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	<title>कोरोनावायरस Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>ओमिक्रान की दस्तक के पहले ही सतर्क हो जाएं हम</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/let-us-be-alert-before-the-knock-of-omicron/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Dec 2021 05:55:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कृष्णमोहन झा लगभग दो साल पहले चीन की एक प्रयोगशाला से निकल कर दुनिया भर में तबाही मचाने वाले कोरोनावायरस के अब तक कई स्वरूप सामने आ चुके हैं और अब दक्षिण अफ्रीका में इसका एक और वेरिएंट सामने आया है जिसे ओमिक्रान नाम दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अब तक दुनिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>कृष्णमोहन झा</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-193635 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/krishna-mohan-jha-150x150.jpg" alt="" width="120" height="120" />लगभग दो साल पहले चीन की एक प्रयोगशाला से निकल कर दुनिया भर में तबाही मचाने वाले कोरोनावायरस के अब तक कई स्वरूप सामने आ चुके हैं और अब दक्षिण अफ्रीका में इसका एक और वेरिएंट सामने आया है जिसे ओमिक्रान नाम दिया गया है।</p>
<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अब तक दुनिया के 23 देशों में ओमिक्रान दस्तक दे चुका है लेकिन संतोष की बात यह है कि इस नए वेरिएंट के संक्रमण की वजह से किसी भी देश में अब यह किसी भी संक्रमित व्यक्ति की मौत होने की खबर नहीं मिली है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-241121" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/11/CORONA-VIRUS-NEW-VARIANT-jubilee-post.jpg" alt="" width="837" height="515" /></p>
<p>लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह चेतावनी अवश्य दे दी है कि कोरोनावायरस का नया वैरिएंट पूर्व में पाए गए उन सभी वैरिएंट से ज्यादा घातक साबित हो सकता है जिनके कारण पहले दुनिया के कई देशों में तबाही की स्थिति निर्मित हो चुकी है।</p>
<p>केंद्रीय मंत्री मनसुख मांगलिया के अनुसार यद्यपि अभी तक ओमिक्रान से संक्रमण का एक भी मामला भारत में सामने नहीं आया है लेकिन केंद्र सरकार ने तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए विभिन्न राज्य सरकारों को अभी से पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दे दिए हैं। इसके बाद सभी राज्य सरकारों ने कोरोना से बचाव के ऐहतियाती उपायों में लापरवाही बरतने वाले लोगों पर सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है।</p>
<p>इसमें दो राय नहीं हो सकती कि कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या में तेजी से गिरावट के रुख को देखते हुए लोगों में बेफिक्री दिखाई देने लगी थी लेकिन कोरोनावायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रान के घातक प्रभाव होने की चेतावनी ने लोगों की बेफिक्री को अब घबराहट में बदल दिया है।</p>
<p>सरकार अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रही है कि दक्षिण अफ्रीका से निकल कर दुनिया के 23 देशों में पांव पसारने वाला ओमिक्रान वायरस भारत में प्रवेश न कर सके । इसीलिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है जो 31 दिसंबर तक प्रभावशील रहेगी।</p>
<p>मध्यप्रदेश सरकार ने 50 प्रतिशत क्षमता के साथ स्कूलों में पढ़ाई जारी रखने के आदेश दिए हैं यद्यपि कालेजों को इन पाबंदियों को मुक्त रखा गया है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/ind-nz-shock-ishant-rahane-jadeja-and-kane-williamson-ruled-out-of-mumbai-test/">IND-NZ को झटका : मुंबई टेस्ट से बाहर हुए ईशांत-रहाणे, जडेजा व केन विलियमसन</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :   <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/four-members-of-the-same-family-returned-from-south-africa-to-jaipur-corona-positive/">दक्षिण अफ्रीका से जयपुर लौटे एक ही परिवार के चार सदस्य कोरोना पॉजिटिव</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/weather-once-again-farmers-are-afraid-of-jawad/">ओडिशा : एक साल में तीसरा तूफान, ‘जवाद’ के डर से किसान…</a></strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-235134" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/international-airport.jpg" alt="" width="842" height="467" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/international-airport.jpg 680w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/international-airport-300x166.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 842px) 100vw, 842px" /></p>
<p>अन्य राज्यों की सरकारों ने भी अपने यहां ऐहतियाती उपायों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में राज्य सरकारों ने कोरोना वायरस के इलाज में उपयोगी दवाओं, इंजेक्शन , आक्सीजन के प्रबंधन और अस्पतालों में सभी आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश भी दे दिए हैं।</p>
<p>दुनिया के अनेक देशों ने दक्षिण अफ्रीका से आने वाली उड़ानों पर रोक लगा दी है। भारत में भी प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संबंध में पूर्व में लिए गए फैसलो की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 20 महीनों के लंबे अंतराल के बाद 15 दिसंबर से सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्रारंभ करने की अनुमति दी थी परंतु दक्षिण अफ्रीका में कोरोनावायरस के नये वेरिएंट का पता लगने के बाद अभी भारत से सामान्य अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर रोक जारी रहेगी।</p>
