Friday - 5 June 2020 - 6:09 PM

69000 शिक्षक भर्ती: SC से योगी सरकार को झटका, 14 जुलाई को अगली सुनवाई

न्‍यूज डेस्‍क

बेसिक शिक्षा विभाग में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से इंकार किया है। कोर्ट ने शिक्षा मित्रों की याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि इसके बाद दो जजों ने आदेश में संशोधन की इच्छा जताई और मामले को ओपन कोर्ट में सुनने का आदेश दिया गया। इसका याचिकाकर्ताओं ने विरोध किया। इसके बाद मामले की सुनवाई हुई और कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार 6 जुलाई से पहले अपना पक्ष भेजे। सरकार बताए कि 45 फीसद सामान्य और आरक्षित के लिए 40 फीसदी के आधार को क्यों बदला। 6 जुलाई तक कोर्ट चार्ट के जरिए भर्ती के सारे चरण और डिटेल बताए। तब तक शिक्षा मित्र, जो सहायक शिक्षक के तौर पर कार्यरत हैं, उनको छेड़ा न जाए।

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आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र एसोसिएशन ने 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

दरअसल, इस मामले में एक याचिकाकर्ता की ओर से सबसे पहले वरिष्ठ मुकुल रोहतगी ने दलील रखी। उनकी दलील को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था। फिर, कोर्ट ने दुष्यंत दवे और अर्यमा सुंदरम की दलील पर याचिका को खारिज के आदेश में मोडिफाई करने की मंशा जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले इतने पक्षकार हैं कि उन सबको वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनना मुश्किल है। लिहाजा सभी मामलों की सुनवाई तब तक लंबित रहेगी। मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में होगी। तब तक कोई अंतरिम आदेश नहीं जारी किया जाएगा। दुष्यंत दवे ने ओपन कोर्ट में सुनवाई होने तक मामले को टालने का विरोध किया।

 

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याचिकाकर्ताओं के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट आज ही मामले की सुनवाई की कोर्ट ने दुष्यंत दवे से पूछा कि जब अच्छी योग्यता वाले शिक्षक मिल रहे हैं तो फिर बार लोअर करने का क्या मतलब और तुक है?

इस पर शिक्षा मित्रों की ओर से पीएस पटवालिया ने कहा कि जहां तक योग्यता की बात है तो इसमें भी काफी लोचा है। योग्यता का आधार 10 वीं, 12 वीं, स्नातक और बीटीसी/बीएड के कुल नम्बरों के 10-10 फीसदी औसत योग से होता है।

सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने पूछे सवाल

शिक्षामित्रों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि मेरिट के नाम पर भारांक और अन्य नियम क्यों बदले गए? इस पर तुषार मेहता ने कहा कि वो कल इस बारे में सरकार से दिशा-निर्देश लेकर बताएंगे। इस पर कोर्ट कि हम फिर सभी याचिकाओं पर नोटिस जारी कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम ये भी देखेंगे कि नियुक्ति प्रक्रिया के नियम परीक्षा से पहले या बाद में बदलना कितना सही गलत है। इस पर वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि रिजल्ट रिकलकुलेट और रिकम्प्यूटेड हो 40-45 % के आधार पर। पहली परीक्षा किसी और आधार पर और दूसरी किसी और आधार पर क्यों? इस पर तुषार मेहता ने कहा कि ये लोग प्रतिभाशाली उम्मीदवारों पर कम प्रतिभा वालों का कब्जा चाहते हैं।

क्या थी मुकुल रोहतगी की दलील

सबसे पहले शिक्षामित्रों की ओर दलील रखते हुए मुकुल रोहतगी ने कहा कि सिंगल जज बेंच ने हमारे दावे के समर्थन में निर्णय दिया था, लेकिन डिविजन ने हमारा पक्ष पूरी तरह नहीं सुना। वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि मसला हमारे कॉन्ट्रैक्ट के रिन्युअल को लेकर भी है और नियुक्ति की प्रक्रिया में लगातार किए गए बदलाव पर भी।

इस पर जस्टिल ललित ने पूछा कि कितने शिक्षामित्र नियुक्त हुए थे? जवाब में मुकुल रोहतगी ने कहा कि 30 हजार, फिर सरकार ने शिक्षामित्रों की बजाय 69000 प्राथमिक शिक्षकों की नई भर्ती निकाली। मुकुल रोहतगी की सारी दलील सुनने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था।

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