बीजेपी को टाटा से मिले करोड़ों के चंदे पर स्वामी ने उठाया सवाल

न्यूज डेस्क

पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2018-19 में भारतीय जनता पार्टी ने कुल 800 करोड़ रुपए का चंदा जुटाया है। इस राशि में बीजेपी को कार्पोरेट्स नेे 472 करोड़ रु का चुनावी चंदा दिया है, जिसमें से 356 करोड़ रु यानी करीब 75 फीसदी उसे टाटा समूह के प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट से मिला है। बीजेपी को टाटा समूह से मिले इस चंदे पर भाजपा के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बीजेपी पर तीखे आरोप लगाए हैं।

वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने चंदे को लेकर भाजपा को घेरा है। एक बेहद तीखा ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा है कि टाटा ने भाजपा को भारी राशि चंदे में दी है। अगर सरकार एअर इंडिया की कमान टाटा को सौंपती है तो यहां कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट होगा।

सुब्रमण्यम स्वामी के इस ट्वीट को भारी संख्या में रीट्वीट किया जा चुका है। हजारों लोगों ने इसे लाइक किया है।

भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग को यह जानकारी 31 अक्टूबर को दी है। इसके मुताबिक भाजपा को इस साल चेक और ऑनलाइन पेमेंट के जरिए कुल 800 करोड़ रुपए से अधिक चंदा मिला है, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 146 करोड़ रुपए का चंदा मिला है।

इसमें कांग्रेस को चार चुनावी ट्रस्टों से करीब 99 करोड़ रु की रकम मिली। इसमें से 55.6 करोड़ रु यानी लगभग 56 फीसदी हिस्सा टाटा के ट्रस्ट से आया था।

इस साल भाजपा को मिले चंदे में पिछले साल की तुलना में करीब तिगुनी बढ़ोतरी हुई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि 2018-19 में टाटा के ट्रस्ट ने तृणमूल कांग्रेस को भी 43 करोड़ रु दिए हैं जबकि इससे पिछले वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा शून्य था।

चुनाव आयोग में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार भारत के सबसे धनी ट्रस्ट – द प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भाजपा को 67 करोड़ रुपए का चंदा दिया है, जबकि इस ट्रस्ट ने कांग्रेस को 39 करोड़ रुपए चंदा दिया। इस ट्रस्ट को भारती ग्रुप, हीरो मोटोकॉर्प, जुबिलियेंट फूडवक्र्स, ओरिएंट सीमेंट, डीएलएफ, जेके टायर्स जैसे कॉरपोरेट घरानों का समर्थन मिला हुआ है।

आदित्य बिड़ला समूह के जनरल इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भाजपा को 28 और कांग्रेस को 2 करोड़ रुपए बतौर चंदा दिया। इसके अलावा, ट्रिम्फ इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भाजपा को 5 करोड़, हार्मोनी ग्रुप ने 10 करोड़, जनहित इलेक्टोरल ट्रस्ट और न्यू डेमोक्रेटिक इलेक्टोरल ट्रस्ट ने भाजपा को 2.5-2.5 करोड़ रुपए चंदे में दिए।

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