<p>इसके अलावा विशेष विमानों से भारत आने वाले लोगों के लिए सरकार ने नये प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य कर दिया है। यद्यपि WHO  ने ओमिक्रान को कोरोनावायरस का बेहद चिंताजनक स्वरूप निरूपित किया है परंतु वह चीन, जापान और इजरायल सरकारों के उस फैसले से सहमत नहीं हैं जिसके तहत उनके देशों में विदेशों से आने वाली सभी उड़ानों पर रोक लगा दी गई है लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह सलाह जरूर दी है कि जिन देशों में ओमिक्रान दस्तक दे चुका है वहां की यात्रा करने से 60 वर्ष से ऊपर के लोगों को बचना चाहिए।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/keshav-babu-dharma-mantra-works-only-when-the-stomach-is-full/">डंके की चोट पर : केशव बाबू धर्म का मंतर तभी काम करता है जब पेट भरा हो</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/what-did-mayawati-say-on-keshav-prasads-mathura-is-ready-statement/">केशव प्रसाद के ‘मथुरा की तैयारी है’ बयान पर क्या बोलीं मायावती?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :   <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/bjp-mp-asked-did-modi-forget-the-national-anthem-during-his-earlier-visit-to-russia/">भाजपा सांसद ने पूछा-क्या रूस के पहले के दौरे में राष्ट्रगान भूल गए थे मोदी?</a></strong></span></p>
<p>विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक समिति ने दुनिया भर के देशों को सचेत किया है कि पहले कोरोनावायरस के जितने वेरिएंट सामने आ चुके हैं उनकी तुलना में ओमिक्रान &#8221; बेहद चिंताजनक &#8221; वेरिएंट साबित हो सकता है परंतु इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और ओमिक्रान के प्रभावों के अध्ययन में जुटे वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि ओमिक्रान के प्रभावों के बारे में किसी निश्चित नतीजे पर पहुंचने के पहले इस संबंध में किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से बचा जाना चाहिए ताकि लोग सतर्क तो रहें परंतु अनावश्यक भय की स्थिति निर्मित न हो।\</p>
<p>इसमें कोई संदेह नहीं कि सतर्कता तो हर हालत में जरूरी है क्योंकि वैज्ञानिक भी अभी तक इस बारे में किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं कि दुनिया में कोरोनावायरस का अस्तित्व कब तक बना रहेगा। दरअसल अभी तक तो विश्व स्वास्थ्य संगठन यह भी तय नहीं कर पाया है कि दुनिया भर में पचास लाख से अधिक लोगों की जान लेने वाले कोरोनावायरस की उत्पत्ति दो साल पहले चीन की एक प्रयोगशाला में किस तरह हुई थी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-220514" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/05/coronavirus-doctors.jpeg" alt="" width="775" height="546" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/05/coronavirus-doctors.jpeg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/05/coronavirus-doctors-300x211.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 775px) 100vw, 775px" /></p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>दक्षिण अफ्रीका में कोरोनावायरस के जिस नये</strong></span></h3>
<p>वेरिएंट का पता चला है उसके घातक प्रभावों के बारे में भी विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन तो नये वेरिएंट को बेहद चिंताजनक बता रहा है परंतु जिस दक्षिण अफ्रीका में इस वेरिएंट का सबसे पहले पता चला वहीं के वैज्ञानिक और चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रोन उतना घातक नहीं है जितनी इसके बारे में दहशत फैला दी गई है।</p>
<p>विश्व के अनेक देशों द्वारा दक्षिण अफ्रीका जाने वाली उड़ानों पर रोक लगाए जाने से दक्षिण अफ्रीका को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह भी संभव है कि समय बीतने के साथ ही ओमिक्रान के बेहद चिंताजनक वेरिएंट होने संबंधी आशंका गलत साबित हो जाए परन्तु जब तक दुनिया के वैज्ञानिक इसके व्यापक परीक्षणों से ऐसे किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाते तब तक तो दुनिया के दूसरे देशों को ऐहतियाती उपाय जारी रखने ही होंगे।</p>
<p>यहां भी विशेष उल्लेखनीय है कि कोरोनावायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रान के संक्रमण का सबसे पहला मामला भले ही दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने की खबर ने पिछले दिनों दुनिया भर के देशों को दहशत की स्थिति में पहुंचा दिया था परन्तु अब यह‌ सुनने में आ रहा है कि ओमिक्रान वेरिएंट के संक्रमण का सबसे पहला मामला जब कथित रूप से दक्षिण अफ्रीका में पाया गया उसके पहले ही यह वेरिएंट यूरोप के कुछ देशों में दस्तक दे चुका था।</p>
<p>अगर यह खबर सही है तो यह पता लगाना अब मुश्किल होगा कि यूरोप के किन देशों में इस ओमिक्रान वेरिएंट ने दक्षिण अफ्रीका से पहले ही अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था। ऐसी खबरें निःसंदेह चिंताओं में इजाफा करती हैं इसलिए अगर दुनिया के जिन देशों में अपने यहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का आवागमन बंद करने का फैसला किया है तो उसे उनके ऐहतियाती कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।</p>
<p>दरअसल अब यह तय करने का समय आ गया है कि हमारी वैक्सीन ओमिक्रान से सुरक्षा में कितनी कारगर है। इस बारे में वैक्सीन निर्माता कंपनियों के साथ ही देश के वैज्ञानिकों की राय अभी तक सकारात्मक ही रही है। दुनिया के बहुत से देशों में कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज की शुरुआत भी हो चुकी है ।</p>
<p>अभी भारत में इस बारे में अध्ययन जारी है । नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप आन इम्यूनाइजेशन अगले दो तीन हफ्तों में अपने शोध से बूस्टर डोज की उपयोगिता के बारे में किसी निश्चित नतीजे पर पहुंच सकता है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>(लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के राजनैतिक संपादक है)</strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अर्थव्यवस्था में उछाल के बावजूद चुनौतियां अभी बाकी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/despite-the-boom-in-the-economy-challenges-remain/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Sep 2021 11:38:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[अर्थव्यवस्था]]></category>
		<category><![CDATA[कृष्णमोहन झा]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोनावायरस]]></category>
		<category><![CDATA[भारत]]></category>
