निजीकरण तो टला लेकिन घरों में अंधियारा कब तक

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लखनऊ। बिजली कटौती से बेहाल रहे पूर्वांचल के लोगों के कल देर शाम राहत भरी खबर तो आयी। सरकार से मिले आश्वासन के बाद बिजली कर्मचारियों ने काम पर लौटने का फैसला तो कर लिया, लेकिन अभी भी तमाम ग्रामीण इलाकों तक बिजली आपूर्ति नहीं हो सकी है।

हालांकि जिन जिलों में बिजली पिछले 60 घंटे से ज्यादा समय से गुल है, वहां लोगों को राहत मिलने में कितना समय लगेगा इस पर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।

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कल सरकार के साथ करीब 4 घंटे चली वार्ता के बाद बिजली कंपनियों के निजीकरण के प्रस्ताव को फिलहाल 3 महीने तक टालने पर बात बन गई। इस दौरान बिजली कंपनियों को सरकार की लाइन लॉस कम करने, राजस्व वसूली बढ़ाने जैसी शर्तों को भी पूरा करना होगा।

 

सरकार के साथ वार्ता में फिलहाल 3 महीने तक निजीकरण के प्रस्ताव को टाल दिया गया है। इस दौरान बिजली कंपनियों से उम्मीद की गई है कि वे लाइन लॉस कम करने और राजस्व वसूली के लक्ष्यों को हासिल करेंगी। हालांकि यह काम इतना आसान नहीं है। जो काम इतने सालों में नहीं हो पाया, उसे 3 महीने में बिजली कंपनियां कैसे पूरा करेंगी?

बिजली कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार को वापस लिया और काम पर लौट गए हैं। इससे प्रदेश की जनता को काफी राहत मिलेगी, लेकिन सच ये है कि खबर लिखे जाने तक आजमगढ़ और जौनपुर के कई गांव तक आपूर्ति सामान्य नहीं हुई। इसके अलावा बलिया और मिर्जापुर सहित पूर्वांचल के कई जिलों को भारी बिजली किल्लत का सामना करना पड़ा है।

आपको बता दें कि शहरी क्षेत्रों में तो लोगों को बिजली के साथ ही पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है। कल तक लोगों को इंतजार था कि कार्य बहिष्कार खत्म हो और आपूर्ति बहाल हो सके, लेकिन उसके बाद भी लोगो को राहत नसीब नहीं हुई।

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