AAP का बड़ा एक्शन: राघव चड्ढा सहित 3 सांसदों की सदस्यता रद्द कराने की तैयारी, संजय सिंह ने दी चेतावनी

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) में मचे बड़े सियासी घमासान के बीच पार्टी अब आर-पार के मूड में नजर आ रही है।
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद AAP ने इसे ‘विश्वासघात’ करार दिया है। वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी इन तीनों सांसदों को राज्यसभा से अयोग्य घोषित कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर रही है।
10वीं अनुसूची के तहत जाएगी सदस्यता?
संजय सिंह ने घोषणा की है कि वह जल्द ही राज्यसभा के सभापति को औपचारिक पत्र सौंपेंगे। उनका तर्क है कि इन सांसदों का बीजेपी में जाना संविधान की 10वीं अनुसूची (Anti-Defection Law) का खुला उल्लंघन है।
- क्या है नियम: दलबदल विरोधी कानून के अनुसार, यदि कोई निर्वाचित सदस्य स्वेच्छा से अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो उसकी सदन की सदस्यता समाप्त की जा सकती है।
- AAP का दावा: पार्टी का कहना है कि इन नेताओं ने जनमत का अपमान किया है और तकनीकी रूप से वे अब सदन में रहने के पात्र नहीं हैं।
जुबानी जंग: ‘गद्दार’ बनाम ‘सिद्धांतहीन पार्टी’
नेताओं के पाला बदलने के बाद दोनों तरफ से तीखे वार शुरू हो गए हैं:
- संजय सिंह और मनीष सिसोदिया: AAP नेतृत्व ने इन सांसदों को ‘पंजाब का गद्दार’ बताया है। मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने कार्यकर्ताओं के खून-पसीने का सौदा निजी लाभ और डर के चलते किया है।
- अरविंद केजरीवाल: AAP सुप्रीमो ने संक्षिप्त लेकिन कड़ा संदेश देते हुए कहा, “बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का।”
राघव चड्ढा की सफाई: “मैं गलत पार्टी में सही आदमी था”
बीजेपी का दामन थामने के बाद राघव चड्ढा ने AAP पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने 15 साल दिए, वह अब अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। चड्ढा के अनुसार, “पार्टी अब राष्ट्रहित के बजाय निजी स्वार्थ के लिए काम कर रही है।”
यह घटनाक्रम तब तेज हुआ जब कुछ दिन पहले ही AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में ‘उपनेता’ के पद से हटा दिया था। पार्टी के भीतर उन पर बीजेपी के प्रति नरम रुख रखने के आरोप लग रहे थे, जिसे चड्ढा ने एक सुनियोजित हमला बताया था।
एक नजर में: क्या है 10वीं अनुसूची?
| प्रावधान | विवरण |
| उद्देश्य | सरकार में स्थिरता लाना और दलबदल रोकना। |
| अयोग्यता का आधार | पार्टी छोड़ना या व्हिप (निर्देश) का उल्लंघन करना। |
| अपवाद (विलय) | यदि 2/3 सदस्य एक साथ पार्टी बदलें, तभी सदस्यता बच सकती है। |
| निर्णायक शक्ति | सदन के पीठासीन अधिकारी (सभापति/अध्यक्ष) का फैसला अंतिम होता है। |



