भारत धर्मों को जननी है : प्रो. सीसी टैन

लखनऊ। भारत विकास परिषद्, शाखा गोमती नगर विस्तार और THE NATIONAL ACADEMY OF SCIENCES INDIA के तत्वाधान में अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान, गोमती नगर में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन  किया गया , जिसमें देश और विदेश की ख्यातिलब्ध  वैज्ञानिकों ने भारतीय संस्कृति और उसके वैज्ञानिक महत्व पर्यावरण के संदर्भ में अपने विचार प्रस्तुत किए। 


सेमिनार को संबोधित करते यूक्रेन से आए पर्यावरण वैज्ञानिक प्रोफेसर पावलो ने कहा कि भारतीय संस्कृति का प्रभाव यूक्रेन के आमजन पर दिखता है। जिसका विवरण उन्होंने गीता रामायण और पुराण और कालिदास के मेघदूत का उदाहरण देते हुवे दिया। 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि A.K. श्रीवास्तव, कार्यकारी सचिव नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया, प्रयागराज ने राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के योगदान के बारे में चर्चा किया और इस आयोजन के लिए भारत विकास परिषद को बहुत बहुत धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण और भारतीय संस्कृति के लिए वैज्ञानिक संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन करना बहुत ही सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करने से युवा जनमानस में अपनी संस्कृति को वैज्ञानिकता के संदर्भ में समझने का मौका मिलेगा और इस तरह से युवा जनमानस भारतीय संस्कृति के हर पहलू को समझने का प्रयास करेगी और अपनी संस्कृति की महानता पर गर्व करेगी। 


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर प्रीति श्रीवास्तव, अध्यक्ष, भारत विकास परिषद्, गोमती नगर विस्तार शाखा,ने नेशनल साइंस एकेडमी के सहयोग के लिए अपना आभार जताया और आए हुए प्रतिभागियों, वैज्ञानिकों और अन्य मेहमानों का स्वागत और अभिनंदन किया और आश्वासन  दिया कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में होते रहेंगे। इस मौके पर भारत विकास परिषद्, गोमती नगर विस्तार शाखा, संगठन  सचिव संजय सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद दिया। 


इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस मौके पर नेशनल बोटिनिकल इंस्टीट्यूट  के प्रोफेसर आरडी त्रिपाठी, डॉक्टर मंगेश शर्मा के अलावा अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों से वैज्ञानिक और प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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