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					<description><![CDATA[कृष्णमोहन झा दुनिया में कोरोनावायरस के प्रकोप ने अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था जिनमें भारत भी शामिल था। कोरोना की पहली लहर के प्रकोप से छुटकारा मिलने के पूर्व ही भारत में दूसरी लहर दस्तक दे चुकी थी और दुर्भाग्य से दूसरी लहर की विभीषिका पहली लहर से कहीं अधिक भयावह थी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-193635 alignleft" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/krishna-mohan-jha.jpg" alt="" width="185" height="131" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/krishna-mohan-jha.jpg 650w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/krishna-mohan-jha-300x212.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 185px) 100vw, 185px" />कृष्णमोहन झा</strong></span></p>
<p><span style="color: #0000ff;">दुनिया में कोरोनावायरस के प्रकोप ने अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था जिनमें भारत भी शामिल था। कोरोना की पहली लहर के प्रकोप से छुटकारा मिलने के पूर्व ही भारत में दूसरी लहर दस्तक दे चुकी थी और दुर्भाग्य से दूसरी लहर की विभीषिका पहली लहर से कहीं अधिक भयावह थी । </span><span style="color: #0000ff;">दूसरी लहर ने इतनी तेज रफ्तार से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कियाा था कि किसी को भी संभलने का मौका ही नहीं मिला। </span></p>
<p><span style="color: #000000;">पहली लहर के मंद पड़ने के बाद जब हमारी अर्थव्यवस्था में भी सुधार के संकेत मिलने लगे थे तभी दूसरी लहर की विभीषिका ने इस आशंका को जन्म दिया कि हमारी अर्थव्यवस्था पर दूसरी लहर का प्रभाव लंबे समय तक बना रहेगा।</span></p>
<p>कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर ऐसी राय व्यक्त की लेकिन कोरोना संकट से उपजी विषय परिस्थितियों में भी मोदी सरकार ने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया और अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने के लिए द्विगुणित उत्साह के साथ प्रयास शुरू कर दिए ।</p>
<p>विश्वव्यापी कोरोना संकट के दुष्प्रभावों से देश की अर्थव्यवस्था को निरापद रखने के लिए मोदी सरकार ने विगत डेढ़ वर्षों में अनेक साहसिक कदम उठाए ।</p>
<p>सरकार के इन साहसिक कदमों से उद्योग जगत में भी नया उत्साह जागा और उत्पादक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ी जिसके सुखद परिणाम भी जल्द ही सामने आने लगे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone wp-image-233935" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/indianeconomy-jubilee-post.jpg" alt="" width="868" height="487" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/indianeconomy-jubilee-post.jpg 460w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/09/indianeconomy-jubilee-post-300x168.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 868px) 100vw, 868px" /></p>
<p>आज स्थिति यह है कि अर्थव्यवस्था में एक बार फिर वैसी ही स्थिरता आती दिखाई देने लगी है जैसी कि लगभग डेढ़ साल पूर्व देश में कोरोना संकट के शुरू होने के पहले थी।</p>
<p>अर्थशास्त्रियों का मानना है कि निकट भविष्य में कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका अगर सच साबित होती भी है तब भी उसके भारतीय अर्थव्यवस्था इस बार उसके दुष्प्रभावों ‌‌‌‌‌से मुक्त रहेगी क्योंकि परंतु केंद्र और सरकारों ने तीसरी लहर के दुष्प्रभावों को न्यूनतम स्तर पर बनाए रखने के लिए पहले ही व्यापक तैयारियां कर रखी हैं।</p>
<p>देश में टीकाकरण अब महाअभियान का रूप ले चुका है और लोग भी पहले से अधिक जागरूक हो चुके हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि टीकाकरण महाअभियान भी भारतीय अर्थव्यवस्था को कोरोना संकट के दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।</p>
<p>देश में पिछ्ले साल कोरोना की पहली लहर के प्रकोप की शुरुआत होने पर मोदी सरकार ने जो देश व्यापी लाकडाउन लागू किया था उसकी वजह से काफी समय तक उत्पादक गतिविधियां ठप रहने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जो नकारात्मक प्रभाव पड़ा था उसने अनेक आशंकाओं को जन्म दिया था।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-200811" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/economy-package.jpg" alt="" width="850" height="478" /></p>
<p>कुछ अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने तो उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट को देखते हुए यह अनुमान भी लगा लिया था कि लाक डाउन में सरकार ने देश में जो कठोर पाबंदियां लगाई थी उनका प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर दीर्घ काल तक बना रहेगा।</p>
<p>परंतु कोरोना की दूसरी लहर के बावजूद इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने जिस तरह तेजी से बाउंस बैक किया है उसने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सारे नकारात्मक अनुमान को झुठला दिया है और वही एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था में आए उछाल को मोदी सरकार की आर्थिक रणनीति की सफलता बताकर उसकी तारीफ कर रही हैं।</p>
<p>कोरोना की दूसरी लहर के भयावह प्रकोप के बावजूद इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही ( अप्रैल-जून) में देश की विकास दर 20.1प्रतिशत दर्ज की गई ।</p>
<p>अब तो स्थिति यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आया यह आशातीत उछाल चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में और ऊपर पहुंचने के भी अनुमान व्यक्त किए जाने लगे हैं।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong>गौरतलब है कि विश्व बैंक ने भी अप्रैल में जारी अपनी साउथ एशिया इकोनोमिक फोकस रिपोर्ट में कहा था कि भारत में निजी खपत और निवेश बढ़ने से वित्तीय वर्ष 2021-2022में देश की विकास दर 10.1प्रतिशत के स्तर तक पहुंच सकती है जबकि इसी साल जनवरी में विश्व बैंक ने भारत की विकास दर 5.4 प्रति शत रहने की आशंका व्यक्त की थी। </strong></span></p></blockquote>
