क्या होर्मुज स्ट्रेट को ‘प्राइवेट रूट’ बनाने जा रहा है ईरान?

तेहरान/वाशिंगटन। वैश्विक व्यापार के सबसे संवेदनशील गलियारे ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान अब एक ऐसे रणनीतिक दांव की तैयारी में है, जो अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकता है। ईरान अब इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर ‘टोल टैक्स’ (Toll Tax) लगाने का नया कानून ला रहा है। ईरान का तर्क है कि वह इस टैक्स से युद्ध में हुए अपने नुकसान की भरपाई करेगा, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार पर एकाधिकार जमाने और विरोधी देशों की आर्थिक नाकेबंदी करने की सोची-समझी रणनीति है।

ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी के मुताबिक, ईरान जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट के लिए एक नया ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करेगा। इसके तहत जहाजों के लिए एक नया और खास रास्ता (रूट) तय किया जाएगा और दी जाने वाली सेवाओं के बदले शुल्क (Toll) वसूला जाएगा।

सबसे बड़ा ट्विस्ट:

इस नए सिस्टम में ईरान ने ‘भेदभाव की नीति’ साफ कर दी है। अजीजी ने स्पष्ट कहा है कि इस रूट और सुविधा का फायदा केवल वही कमर्शियल जहाज और देश उठा सकेंगे, जो ईरान के साथ सहयोग करेंगे। यानी, अमेरिका और उसके मित्र देशों के जहाजों के लिए यह रास्ता या तो बंद हो जाएगा या उनके लिए शर्तें बेहद सख्त कर दी जाएंगी।

ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने दोटूक लहजे में कहा है कि दुश्मन देशों के सैन्य उपकरणों और युद्धपोतों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जाएगी।

हाल ही में इस्लामी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने होर्मुज का जो नया नक्शा जारी किया है, वह वैश्विक नौसेनाओं की चिंता बढ़ाने वाला है। इस नए रूट को ईरान के तट के बेहद करीब लाया गया है। इसके जरिए ईरान न सिर्फ जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह नियंत्रित कर सकेगा, बल्कि अपनी मिसाइल और सुरक्षा रडारों की जद में रखकर हर हलचल पर सीधी नजर रखेगा।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बधेर गलिबाफ ने साफ कर दिया कि दुनिया अब एक ‘नई वैश्विक व्यवस्था’ (New World Order) की तरफ बढ़ रही है, जहां पश्चिमी देशों का दबदबा खत्म हो रहा है। ईरान के इस आक्रामक रुख को महाशक्तियों का भी साथ मिल रहा है

  • रूस और चीन की जुगलबंदी: रूस ने होर्मुज संकट पर चीन के रुख का खुला समर्थन किया है। रूसी राजनयिक मिखाइल उल्यानोव और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने साझा सुर में कहा है कि इस संकट का एकमात्र समाधान ‘स्थायी युद्धविराम’ और अमेरिका-ईरान के बीच सीधी बातचीत है।

ईरान के इस कदम से भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा, “अगर ईरान ने जल्द ही शांति समझौता नहीं किया, तो उसे इसके बहुत बुरे परिणाम भुगतने होंगे।”

दूसरी तरफ, अमेरिका इस मोर्चे पर कूटनीतिक घेराबंदी भी तेज कर रहा है। बहरीन और अमेरिका मिलकर संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी में हैं, जिसके जरिए ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट में हमले रोकने और बारूदी सुरंगें (Sea Mines) बिछाने पर तत्काल रोक लगाने का अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके।

अगर ईरान यह नया कानून पास कर देता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं, क्योंकि दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान अब युद्ध के मैदान से हटकर ‘इकोनॉमिक वॉरफेयर’ (आर्थिक युद्ध) के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों को घुटने पर लाने की बिसात बिछा चुका है।

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