अमेरिका की नजर भारत के अब इस क्षेत्र पर भी, उठाए ये सवाल

अमेरिका ने डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सेवाओं को लेकर भारत की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की 2026 की ‘नेशनल ट्रेड एस्टिमेट रिपोर्ट ऑन फॉरेन ट्रेड बैरियर्स’ में कहा गया है कि भारत में DTH सेवाओं के लिए भारतीय उपग्रहों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे विदेशी कंपनियों की सीधी पहुंच सीमित हो जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, व्यवहार में DTH लाइसेंसधारकों को विदेशी सैटेलाइट ऑपरेटरों के साथ सीधे अनुबंध करने की अनुमति नहीं मिलती। अगर कोई कंपनी ऐसा करने की कोशिश करती है, तो उसे प्रक्रियात्मक देरी का सामना करना पड़ता है, जिससे कारोबार प्रभावित होता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि DTH कंपनियों को उपग्रह क्षमता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की वाणिज्यिक इकाई एंट्रिक्स के माध्यम से ही लेनी होती है।

एंट्रिक्स विदेशी सैटेलाइट की अनुमति तभी देता है जब भारतीय उपग्रहों में पर्याप्त क्षमता उपलब्ध नहीं होती। इसके अलावा विदेशी ऑपरेटरों को अपनी क्षमता पहले ISRO को बेचनी होती है, जो बाद में अतिरिक्त शुल्क के साथ इसे ग्राहकों तक पहुंचाता है।

अमेरिका ने भारत को ‘ओपन स्काई’ सैटेलाइट नीति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार सेवा प्रदाता चुनने की आजादी देना और विदेशी कंपनियों को भारतीय बाजार में ज्यादा अवसर प्रदान करना है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2021 के बाद से अमेरिकी कंपनियों को कंटेंट और यूजर अकाउंट हटाने के लिए बड़ी संख्या में अनुरोध मिले हैं, जो कई बार राजनीतिक रूप से प्रेरित लगते हैं।इसके अलावा, इंटरनेट शटडाउन की घटनाओं का भी जिक्र करते हुए कहा गया है कि इससे सूचना और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होती है, जिससे व्यापार और राजस्व पर असर पड़ता है।

रिपोर्ट में भारत के दूरसंचार विभाग के नए सुरक्षा निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। इसके तहत सैटकॉम कंपनियों को रीयल-टाइम इंटरसेप्शन, वेबसाइट ब्लॉकिंग, और संवेदनशील क्षेत्रों में सेवा सीमित करने जैसी शर्तों का पालन करना होता है।
साथ ही कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि भारतीय यूजर डेटा देश के बाहर न जाए और उसका डिक्रिप्शन भी भारत के बाहर न हो।

नई गाइडलाइंस के तहत सैटेलाइट कंपनियों को पांच साल के भीतर अपने कम से कम 20% जमीनी ढांचे को भारत में विकसित करना होगा। इसके लिए चरणबद्ध योजना प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

अमेरिकी रिपोर्ट ने भारत की DTH और सैटेलाइट नीति पर कई अहम सवाल उठाए हैं। हालांकि भारत का फोकस सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर है, लेकिन आने वाले समय में विदेशी निवेश और नीतिगत बदलाव को लेकर बहस तेज हो सकती है।

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