परिसीमन और महिला आरक्षण पर संसद में तीखी बहस, शशि थरूर ने सरकार पर साधा निशाना

जुबिली न्यूज डेस्क

नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा लगातार दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान उठाना पड़ सकता है।

थरूर ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है और इसे अलग रखा जाना चाहिए।

थरूर ने सरकार की तुलना नोटबंदी से करते हुए कहा—

“जिस तरह नोटबंदी में जल्दबाजी दिखाई गई थी, उसी तरह परिसीमन में भी जल्दबाजी की जा रही है। यह एक तरह का राजनीतिक विमुद्रीकरण है।”

उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया के कारण “बंधक” नहीं बनाया जाना चाहिए।

शशि थरूर ने लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने के प्रस्ताव की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि—

  • इससे संसद का संचालन प्रभावित हो सकता है
  • राज्यसभा के आकार में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा, जिससे संतुलन बिगड़ सकता है

उन्होंने इसे संसदीय व्यवस्था के लिए असंतुलन पैदा करने वाला कदम बताया।

थरूर ने परिसीमन प्रक्रिया पर तीन प्रमुख चिंताएं भी उठाईं—

  1. छोटे और बड़े राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन
  2. दक्षिणी और उत्तरी राज्यों के बीच जनसंख्या नीति का अंतर
  3. आर्थिक रूप से विकसित और केंद्र पर निर्भर राज्यों के बीच असमानता

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है, उन्हें राजनीतिक शक्ति के रूप में “दंड” नहीं मिलना चाहिए।

थरूर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन परिसीमन से जुड़ी प्रक्रिया पर अभी और विचार-विमर्श की जरूरत है।

डीएमके सांसद कनिमोझी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र बुलाकर चर्चा कराने के बावजूद सरकार ने बिल को अधिसूचित कर दिया, जिससे यह प्रतीत होता है कि संसद की चर्चा का सम्मान नहीं किया जा रहा है।

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