदर्शन में सुधार नहीं होने पर दर्जा घटाने की चेतावनी दी गई है। सरकार के इस कदम को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
क्यों खतरे में है महारत्न दर्जा?
सरकारी मूल्यांकन के अनुसार BHEL और SAIL पिछले तीन वर्षों में टैक्स के बाद औसत वार्षिक लाभ (PAT) 5,000 करोड़ रुपये से अधिक रखने की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर पाई हैं।
महारत्न दर्जा बनाए रखने के लिए कंपनियों को निम्नलिखित प्रमुख मानदंड पूरे करने होते हैं:
- पिछले तीन वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का औसत वार्षिक PAT
- 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का औसत वार्षिक टर्नओवर
- 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की नेट वर्थ
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत उपस्थिति और संचालन
14 महारत्न कंपनियों में BHEL और SAIL ही ऐसी कंपनियां हैं जो जरूरी वित्तीय मानकों को पूरा नहीं कर सकीं।
महारत्न से नवरत्न बनने पर क्या होगा असर?
यदि दोनों कंपनियों का दर्जा घटाया जाता है, तो उनके बोर्ड की वित्तीय स्वायत्तता कम हो जाएगी।
वर्तमान में महारत्न कंपनियों को:
- सरकार की मंजूरी के बिना 5,000 करोड़ रुपये तक निवेश करने की अनुमति होती है।
नवरत्न कंपनियों को:
- केवल 1,000 करोड़ रुपये तक निवेश की स्वतंत्रता मिलती है।
इस बदलाव से बड़े निवेश और विस्तार योजनाओं पर असर पड़ सकता है।
पहली बार जारी हुआ ऐसा नोटिस
कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता वाली समिति ने दोनों कंपनियों को लेकर यह सिफारिश की है। समिति ने सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए सुझाव दिया कि वित्तीय मानकों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस नियमों को और सख्त बनाया जाए।
साथ ही यह भी प्रस्ताव रखा गया कि यदि कोई कंपनी लगातार निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करती है, तो उसका ‘रत्न’ दर्जा वापस लिया जा सकता है।
सरकार ने सख्त किए नियम
केंद्र सरकार पहले ही CPSEs के लिए प्रदर्शन मूल्यांकन मानदंड कड़े कर चुकी है।
अब निम्न मामलों में कंपनियों को दंड का सामना करना पड़ सकता है:
- CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) दायित्व पूरा न करना
- MSME को भुगतान में देरी
- उत्तराधिकार (Succession Planning) योजना तैयार न करना
- सरकारी खरीद नियमों का उल्लंघन
इन मामलों में निर्धारित प्रदर्शन अंक पूरी तरह काटे जा सकते हैं।
नीति आयोग ने BHEL पर जताई चिंता
मूल्यांकन के दौरान नीति आयोग ने BHEL की मानव संसाधन (HR) नीतियों को कंपनी की प्रगति में बड़ी बाधा बताया। आयोग ने HR संरचना की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं भारी उद्योग मंत्रालय ने समिति को बताया कि BHEL के वित्तीय प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए एक विशेष सुधार योजना तैयार की गई है।
SAIL के पक्ष में क्या हैं आंकड़े?
स्टील मंत्रालय के अनुसार SAIL का पिछले चार वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है और उसकी औसत नेट वर्थ 53,976 करोड़ रुपये रही है।
हालांकि कंपनी 2022-23 के बाद से 5,000 करोड़ रुपये के औसत वार्षिक लाभ के मानदंड को लगातार पूरा नहीं कर पा रही है, जो उसके महारत्न दर्जे के लिए चुनौती बन गया है।
अब आगे क्या?
भारी उद्योग मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि वे BHEL और SAIL के लिए विस्तृत टर्नअराउंड प्लान तैयार करें। सरकार अगले एक वर्ष तक दोनों कंपनियों के प्रदर्शन की निगरानी करेगी।
यदि वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो भारत की दो बड़ी सरकारी कंपनियों को महारत्न से नवरत्न श्रेणी में लाया जा सकता है।