<p>अब देश के अनेक अर्थशास्त्रियों भी यह मान रहे हैं कि अर्थव्यवस्था में उछाल का रुख चालू वित्तीय वर्ष में इसी तरह बना रहेगा। अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में जिन क्षेत्रों का योगदान महत्वपूर्ण सिद्ध होता है उनमें कृषि को छोड़कर बाकी सभी क्षेत्र पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p>दरअसल पिछले साल देशव्यापी लाक डाउन के फैसले ने भी आर्थिक गतिविधियों को ठप कर दिया था जिसके कारण अर्थव्यवस्था को बुरे दौर से गुजरना पड़ा। केंद्र सरकार ने इस स्थिति से सबक लिया और देश में कोरोना की दूसरी लहर की शुरुआत होने पर लाक डाउन का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया।</p>
<p>राज्य सरकारों ने दूसरी लहर को नियंत्रित करने की मंशा से स्थानीय स्तर पर जो पाबंदियां लगाई उनसे उत्पादक गतिविधियों पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि स्थानीय लाक डाउन की वजह से बाजार और दफ्तर भले बंद रहे परंतु कल कारखानों में उत्पादक गतिविधियां बराबर जारी रहीं।</p>
<p>इसीलिए चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में दर्ज की गई विकास दर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खुशखबरी लेकर आई। अर्थव्यवस्था में मजबूती आने का संकेत जुलाई और अगस्त में हुए जीएसटी संग्रह से भी लगाया जा सकता है।</p>
<p>पहली लहर के बाद जीएसटी संग्रह में आई कमी ने सरकार की चिताओं में इजाफा कर दिया था परन्तु पिछले जुलाई अगस्त में हुए जीएसटी संग्रह से सरकार का प्रसन्न होना स्वाभाविक है। इस साल अगस्त में हुआ जीएसटी संग्रह 2020 के अगस्त माह के जीएसटी संग्रह की राशि से 30 प्रतिशत ज्यादा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-158861" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/INDIAN-ECONMY-JUBILEE-POST.jpg" alt="" width="650" height="540" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/INDIAN-ECONMY-JUBILEE-POST.jpg 650w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/INDIAN-ECONMY-JUBILEE-POST-300x249.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>‌अर्थव्यवस्था में आए उछाल से एक ओर जहां विदेशी निवेशक फिर से भारत की ओर आकर्षित होने लगे हैं वहीं दूसरी ओर पश्चिमी देशों और चीन के बीच बढ़ते तनाव ने भारत के लिए निर्यात के नए अवसर पैदा किए हैं। अमेरिका और कुछ अन्य देशों ने चीन से होने वाले आयात में जो कमी की है उसका परोक्ष लाभ भारत को मिल रहा है।</p>
<p>पिछले वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भारत ने जितना निर्यात किया था उससे 25 प्रतिशत अधिक निर्यात भारत ने चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में किया है ।</p>
<p>अमेरिका जैसे देश अब चीन से उन्हीं वस्तुओं का आयात करने में रुचि ले रहे हैं जिनका निर्यात करने की स्थिति में अभी भारत नहीं आ पाया है। ऐसा नहीं है कि चीन के साथ उक्त देशों के संबंधों में आई खटास के कारण ही भारत निर्यात के क्षेत्र में पहले से बेहतर स्थिति में है।</p>
<p>बीते वर्षों में भारत की विश्वसनीयता सारी दुनिया में बढ़ी है । छोटे, गरीब और अन्य विकासशील देश अब चीन के बजाय भारत से आयात को तरजीह दे रहे हैं ।</p>
<p>प्रधानमंत्री पद की बागडोर नरेन्द्र मोदी के पास आने के बाद अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की विश्वसनीयता जिस तरह बढ़ी है उसका निश्चित रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा।</p>
<p>अर्थव्यवस्था में आए उछाल से सरकार की खुशी स्वाभाविक है परंतु अभी यह मान लेना उचित नहीं होगा कि हमने सारी चुनौतियों से पार पा लिया है । बढ़ती मंहगाई पर काबू पाने के लिए उसे प्रभावी कदम उठाने होंगे।</p>
<p>इसके लिए कारगर रणनीति और इच्छा शक्ति की आवश्यकता है। जनता सरकार के इस तर्क को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि अगर महंगाई को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए गए तो उससे विकास प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>कुछ क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भले बढ़े हों परन्तु कोरोना संकट ने लाखों लोगों के हाथों से काम छीन लिया है। उनके आर्थिक पुनर्वास की चिंता भी सरकार को करना है।</p>
<p>अर्थव्यवस्था में आए उछाल से सरकार को आत्म विश्वास बढ़ा है इसलिए आने वाले समय में आम आदमी की खुशहाली के लिए सरकार के पास निश्चित रूप से कुछ योजनाएं होंगी। हमें उनकी प्रतीक्षा करना चाहिए।</p>
<blockquote><p><strong>(लेखक डिज़ियाना मीडिया समूह के सलाहकार है)</strong></p></blockquote>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वैक्सीनेशन कार्यक्रम औंधे मुंह इसलिए गिर पड़ा है&#8230;</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/vaccination-program-has-collapsed-because/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Jun 2021 10:53:57 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[वैक्सीनेशन]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क नई दिल्ली। पूरा देश कोरोना के कहर से जूझ रहा है। हालांकि कोरोना की पहली लहर के बाद दूसरी लहर काफी खतरनाक साबित हुई है। इस दौरान लगातार लोगों की जान गई है। भले ही कोरोना के मामले अब कम होते नजर आ रहे हैं लेकिन मौतों का सिलसिला अब भी जारी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p>नई दिल्ली। पूरा देश कोरोना के कहर से जूझ रहा है। हालांकि कोरोना की पहली लहर के बाद दूसरी लहर काफी खतरनाक साबित हुई है। इस दौरान लगातार लोगों की जान गई है। भले ही कोरोना के मामले अब कम होते नजर आ रहे हैं लेकिन मौतों का सिलसिला अब भी जारी है।</p>
<p>कोरोना की दूसरी लहर में स्वास्थ्य सेवाओं की भी कलई खुलती नजर आई। लोग ऑक्सीजन और बेड की कमी की वजह से भी दम तोड़े हैं। उधर कोरोना से बचने के लिए सरकार वैक्सीन लगाने लगवाने के लिए लोगों से कहा रही है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong>हालांकि कोरोना की वैक्सीन को लेकर अब भी कई सवाल है। इतना ही नहीं वैक्सीनेशन कार्यक्रम औंधे मुंह तक गिर पड़ा है और सरकार केवल वैक्सीनेशन बदलती पॉलिसी में ही उलझती नजर आ रही है।</strong></span></p></blockquote>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-223656" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/vaccination-e1622544548399.jpg" alt="" width="600" height="499" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong>आलम तो यह है कि कई राज्यों में कोरोना की वैक्सीन की भारी कमी है और इस वजह से टीकाकरण कार्यक्रम थम भी गया है। आलम तो यह है कि कई राज्य वैक्सीन की कमी का रोना भी रो रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार इस पर कोई ठोस जवाब नहीं दे रही है।</strong></span></p></blockquote>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>8 अप्रैल को हुआ ‘टीका उत्सव’ का ऐलान लेकिन&#8230;</strong></span></h3>
