जुबिली न्यूज डेस्क
चुनाव आयोग ने उत्तर बंगाल के चाय और सिनकोना बागानों में काम करने वाले श्रमिकों को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत बड़ी राहत दी है। अब इन श्रमिकों को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए नौकरी से जुड़े दस्तावेज (Employment Records) को वैध पहचान प्रमाण के तौर पर मान्यता दी जाएगी।

चाय मजदूरों के लिए बढ़ाई गई मान्य डॉक्यूमेंट्स की सूची
इलेक्शन कमीशन ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय को आधिकारिक निर्देश भेजे हैं। निर्देश में कहा गया है कि उत्तर बंगाल के चाय और सिनकोना बागानों में कार्यरत श्रमिक यदि संबंधित बागान का एम्प्लॉयमेंट डॉक्यूमेंट और उसके साथ निवास का वैध प्रमाण प्रस्तुत करते हैं, तो उनका नाम अंतिम वोटर लिस्ट में शामिल करने में कोई बाधा नहीं होगी।
सिर्फ इन 7 जिलों में लागू होगा फैसला
यह विशेष छूट केवल उत्तर बंगाल के सात जिलों में लागू होगी—दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और कूचबिहार।इन जिलों के चाय और सिनकोना बागान श्रमिकों को ही SIR प्रक्रिया में यह अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।
पहले नहीं थे पर्याप्त दस्तावेज
चुनाव आयोग ने पहले SIR के तहत 11 प्रकार के दस्तावेज तय किए थे, जिनमें बाद में आधार कार्ड और बिहार का SIR डॉक्यूमेंट भी जोड़ा गया। लेकिन उत्तर बंगाल के चाय बागानों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों के पास ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे, क्योंकि वे पीढ़ियों से बागानों से जुड़े हुए हैं।
इसी कारण इन जिलों के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट्स ने चुनाव आयोग से श्रमिकों के रोजगार से जुड़े दस्तावेजों को मान्यता देने की सिफारिश की थी, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया।
जमीन का रिकॉर्ड नहीं, इसलिए पहचान बनी चुनौती
चाय बागान श्रमिकों के पूर्वज बिहार से पलायन कर दशकों पहले इन इलाकों में आकर बसे थे। वे बस्तियों में रह रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें जमीन का अधिकार या लैंड रिकॉर्ड नहीं मिला है। इसी वजह से उनके पास वोटर वेरिफिकेशन के लिए जरूरी दस्तावेजों की भारी कमी थी।
बीजेपी लंबे समय से उठा रही थी मुद्दा
बीजेपी नेता और दार्जिलिंग सांसद राजू बिस्ट ने अक्टूबर-नवंबर में चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को पत्र लिखकर यह मुद्दा उठाया था। वहीं विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी आयोग को पत्र भेजकर चाय मजदूरों की परेशानी से अवगत कराया था।
फैसले के बाद राजू बिस्ट ने सोशल मीडिया पर लिखा,“इलेक्शन कमीशन ने SIR वेरिफिकेशन के लिए चाय और सिनकोना प्लांटेशन रिकॉर्ड को मान्यता देकर हजारों नागरिकों को राहत दी है, जो लंबे समय से बुनियादी दस्तावेजों की कमी के कारण चुनाव प्रक्रिया से बाहर थे।”
सुवेंदु अधिकारी ने भी एक्स पर पोस्ट कर चाय और सिनकोना बागान के मतदाताओं से SIR प्रक्रिया में आगे आने की अपील की।
SIR से डरे हुए थे मजदूर
डूआर्स क्षेत्र के एक चाय ट्रेड यूनियन नेता ने कहा कि SIR प्रक्रिया के चलते मजदूरों में डर था कि दस्तावेजों की कमी के कारण उनका नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है। अब आयोग के इस फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है।
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पिछड़े इलाकों के लिए एक और अहम बदलाव
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने हाल ही में पश्चिम बंगाल के पिछड़े और दूर-दराज़ इलाकों के लिए ‘डिसेंट्रलाइज्ड हियरिंग सेंटर’ में SIR सुनवाई की अनुमति भी दी है, ताकि अलग-थलग बस्तियों में रहने वाले लोग आसानी से अपनी बात रख सकें।
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