NEET पेपर लीक: कैसे बिका भविष्य और कौन है इस घोटाले का मास्टरमाइंड?

जुबिली स्पेशल डेस्क
राजस्थान से शुरू हुआ पेपर लीक का विवाद अब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI के पास पहुंच चुका है। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा में करीब 22 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर लगा था, लेकिन धांधली की पुष्टि होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द करने का कड़ा फैसला लिया है।
लीक की ‘क्रोनोलॉजी’: कैसे और कहां से फैला जाल?
जांच में सामने आया है कि इस पूरे खेल के तार राजस्थान के सीकर और केरल के बीच जुड़े हुए हैं। पेपर लीक होने की कड़ियां कुछ इस प्रकार हैं…
- मुख्य मास्टरमाइंड: सीकर (पिपराली रोड) में ‘एसके कंसल्टेंसी’ चलाने वाला राकेश मंडावरिया इस पूरे प्रकरण का मुख्य किरदार बनकर उभरा है।
- क्वेश्चन बैंक का सोर्स: सूत्रों के अनुसार, मंडावरिया को अप्रैल में ही प्रश्नपत्रों का ‘क्वेश्चन बैंक’ मिल गया था।
- केरल कनेक्शन: राकेश मंडावरिया को यह पेपर चूरू के रहने वाले एक युवक ने उपलब्ध कराया था, जो वर्तमान में केरल में रहकर MBBS की पढ़ाई कर रहा था।
- PDF का आदान-प्रदान: चौंकाने वाली बात यह है कि केरल में बैठे इस छात्र के पास भी प्रश्नों की PDF सीकर के ही किसी माध्यम से पहुंची थी। यानी पेपर पहले राजस्थान से केरल गया और फिर वापस राजस्थान के अन्य सेंटर्स तक फैलाया गया।
अब तक की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अब तक कई गिरफ्तारियां की हैं। कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि पेपर मूल रूप से किस स्तर (प्रिंटिंग प्रेस या ट्रांसपोर्टेशन) से बाहर निकला।
अहम जानकारी: जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही अब CBI यह पता लगाने में जुटी है कि इस सिंडिकेट में और कितने बड़े नाम शामिल हैं और क्या यह जाल अन्य राज्यों में भी फैला हुआ है।
छात्रों पर असर
22 लाख से ज्यादा परीक्षार्थियों के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। परीक्षा रद्द होने के बाद अब छात्रों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी होगी। सरकार और NTA का लक्ष्य अब एक पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना है ताकि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो।