<p>देश में जब कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दी थी तब पीएम मोदी ने 8 अप्रैल को ‘टीका उत्सव’ का ऐलान किया गया था लेकिन इस दौरान कोविड वैक्सीनेशन को लेकर  कोई स्पष्ट नीति नजर नहीं आई। इस दौरान जरूरी बात यह रही कि केंद्र अपने हिसाब से टीके राज्यों को दे रहा था।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong>उधर विपक्ष को केंद्र की ये रणनीति सही नहीं लग रही थी और वो बार-बार कह सार्वजनिक टीकाकरण अभियान चलाने पर जोर डाल रहे थे लेकिन मोदी सरकार पर इसपर कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दी ।</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff6600;"><strong>इस दौरान दावे तो यहां तक किये जा रहे थे कि कोरोना अब भारत से विदा होने वाला है। इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के 7 मार्च को एक बड़ा बयान दिया था और कहा था कि कोविड अब तो बस विदा होने की राह पर है लेकिन कोरोना की दूसरी लहर से सरकार के दावे बुरी तरह से फेल हुए और लोग एकदम से हैरान रह गए।</strong></span></p></blockquote>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-206337" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/coronavirus-vaccination-jubilee-post.jpg" alt="" width="640" height="360" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/coronavirus-vaccination-jubilee-post.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/coronavirus-vaccination-jubilee-post-300x169.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>वैक्सीन सेंटर में वैक्सीन नहीं है!</strong></span></h3>
<p>देश में वैक्सीन को लेकर हालात अब भी खराब है। आलम तो यह है कि देश के अनेक वैक्सीन सेंटर में वैक्सीन नहीं होने की बात भी सामने आ रही है। लोगों को वैक्सीन के लिए स्लॉट तक नहीं मिल रही है। इसके आलावा वैक्सीन की डोज को लेकर बार-बार पॉलिसी बदलना भी लोगों को परेशान कर रहा है। राज्यों में वैक्सीन समय पर नहीं पहुंच रही है।</p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>‘वैक्सीन मैत्री’ से वाहवाही बटोर लेकिन&#8230;</strong></span></h3>
<p>जहां राज्यों में वैक्सीन उपलब्ध नहीं है तो दूसरी ओर ‘वैक्सीन मैत्री’ का दावा करके वाहवाही लूटी है लेकिन बाद में पता चला है कि भारत में टीका बना रही कंपनियों को विदेश से मिले अग्रिम ऑर्डर के तहत निर्यात किए गए।</p>
<p>इसके बाद तो सरकार और विपक्ष के बीच और तनातनी बढ़ गई क्योंकि वैक्सीन की भारी कमी उजागर हुई और राज्यों में वैक्सीन बढ़ती मांग को लेकर किसी तरह से केंद्र उन्हें सीधे ग्लोबल टेंडर जारी करके खुद से वैक्सीन खरीदने की छूट दे दी।</p>
<p>यूपी ने सबसे पहले ग्लोबल टेंडर जारी किया। दूसरी ओर वैक्सीन बनाने वाली अन्य फाइजर और मॉडर्ना कंपनियों ने दिल्ली, पंजाब जैसे राज्यों को सीधे वैक्सीन देने से मना कर दिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-223657" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/vaccination-1.jpg" alt="" width="696" height="378" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/vaccination-1.jpg 696w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/vaccination-1-300x163.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 696px) 100vw, 696px" /></p>
<p>इसको लेकर दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने खुलकर मीडिया में सबसे सामने कही जबकि पंजाब ने भी यही बात कही। ये दोनों कम्पनियां भारत सरकार के अलावा किसी से सौदा नहीं करेंगी।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong> कई लोग ऐसे हैं जो रोज कोविन पोर्टल पर लॉग इन करते हैं इसी उम्मीद से कि उन्हें वैक्सीन के लिए स्लॉट मिल जाएगा लेकिन बाद में उनको निराशा झेलनी पड़ती है। लोगों में गुस्सा इसी बात का है जब वैक्सीन नहीं देनी थी तो इतना बढ़चढक़र वैक्सीन सबको देने का ऐलान क्यों किया।</strong></span></p></blockquote>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>डोज को लेकर बार-बार बदला जा रहा है नियम</strong></span></h3>
<p>जहां एक ओर पूरा देश वैक्सीन की कमी से जूझ रहा है तो दूसरी ओर वैक्सीन की डोज को लेकर बार-बार नियम बदले जा रहे हैं। बहुत से ऐसे लोग जिन्हें दूसरी डोज मिलने में देरी हो रही है।</p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>वैक्सीनेशन इसलिए घटा भी है</strong></span></h3>
<ul>
<li>26 अप्रैल को देश में 31.95 लाख डोज लगाई गई थी</li>
<li>उसमें से 19.13 लाख पहली डोज थी</li>
<li>12.82 लाख दूसरी डोज थी। वह 25 मई को घटकर केवल 20.63 लाख डोज रह गई।</li>
<li>उससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि दूसरी डोज केवल 1.98 लाख लोगों को मिली है। इन आंकड़ो को देखने से एक बात तो साफ हो रही है कि जो लोग पहली डोज लगवा चुके हैं उन्हें दूसरी डोज के लिए इंतेजार करना पड़ रहा है।</li>
</ul>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>वैक्सीन को लेकर ऐसे बदले जा रहे हैं बार-बार नियम</strong></span></h3>
<p>देश में 16 जनवरी वैक्सीनेशन शुरू हुआ है। इस दौरान कोविशील्ड और कोवैक्सीन की दूसरी डोज में 28 दिनों का गैप रखने को कहा गया था लेकिन 23 मार्च को सरकार ने फिर रणनीति में बदलाव किया और कोविशील्ड की दूसरी डोज के लिए 6-8 हफ्ते का अंतर होना चाहिए जबकि कोवैक्सीन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-223658" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/vaccination-2.jpg" alt="" width="650" height="368" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/vaccination-2.jpg 650w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/vaccination-2-300x170.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>सरकार ने इस बदलावा को लेकर कहा है कि कोविड-19 के खिलाफ वैक्सीन कहीं ज्यादा प्रभावी रहेगी।<br />
