साप्ताहिक बाज़ारों के व्यापारियों के सामने फिर आया रोजी-रोटी का संकट

जुबिली न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. कोरोना संक्रमण की वजह से लम्बे समय तक चले लॉकडाउन के बाद जब अनलॉक हुआ है तब व्यापारियों को तो राहत मिली है मगर साप्ताहिक बाज़ारों के ज़रिये अपना पेट पालने वालों की दिक्कतें कम नहीं हुई हैं.

राजधानी लखनऊ में सप्ताह में पांच बाजारें लगती हैं. सोमवार और शुक्रवार साप्ताहिक बाजारें नहीं लगती हैं. मंगलवार को पहले आलमबाग में चन्दर नगर गेट के पास बाज़ार लगती थी जो अब अवध अस्पताल के भी आगे चली गई है. बुधवार को महानगर में साप्ताहिक बाज़ार लगती है. बृहस्पतिवार को अमीनाबाद में बाज़ार लगती है. शनिवार और रविवार को लॉकडाउन की वजह से अमीनाबाद का बाज़ार बृहस्पतिवार को खुलने लगा है इस वजह से अमीनाबाद में लगने वाला साप्ताहिक बाज़ार बंद हो गया है. रविवार को नक्खास की बाज़ार है. रविवार भी लॉकडाउन है.

साप्ताहिक बाजार व्यापारी कल्याण समिति के अध्यक्ष वसी उल्ला आज़ाद और महामंत्री अनिल सक्सेना का कहना है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर आयी थी तब साप्ताहिक बाज़ार व्यापारी कल्याण समिति ने खुद ही बैठक कर बाज़ार न लगाने का फैसला किया था. अब जब सरकार ने खुद अनलॉक किया है तब साप्ताहिक बाज़ार के व्यापारियों के हिस्से में व्यापार के लिए सिर्फ दो दिन आये हैं. शनिवार और रविवार लॉकडाउन की वजह से दुकानें नहीं लग सकतीं और बृहस्पतिवार को अमीनाबाद बाज़ार खोले जाने का फैसला करने से बाज़ार नहीं लग सकता.

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व्यापारी नेताओं का कहना है कि कोरोना काल में लम्बे समय तक बंदी झेलने और अब हफ्ते में सिर्फ दो दिन के व्यापार की वजह से साप्ताहिक बाज़ार लगाने वालों के सामने जीवन यापन का संकट आ गया है. दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि जिस तरह से अमीनाबाद के व्यापारियों को  लॉकडाउन के मद्देनज़र बृहस्पतिवार को बाज़ार खोलने की छूट दी गई है, उसी तरह से साप्ताहिक बाज़ार लगाने वाले छोटे व्यापारियों को सोमवार और शुक्रवार को किसी निश्चित स्थान पर बाज़ार लगाने की छूट देने का इंतजाम करें जिससे उनके सामने रोजी-रोटी की दिक्कत न आये.

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