लिट्फेस्ट
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त्रासदी की ग़ज़ल : रोटियाँ तो रेलवाली पटरियाँ सब खा गईं
संकट काल में संवेदनाएं झकझोरती है और कलमकार उसे अल्फ़ाज़ की शक्ल में परोस देता है. ये वक्त साहित्य रचता…
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त्रासदी की कविता : देवेन्द्र आर्य ने देखा “पैदल इंडिया”
संकट काल में संवेदनाएं झकझोरती है और कलमकार उसे अल्फ़ाज़ की शक्ल में परोस देता है । ये वक्त साहित्य…
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मालविका हरिओम की ताज़ा ग़ज़ल : ये कलियुग है यहाँ भूखा कभी रोटी नहीं पाता
आपदा काल में मालविका हरिओम लगातार मजबूरों के दर्द को गज़लों की शक्ल में सामने ला रही हैं । अपनी…
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त्रासदी की कविता : प्रेम विद्रोही ने जो लिखा
संकट काल में संवेदनाएं झकझोरती है और कलमकार उसे अल्फ़ाज़ की शक्ल में परोस देता है । ये वक्त साहित्य…
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त्रासदी की कविता : नरेंद्र कुमार की कलम से
संकट काल में संवेदनाएं झकझोरती है और कलमकार उसे अल्फ़ाज़ की शक्ल में परोस देता है । ये वक्त साहित्य…
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त्रासदी की ग़जल : मालविका हरिओम की कलम से
संकट काल में संवेदनाएं झकझोरती है और कलमकार उसे अल्फ़ाज़ की शक्ल में परोस देता है । ये वक्त साहित्य…
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कोरोना वारियर डॉ वरुण चौधरी की जोशीली कविता “हंदवाड़ा हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि”
वरुण चौधरी मिटते हैं सरजमीं पर वह शख्स अमर हो जाते हैं। नाम की भूख नहीं वह हर जुबां की…
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