ब्रिटेन की वैक्सीन एस्ट्राजेनेका को ही भारत में कोविशील्ड के नाम से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रहा है। उसने इसको लेकर दावा किया है कि उसके ट्रॉयल में पाया गया है कि 6 हफ्ते के अंदर दूसरा डोज देने पर वैक्सीन 54.9 फीसदी कारगर थी, जबकि 8 हफ्ते पर यह बढक़र 59.9 फीसदी हो जाती है।</p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>13 मई को फिर बदला नियम</strong></span></h3>
<p>इसके बाद 13 मई को वैक्सीन को लेकर फिर नया नियम लागू कर दिया है। इसमें कहा गया है कि दूसरे डोज के अंतर को 12-16 हफ्ते कर दिया। सरकार ने इस बार नियम नई स्टडी को लेकर बदला था।</p>
<p>सरकार ने ब्रिटेन का हवाला देकर इस नियम में बदलाव किया था लेकिन अहम बात यह है कि केंद्र सरकार ने जिस ब्रिटेन की स्टडी का हवाला दिया है, उसने दो डोज के बीच के अंतर को घटा दिया है। उसने ऐसा भारत में दूसरी लहर के दौरान पाए गए स्ट्रेन बी.1.617.2 की रोकथाम के लिए किया है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-215181" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/03/coronavirus-vaccination-ap1-1612525986.jpg" alt="" width="1200" height="675" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/03/coronavirus-vaccination-ap1-1612525986.jpg 1200w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/03/coronavirus-vaccination-ap1-1612525986-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/03/coronavirus-vaccination-ap1-1612525986-1024x576.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/03/coronavirus-vaccination-ap1-1612525986-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></p>
<p>बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन और बेड की कमी की वजह से लोगों ने दम तोड़ा है। इतना ही नहीं कोरोना से बचने के लिए वैक्सीन बन गई और लोगों को लगने भी लगी है लेकिन वैक्सीन को लेकर देश में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। दरअसल टीकाकरण अब भी कई रा’यों में धीमा है। इस वजह से मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट भी काफी सख्त नजर आ रहा है और सरकार से कड़े सवाल पूछ रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वैक्सीन संकट पर मार्च में ही संसदीय समिति ने दिया था ये सुझाव लेकिन सरकार ने&#8230;</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/the-parliamentary-committee-had-given-these-suggestions-on-the-vaccine-crisis-in-march-itself-but-the-government/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 13 May 2021 08:35:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोनावायरस]]></category>
		<category><![CDATA[संसदीय समिति]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली स्पेशल डेस्क नर्ई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना को रोकने के लिए सरकार लगातार वैक्सीनेशन पर जोर दे रही है। हालांकि इस दौरान वैक्सीन की भारी कमी सामने आ चुकी है। आलम तो यह है कि वैक्सीन को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली स्पेशल डेस्क</strong></span></p>
<p>नर्ई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना को रोकने के लिए सरकार लगातार वैक्सीनेशन पर जोर दे रही है। हालांकि इस दौरान वैक्सीन की भारी कमी सामने आ चुकी है।</p>
<p>आलम तो यह है कि वैक्सीन को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच तालमेल की भारी कमी साफ देखी जा सकती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में वैक्सीन की भारी कमी देखी जा सकती है।</p>
<p>उधर वैक्सीन को लेकर एक बेहद खास जानकारी सामने आई है। दरअसल संसद की स्थायी समिति ने मार्च में वैक्सीन को लेकर अपनी रिपोर्ट दी थी। इस रिपोट में बताया गया था कि फौरन वैक्सीन के प्रोडक्शन को युद्ध स्तर पर बढ़ाया जाने की सरकार से खास अपील की थी लेकिन तब सरकार ने इ<span style="color: #800000;">सको लेकर ऐसा कुछ भी नहीं किया।</span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-221670" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/05/pm-modi-e1620894882385.jpg" alt="" width="600" height="338" /></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a4%95-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a4/">मां गंगा से सत्ता तक, अस्पताल से श्मशान तक, मां गंगा ने किसे बुलाया?</a></strong>  </span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/health-department-is-also-injected-mrp-is-charging-more-than-the-price-for-the-sale-of-remedisvir/">शासन के आदेश पर इंजे. रेमडेसिवीर की बिक्री में वसूली जा रही है MRP से अधिक कीमत</a></strong>  </span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/bjp-succumbed-to-the-persistence-of-hemant-viswasarama/">हेमंत विस्वसरमा की हठ के आगे झुकी BJP</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/tickling-over-vaccines-center-and-opposition-face-to-face/">टीके पर तकरार : केंद्र और विपक्ष आमने- सामने</a> </strong></span></p>
<p>बताया जा रहा है कि विज्ञान-प्रोद्यौगिकी और वन पर्यावरण संबंधित संसद की स्थायी समिति ने इसी साल फरवरी, मार्च महीने में अपनी बैठक में वैक्सीनेशन पर गहन चर्चा की थी।</p>
<p>ये रिपोर्ट संसद के सदन पटल पर 8 मार्च को रखी गई थी। बता दें कि इसमें 31 सदस्य शामिल थे। इसके साथ ही 14 सदस्य सत्ताधारी दल से थे। इस कमेटी ने कहा था कि भारत में विकसित और निर्मित दोनों तरह के टीकों का उत्पादन युद्ध स्तर पर बढ़ाए जाने के साथ टीकाकरण की रफ्तार को भी तेज करने पर काफी चर्चा के बाद ये सिफारिश भी की थी।</p>
<p>हालांकि सरकार ने उस वक्त इसको लेकर खास ध्यान नहीं दिया था। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बायोटेक्नोलॉजी विभाग को इस बाबत और रिसर्च करने के लिए अतिरिक्त बजट का भी प्रावधान किया जाए।</p>
