Election Result 2026: वोटों की गिनती से जीत के प्रमाण पत्र तक, जानें क्या है मतगणना की पूरी प्रक्रिया और नियम

नई दिल्ली/लखनऊ। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के लिए आज फैसले का दिन है। शाम तक साफ हो जाएगा कि इन राज्यों में किसकी सरकार बनेगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके द्वारा EVM में दबाया गया एक बटन, परिणाम की आधिकारिक घोषणा तक किन प्रक्रियाओं से गुजरता है? भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की यह व्यवस्था पारदर्शिता और निष्पक्षता की मिसाल है।

मतदान के बाद EVM और वीवीपैट (VVPAT) मशीनों को ‘स्ट्रॉन्ग रूम’ में त्रिस्तरीय सुरक्षा के बीच रखा जाता है।

  • सील की जांच: मतगणना शुरू होने से पहले राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में स्ट्रॉन्ग रूम की सील चेक की जाती है।
  • टेबल व्यवस्था: हर केंद्र पर कई टेबल होती हैं, जहाँ काउंटिंग सुपरवाइजर, सहायक और माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात होते हैं।

नियम के अनुसार, सबसे पहले पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) की गिनती होती है। इसमें सेना के जवान, चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी और सेवा मतदाता शामिल होते हैं। अक्सर शुरुआती ‘लीड’ यहीं से तय होती है। इसके आधे घंटे बाद EVM के वोटों की गिनती शुरू की जाती है।

EVM की कंट्रोल यूनिट से वोटों का डेटा निकाला जाता है।

  • राउंड-वार नतीजे: मतगणना कई राउंड में होती है। हर राउंड के बाद एजेंटों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं और परिणाम बोर्ड पर प्रदर्शित किए जाते हैं।
  • VVPAT मिलान: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर विधानसभा क्षेत्र की किन्हीं पांच मशीनों की वीवीपैट पर्चियों का मिलान EVM के आंकड़ों से किया जाता है।

लोकतंत्र में ऐसे मौके भी आए हैं जब दो उम्मीदवारों को बराबर वोट मिले हों। ऐसी स्थिति में:

निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, विजेता का फैसला ‘लॉटरी’ या ‘ड्रॉ’ के माध्यम से किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है।

यदि कोई उम्मीदवार नतीजों से संतुष्ट नहीं है, तो वह रिटर्निंग ऑफिसर (RO) से दोबारा मतगणना की मांग कर सकता है। हालांकि, अधिकारी ठोस आधार होने पर ही इसे स्वीकार करते हैं।

सभी राउंड और वीवीपैट मिलान पूरा होने के बाद, रिटर्निंग ऑफिसर आधिकारिक रूप से विजेता के नाम की घोषणा करते हैं और उन्हें निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपा जाता है।

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