अमेरिका को चीन की चेतावनी: ईरान पर हमला हुआ तो रुक सकता है रेयर मेटल निर्यात

जुबिली स्पेशल डेस्क
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच चीन ने पहली बार खुलकर तेहरान के समर्थन में कड़ा बयान दिया है। बीजिंग ने संकेत दिया है कि यदि वॉशिंगटन ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है तो वह दुर्लभ धातुओं (रेयर मेटल) के निर्यात पर रोक लगाने जैसे कदम उठा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन का दावा है कि ऐसे किसी फैसले का असर अमेरिका के रक्षा और तकनीकी उद्योग पर पड़ सकता है। हालांकि “48 घंटे में सैन्य उद्योग ठप हो जाएगा” जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि रेयर अर्थ सप्लाई में व्यवधान अमेरिका के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब जिनेवा में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच ओमान की मध्यस्थता में संभावित वार्ता को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज है।
अमेरिका के लिए रेयर मेटल क्यों अहम?
रेयर मेटल का उपयोग आधुनिक हथियार प्रणालियों, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, रडार तकनीक, फाइटर जेट इंजन और इलेक्ट्रॉनिक चिप्स में होता है। अमेरिकी रक्षा परियोजनाओं, जिनमें उन्नत लड़ाकू विमान जैसे F-35 Lightning II भी शामिल हैं, में इन धातुओं की अहम भूमिका मानी जाती है।
कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की रेयर अर्थ सप्लाई का बड़ा हिस्सा चीन से आता है। अनुमान है कि अमेरिका अपनी कुल जरूरत का लगभग 80-90 प्रतिशत तक आयात चीन से करता रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में वैकल्पिक स्रोतों की तलाश भी तेज हुई है।
चीन-ईरान रक्षा सहयोग की अटकलें
समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, चीन और ईरान के बीच रक्षा सहयोग को लेकर भी चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि तेहरान चीनी सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम में रुचि दिखा रहा है।
Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) जैसे रक्षा विश्लेषण संस्थानों का मानना है कि एंटी-शिप मिसाइलें क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं, खासकर यदि उनका उपयोग सामरिक जलमार्गों के आसपास किया जाए।
चीन के लिए ईरान क्यों रणनीतिक रूप से अहम?
ईरान, चीन के लिए ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है। विभिन्न ऊर्जा रिपोर्टों के अनुसार, चीन प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चा तेल ईरान से खरीदता है। ऐसे में दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत माने जाते हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव होता है तो इसका असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ सकता है। यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है और चीन के व्यापारिक हित भी इससे जुड़े हुए हैं।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक वार्ता से तनाव कम होगा या क्षेत्रीय हालात और गंभीर रूप ले सकते हैं।