<p>भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस (Coronavirus) के 3 लाख 62 हजार 727 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि इस दौरान देशभर में 4120 लोगों की इस महामारी की वजह से मौत हुई है।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चुनाव आयोग ने खुद ही कराई अपनी किरकिरी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/the-election-commission-itself-made-its-gritty/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 29 Apr 2021 09:02:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कृष्णमोहन झा हमारे देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके फैसलों पर विवादों का सिलसिला न जाने कब से चला आ रहा है। केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के इशारों पर काम करने के आरोप भी चुनाव आयोग पर जब तब लगते रहे हैं परंतु मद्रास हाईकोर्ट ने देश के पांच राज्यों में संपन्न कराए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4><span style="color: #000080;"><strong>कृष्णमोहन झा</strong></span></h4>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-193635 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/krishna-mohan-jha-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" /><br />
हमारे देश में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके फैसलों पर विवादों का सिलसिला न जाने कब से चला आ रहा है। केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के इशारों पर काम करने के आरोप भी चुनाव आयोग पर जब तब लगते रहे हैं परंतु मद्रास हाईकोर्ट ने देश के पांच राज्यों में संपन्न कराए गए विधानसभा चुनावों के संदर्भ में चुनाव आयोग के विरुद्ध जो तीखी टिप्पणियां की हैं वे अभूतपूर्व हैं‌ ।</p>
<p>इन टिप्पणियों ने चुनाव आयोग को बचाव की मुद्रा में ‌ला दिया है। देश की किसी अदालत ने अतीत में शायद ही कभी ऐसी तल्ख़ ‌टिप्पणियां‌ चुनाव आयोग के बारे में ‌की होंगी । चुनाव आयोग से मद्रास हाईकोर्ट की नाराजगी इस बात को लेकर है कि पांच राज्यों में विधानसभा की चुनावों की प्रक्रिया के दौरान उसने कोरोना की दूसरी लहर के ख़तरों की अनदेखी कर दी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-87882" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/election-commission.-jubilee.jpg" alt="" width="886" height="498" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/election-commission.-jubilee.jpg 886w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/election-commission.-jubilee-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/election-commission.-jubilee-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 886px) 100vw, 886px" /></p>
<p>मद्रास हाईकोर्ट ने कोरोना की दूसरी लहर के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराते हुए यहां तक कह दिया कि चुनाव आयोग के अफसरों के विरुद्ध हत्या के मामले ‌दर्ज किए जाने चाहिए। कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस बात के लिए भी फटकार लगाई है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों की चुनावी रैलियों में जुटने वाली भारी ‌भीड पर अंकुश लगाने में चुनाव आयोग असफल रहा ।</p>
<p>मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग निर्देश दिया है कि वह 30 अप्रैल तक कोर्ट को बताए कि उसने दो मई को होने वाली मतगणना के दौरान कोविड गाइड लाइंस के पालन हेतु क्या इंतजाम किए हैं। कोर्ट ने आयोग से साफ कह दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह मतगणना रुकवाने का आदेश भी जारी कर सकता है। मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को यह निर्देश तमिलनाडु के परिवहन मंत्री एम आर विजय भास्कर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिकाकर्ता ने कहा था कि उसके निर्वाचन क्षेत्र में 77 उम्मीदवार चुनाव लड रहे हैं।</p>
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<p>मतगणना के दौरान सभी उम्मीदवारों के एजेंट को चुनाव आयोग कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार मतगणना केन्द्र में स्थान उपलब्ध नहीं करा सकता । इसके जवाब में चुनाव आयोग ने कोर्ट से कहा था कि वह मतगणना के लिए सभी आवश्यक इंतजाम कर रहा है। मद्रास हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद चुनाव आयोग तत्काल हरकत में आया और उसने 2 मई को होने वाली मतगणना में विजयी घोषित उम्मीदवारों को जीत का जश्न मनाने से रोकने के आदेश जारी कर दिए हैं।</p>
<p>चुनाव आयोग ने विजयोल्लास में आयोजित किए जाने वाले जुलूसों पर प्रतिबंध लगा दिया है।चुनाव आयोग ने देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु ,केरल,असम की विधानसभाओं के चुनाव कार्यक्रम की जिस दिन घोषणा की थी उसी दिन से वह आलोचनाओं से घिरा हुआ है। चुनाव आयोग ‌द्वारा पांच राज्यों की विधानसभाओं का जो चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया उसके अनुसार पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी चार राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव हेतु मतदान का आखिरी चरण भी 6 अप्रैल को संपन्न हो चुका था परंतु पश्चिम बंगाल में चूंकि उसने आठ चरणों में मतदान संपन्न कराने का फैसला कर लिया था इसलिए राज्य में 29अप्रैल तक ‌ मतदान की प्रक्रिया जारी रही।</p>
<p>विगत एक पखवाड़े में जब देश के अनेक राज्यों में कोरोना की दूसरी लहर भयावह रूप ले चुकी थी तब भी चुनाव आयोग राज्य में मतदान प्रक्रिया को 8 चरणों में ही संपन्न कराने के फैसले पर अड़ा रहा। उसने इस कड़वी हकीकत को नजरंदाज कर दिया कि ज्यादा लंबे समय तक चुनावी रैलियां होने से कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से पश्चिम बंगाल के भी प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी। चुनाव आयोग ने भले ही इस आशंका ‌की अनदेखी कर दी ‌परंतु रैलियों में जुटने वाली भीड़ ने इस आशंका को सच साबित कर दिया।</p>
<p>दरअसल मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को जो ‌फटकार लगाई है उसके लिए वह खुद ही जिम्मेदार है। अगर उसने देश में कोरोना की दूसरी लहर के खतरे को देखते हुए पांच राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव कार्यक्रम को इतना लंबा न खींचा होता तो मद्रास हाईकोर्ट की बेहद सख्त टिप्पणियों से शायद बच सकता था।</p>
