IRIS Dena पर हमला: अमेरिका को ‘कड़ा पछतावा’ होगा, ईरान के विदेश मंत्री

जुबिली स्पेशल डेस्क
Iran–US War Update: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने गुरुवार को अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ईरानी युद्धपोत पर हमला करने का उसे भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को निशाना बनाया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अरागची ने कहा कि यह हमला ईरान के तट से काफी दूर अंतरराष्ट्रीय समुद्री इलाके में किया गया, जिसे उन्होंने “समुद्र में अमेरिकी अत्याचार” बताया। उनके मुताबिक करीब 130 नाविकों को लेकर चल रहा यह जहाज हाल ही में भारतीय नौसेना का मेहमान रहा था और उस पर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया।
हिंद महासागर में डूबा ईरानी युद्धपोत
ईरानी नौसेना का युद्धपोत IRIS Dena 4 मार्च की सुबह हिंद महासागर में डूब गया। यह घटना श्रीलंका के गाले से लगभग 40 समुद्री मील दक्षिण में हुई। माना जा रहा है कि अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच जारी संघर्ष के दौरान गहरे समुद्र में यह पहली बड़ी नौसैनिक घटना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संकेत मिलता है कि युद्ध का दायरा अब भारत के समुद्री क्षेत्र के आसपास तक फैल सकता है। दरअसल, यह जहाज कुछ सप्ताह पहले विशाखापत्तनम में आयोजित MILAN 2026 और International Fleet Review 2026 में हिस्सा लेने के बाद ईरान लौट रहा था।
क्या हुआ था उस सुबह?
श्रीलंकाई नौसेना और रक्षा मंत्रालय के मुताबिक जहाज पर हमला पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो से किया गया। गुरुवार सुबह करीब 5:08 से 5:30 बजे के बीच जहाज से मदद के लिए संदेश भेजा गया, जिसमें बताया गया कि समुद्र के भीतर जोरदार विस्फोट हुआ है और जहाज में तेजी से पानी भर रहा है।
कुछ ही मिनटों में जहाज रडार से गायब हो गया और डूब गया। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी पुष्टि की कि अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से इस जहाज को निशाना बनाया था।
भारी जनहानि की आशंका
गाले के अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक बचाव दल को समुद्र से अब तक 87 शव मिले हैं, जबकि 32 नाविकों को जीवित बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे और लगभग 60 नाविक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
आपात संदेश मिलने के बाद श्रीलंका की नौसेना ने तुरंत सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। नौसेना के प्रवक्ता बुद्धिका संपत ने बताया कि घटना श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र से बाहर हुई थी, लेकिन मानवीय आधार पर बचाव अभियान चलाया गया।
भारत से क्या है कनेक्शन?
यह युद्धपोत फरवरी में बंगाल की खाड़ी में आयोजित MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था। उस समय भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में इसका स्वागत किया था और इसे भारत-ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक बताया था।
हालांकि यह घटना खाड़ी क्षेत्र से सैकड़ों मील दूर हुई है, लेकिन ऐसे समय में जब अमेरिका और इज़राइल ईरान के ठिकानों पर हमले कर रहे हैं और ईरान भी मिसाइल व ड्रोन से जवाब दे रहा है, हिंद महासागर में हुई यह घटना संकेत देती है कि यह संघर्ष अब और व्यापक हो सकता है।

