आखिर कांग्रेस के लिए पायलट इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

जुबिली न्यूज डेस्क

सचिन पायलट की घर वापसी के बाद से राजस्थान कांग्रेस में मेल-मिलाप का दौर जारी है। सारे गिले-शिकवे भूलाकर आगे काम करने की बात की जा रही है। इसके साथ ही पायलट की घर वापसी की वजह भी तलाशी जा रही है कि आखिर क्या वजह है कि सचिन के बगावत के बाद वह कांग्रेस हाईकमान ने उनकी घर वापसी कराई।

कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान भले ही खत्म हो गई है पर पायलट की वापसी कई मायने में उनके लिए फायदे का सौदा है। बताया जा रहा है कि पायलट की इस वापसी में प्रियंका गांधी की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने ही जरूरत और रणनीति के लिहाज से गहलोत से बात करके ये हल निकाला।

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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पायलट की वापसी नहीं चाहते थे। उन्होंने तो पायलट को पार्टी से बाहर करने की पूरी कोशिश की। फिर सवाल वहीं कि आखिर वह माने कैसे? दरअसल पायलट ऐसे ही कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। वह महत्वपूर्ण इसलिए हैं क्योंकि राजस्थान के 7 फीसदी गुर्जर वोट पर पायलट की अच्छी पकड़ है। पायलट की राजस्थान ही नहीं, देशभर में गुर्जर नेताओं पर पकड़ है।

इसीलिए कांंग्रेस को पायलट की जरूरत सिर्फ राजस्थान में ही नहीं बल्कि केंद्र में भी है। कांग्रेस को पायलट की जरूरत जहां 2022 में यूपी चुनाव की जंग के लिए है तो वहीं उसे पायलट 2024 में लोकसभा चुनाव के लिए भी चाहिए।

प्रियंका गांधी ने ऐसे ही पायलट की घर वापसी नहीं कराई है। उत्तर प्रदेश में वह कांग्रेस की खोई जमीन वापस पाने के लिए मेहनत कर रही है। 2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव होना है और यूपी 55 विधानसभा सीटों और 15 लोकसभा सीटों पर गुर्जर मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।

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ये वहीं गुर्जर मतदाता है जिनमें सचिन की पकड़ अच्छी है। इसलिए कांग्रेस हाईकमान ने सचिन के विद्रोह के बाद भी उन्हें खुशी-खुशी गले लगा लिया। यदि पायलट कांग्रेस छोड़ के चले जाते तो गुर्जर मतदाताओं पर इसका असर पड़ता और 2022 और 2024 के चुनाव में गुर्जर बहुल सीटों पर कांग्रेस को नुकसान होता।

उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की 14 लोकसभा सीटों पर पर गुर्जर वोट बैंक निर्णायक भूमिका में हैं। हरियाणा, जम्मू कश्मीर, दिल्ली समेत उत्तर भारत में गुर्जर मतदाता की संख्या खासी है। राजस्थान में पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान की 30 सीटों पर गुर्जर मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। साल 2018 में राजस्थान में कांग्रेस के सत्ता में आने की एक वजह 7 फीसदी गुर्जर वोट बैंक का कांग्रेस के पक्ष में आना भी रहा।

ये सब कारण सचिन की वापसी की बड़ी वजह है। इसलिए प्रियंका गांधी के सामने जब कांग्रेस के एक रणनीतिकार ने ये आंकड़े रखे तो प्रियंका गांधी ने पायलट की वापसी दिशा में एक सप्ताह पहले ही काम करना शुरू कर दिया था।

इसके अलावा दूसरी बड़ी वजह फारूक अब्दुल्ला परिवार भी है। कांग्रेस में सचिन की वापसी के पीछे फारुक अब्दुल्ला परिवार की गांधी परिवार और कांग्रेस नेताओं से रिश्ते अच्छे भी हैं। फारुक और उमर अब्दुल्ला ने गुलाब नबी आजाद और अहमद पटेल के जरिए सचिन पायलट की वापसी की कोशिश शुरू की, जो देर से ही सही, लेकिन कामयाब हुई।

दूसरी वजह राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस की युवा ब्रिगेड भी है। इस ब्रिगेड ने पायलट की वापसी के लिए गांधी परिवार पर दबाब बनाया। दीपेंद्र हुड्डा और भंवर जितेंद्र सिंह पायलट और प्रियंका के बीच बातचीत का जरिया बने। युवा ब्रिग्रेड ने दबाव बनाया कि अगर पायलट कांग्रेस छोड़ते हैं तो फिर कांग्रेस की बची-खुची युवा ब्रिगेड के किनारे होने से पार्टी की मुश्किल बढ़ सकती है।

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