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<p>विगत दिनों जब देश के अनेक राज्य कोरोना की पहली लहर से भी अधिक भयावह दूसरी लहर की चपेट में आ गए तो यह अनुमान लगाया जा रहा था कि चुनाव आयोग राज्य में विभिन्न राजनीतिक दलों की चुनावी रैलियों में जुटने वाली भारी भीड़ के कारण राज्य में कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी की आशंका को देखते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा के शेष तीन चरणों के मतदान को एक ही चरण में संपन्न कराने का फैसला कर सकता है परंतु चुनाव आयोग ने राज्य में सभी राजनीतिक दलों की चुनावी रैलियों के आयोजन के लिए संध्या 7बजे तक की समय सीमा तय करने के साथ ही कुछ पाबंदियां तो लगा दी परंतु बाकी तीन चरणों की मतदान प्रक्रिया को एक ही चरण में संपन्न कराने के लिए वह तैयार नहीं हुआ।</p>
<p>गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी राज्य में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए मतदान के शेष तीन चरणों की प्रक्रिया को एक ही बार में संपन्न कराने की मांग की थी। यद्यपि चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर विचार हेतु एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी परन्तु उस बैठक में पश्चिम बंगाल में मतदान की प्रक्रिया जल्द से जल्द समेटने पर कोई फैसला नहीं किया गया।</p>
<p>यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि भारतीय जनता पार्टी भी यही चाहती थी कि राज्य में मतदान कार्य क्रम में कोई परिवर्तन न किया जाए क्योंकि अपनी चुनावी रैलियों में जुटने वाली भारी भीड़ ने उसके अंदर यह भरोसा जगा दिया है कि राज्य विधानसभा के इन चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल कर अब इतिहास रचने वक्त आ चुका है और अगर तीन चरणों का मतदान एक ही चरण में संपन्न कराया गया तो उसकी चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ सकता है।</p>
<p>चुनाव आयोग ने जब पश्चिम बंगाल में शेष तीन चरणों की मतदान प्रक्रिया एक चरण में समेटने से इंकार कर दिया तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा ‌कर दी कि वे अब केवल 26 अप्रैल को कोलकाता में अपनी पार्टी की एक प्रतीकात्मक चुनावी रैली संबोधित करेंगी। उसके पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी पश्चिम बंगाल में अपनी बाकी बची सभी रैलियां रद्द करने की घोषणा कर चुके थे।</p>
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<p>राहुल गांधी और ममता बनर्जी ने जब अपनी अपनी पार्टियों की बाकी बची चुनावी रैलियों को रद्द करने की घोषणा की तो भाजपा ‌को असमंजस की स्थिति का सामना ‌करने के लिए विवश होना पड़ा। इसके पश्चात भाजपा ने भी यह घोषणा की कि अब उसकी रैलियों में पांच ‌सौ से ज्यादा लोग शामिल नहीं होंगे।</p>
<p>उधर जब देश के क ई राज्यों में आक्सीजन की कमी ने भयावह रूप ले लिया तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी पश्चिम बंगाल में होने वाली रैलियों को रद्द करके दिल्ली में मुख्यमंत्रियों की बैठक के आयोजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।  उन्होंने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के अलावा भी कई उच्च स्तरीय बैठकों ‌के माध्यम से कोरोना संकट की विकरालता से निपटने के प्रभावी उपायों पर सार्थक चर्चा की ।</p>
<p>इसमें दो राय नहीं हो सकती कि राहुल गांधी और ममता बनर्जी ने राज्य में अपनी पार्टियों की बाकी चुनावी रैलियों को रद्द करने की घोषणा करके वास्तव में भाजपा को इस बात के लिए विवश कर दिया कि वह भी ‌राज्य में अपनी बाकी चुनावी रैलियों को रद्द करने का फैसला करें। राहुल गांधी और ममता बनर्जी ने जो भी फैसला किया उसके पीछे कुछ राजनीतिक कारण भी हो सकते हैं परंतु अगर यह पहल भाजपा की ओर से की जाती तो राज्य में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो सकती थी।</p>
<p>वैसे भी अगर उसे यह भरोसा ‌हो चुका था कि 2 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव परिणाम उसके लिए सत्तारोहण का संदेश लेकर आ रहे हैं तो पार्टी की शेष चुनावी रैलियों के रद्द करने से उसकी जीत की संभावनाओं के प्रभावित होने की कोई आशंका उसे नहीं होना चाहिए था।</p>
<p>अगर भाजपा यह फैसला राहुल गांधी और ममता बनर्जी से ‌पहले करती तो वह पश्चिम बंगाल की जनता को यह संदेश देने की ‌स्थिति में होती कि उसकी पहली प्राथमिकता राज्य की जनता को कोरोना वायरस की दूसरी लहर की चपेट में आने से बचाना है। चुनाव तो आते जाते रहते हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-214921" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/03/railly-bjp.jpg" alt="" width="831" height="445" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/03/railly-bjp.jpg 540w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/03/railly-bjp-300x161.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/03/railly-bjp-310x165.jpg 310w" sizes="auto, (max-width: 831px) 100vw, 831px" /></p>
<p>आज स्थिति यह है कि कोलकाता में कोरोनावायरस के संक्रमण की दर 45 प्रतिशत तक हो जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है । राज्य के दूसरे शहरों में स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। राज्य में चुनावी रैलियों के आयोजन में किसी राजनीतिक दल ने कोई ‌कसर नहीं छोड़ी परंतु आज राज्य में कोरोना‌ संक्रमण बढ़ने ‌के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार भाजपा को इसीलिए ठहराया जा रहा है क्योंकि उसकी रैलियों में भारी भीड़ उमड़ रही थी।</p>
<p>भाजपा आज इस असमंजस में भी है कि आगामी 2 मई को होने वाली मतगणना में अगर उसकी प्रचंड बहुमत से विजय होती है तब भी ढोल धमाके के साथ अपनी ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाना उसके लिए संभव नहीं होगा। पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता में आने का सुनहरा स्वप्न साकार करने में अगर वह सफल हो ‌जाती है तो उसकी सबसे पहली प्राथमिकता राज्य को कोरोना की दूसरी लहर की विभीषिका से बचाना होगा और यह चुनौती उसके लिए आसान नहीं होगी।</p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>(लेखक IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और डिज़ियाना मीडिया समूह के सलाहकार है)</strong></span></p>
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