ईरान-अमेरिका टकराव के 30 दिन, जमीनी हमले का खतरा

तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव को 30 दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबफ ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक तरफ बातचीत की बात करता है, जबकि दूसरी ओर जमीनी हमले की तैयारी में जुटा है।

“15 पॉइंट्स की शर्तों से दबाव बना रहा अमेरिका”

मोहम्मद बघेर गालिबफ के मुताबिक, अमेरिका 15 पॉइंट्स की शर्तों के जरिए ईरान पर दबाव बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि जो लक्ष्य अमेरिका युद्ध के जरिए हासिल नहीं कर सका, अब उसे कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से पूरा करने की कोशिश हो रही है।

ईरान की चेतावनी: “जमीन पर आए तो होगा जवाब”

गालिबफ ने साफ कहा कि ईरान की सेना पूरी तरह तैयार है और अगर अमेरिकी सैनिक जमीनी ऑपरेशन के लिए आगे बढ़ते हैं तो उन्हें कड़ा जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने दोहराया कि ईरान किसी भी हाल में “सरेंडर” नहीं करेगा और अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका की बढ़ती सैन्य ताकत

अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, USS Tripoli युद्धपोत मिडिल ईस्ट में तैनात किया गया है, जिसमें करीब 3,500 मरीन और सैनिक शामिल हैं।

पहले से ही इस क्षेत्र में लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद बताए जा रहे हैं, जिससे संभावित जमीनी कार्रवाई की आशंकाएं तेज हो गई हैं।

क्या ईरान में जमीनी ऑपरेशन की तैयारी?

अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन की ओर बढ़ सकता है। हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के बयानों ने तनाव को और बढ़ा दिया है।

कौन हैं मोहम्मद बघेर गालिबफ?

मोहम्मद बघेर गालिबफ ईरान के अनुभवी नेता और पूर्व सैन्य अधिकारी हैं।

  • 2020 से ईरान की संसद (मजलिस) के स्पीकर
  • 1980 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) में शामिल
  • ईरान-इराक युद्ध के दौरान कमांडर
  • 1997–2000: IRGC एयर फोर्स प्रमुख
  • 2000–2005: ईरान के पुलिस प्रमुख
  • तेहरान के पूर्व मेयर

वह चार बार राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक ओर कूटनीतिक बातचीत की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर सैन्य तैयारियां इस संघर्ष को और गहरा कर सकती हैं। आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति वैश्विक राजनीति के लिए बेहद अहम रहने वाली है।

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