महिला आरक्षण बिल पर ‘नंबर गेम’ फंसा, क्या पास होगा विधेयक? सपा की भूमिका बनी सबसे अहम

जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर जारी बहस के बीच अब सबकी नजर आगामी वोटिंग पर टिकी है। अगले कुछ घंटों में होने वाली वोटिंग से तय होगा कि सरकार इस अहम विधेयक को पास करा पाती है या नहीं।
सरकार vs विपक्ष: सियासी घमासान तेज
बहस के दौरान विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने साफ कहा कि वे इस बिल का विरोध करेंगे, वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सभी सांसदों से अपील की है कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें।
इस बीच संसदीय कार्यमंत्री Kiren Rijiju और सपा प्रमुख Akhilesh Yadav के बीच हुई बातचीत ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, सपा से समर्थन की अपील की गई है।
क्यों अहम है सपा का रोल?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी इस बिल के पास या फेल होने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है, क्योंकि—
- सपा लोकसभा में दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है
- उसके पास 37 सांसद हैं
- मौजूदा स्थिति में सत्ता और विपक्ष के बीच अंतर बहुत ज्यादा नहीं है
नंबर गेम कहां फंस रहा है?
लोकसभा की मौजूदा स्थिति के अनुसार—
- कुल सदस्य: 540
- बिल पास करने के लिए जरूरी: 360 (दो-तिहाई बहुमत)
ताकत का गणित:
- NDA: 293 सांसद
- विपक्ष (INDIA): 232 सांसद
- निर्दलीय: 7
- अन्य दल: 8
सरकार को बिल पास कराने के लिए अभी भी करीब 67 सांसदों का अतिरिक्त समर्थन चाहिए।
किसके पास कितनी ताकत?
NDA के प्रमुख दल
- BJP: 240
- TDP: 16
- JDU: 12
- शिवसेना: 7
- LJP (R): 5
विपक्ष के प्रमुख दल
- कांग्रेस: 98
- सपा: 37
- TMC: 28
- DMK: 22
क्या कहता है मौजूदा समीकरण?
- अगर विपक्ष एकजुट रहता है, तो सरकार के लिए राह मुश्किल
- अगर सपा या कुछ अन्य दल समर्थन देते हैं, तो बिल पास हो सकता है
- निर्दलीय और छोटे दल “किंगमेकर” बन सकते हैं
अब क्या होगा आगे?
लोकसभा में कुछ ही घंटों में होने वाली वोटिंग इस बात का फैसला करेगी कि—
- क्या महिला आरक्षण बिल पास होगा
- या फिर सियासी गणित इसे रोक देगा
फिलहाल, पूरे देश की नजर इस हाई-वोल्टेज राजनीतिक मुकाबले पर टिकी हुई है।



