अमेरिकी कब्जे में ‘बेला-1’, अब पुतिन के सामने क्या रास्ते?

जुबिली स्पेशल डेस्क

टैरिफ की मार से दुनिया अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अब महायुद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। जिस वक्त आप यह खबर पढ़ रहे हैं, उसी समय अटलांटिक महासागर के ठंडे पानी में हालात बेहद गर्म हो चुके हैं।

अमेरिका और ब्रिटेन की नौसेनाओं ने बीच समंदर में रूस से जुड़े जहाज ‘मारिनेरा’ उर्फ ‘बेला-1’ को घेरकर अपने नियंत्रण में ले लिया है। कोल्ड वॉर के बाद यह पहला मौका माना जा रहा है जब अमेरिका और रूस सीधे तौर पर समुद्र में आमने-सामने खड़े नजर आए हैं।

इस घटना ने वॉशिंगटन, मॉस्को, तेहरान और ब्रुसेल्स तक खलबली मचा दी है। सवाल यह है कि आखिर ‘मारिनेरा’ उर्फ ‘बेला-1’ में ऐसा क्या है, जिसने दुनिया को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया?

अटलांटिक में दोपहर 3 बजे क्या हुआ?

अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने दो जहाजों को अपने कब्जे में लिया है, जिनमें से एक पर रूसी झंडा लगा हुआ था। बताया गया कि आइसलैंड के तट से करीब 200 किलोमीटर दक्षिण में अमेरिकी कोस्ट गार्ड और नेवी ने हफ्तों की निगरानी और पीछा करने के बाद ‘मारिनेरा’ को रोका।

कुछ ही देर बाद रूसी ट्रांसपोर्ट मंत्रालय ने पुष्टि की कि जहाज का अपने मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। इसे कम्युनिकेशन ब्लैकआउट करार दिया गया।

ब्रिटेन ने भी खुलकर स्वीकार किया कि उसने इस कार्रवाई में अमेरिका का साथ दिया। ब्रिटिश रक्षा सचिव जॉन हीली ने कहा कि ब्रिटिश सशस्त्र बलों ने रूस जा रहे जहाज बेला-1 को रोकने में अमेरिकी सैनिकों की मदद की। उनके मुताबिक, यह कदम रूस पर दबाव बनाने और प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने के लिए उठाया गया।

रूस क्यों इसे हमला मान सकता है?

रूस का दावा है कि 24 दिसंबर को इस जहाज को आधिकारिक रूप से रूसी झंडे के तहत संचालन की अस्थायी अनुमति मिली थी। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, किसी देश के झंडे वाले जहाज पर कार्रवाई को उसकी संप्रभुता पर हमला माना जा सकता है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका से अपील की है कि जहाज पर मौजूद रूसी नागरिकों के साथ मानवीय और कानूनी व्यवहार किया जाए और उनकी जल्द रूस वापसी में कोई बाधा न डाली जाए।

क्या है ‘मारिनेरा’ उर्फ ‘बेला-1’ का रहस्य?

जिस जहाज को लेकर इतना बड़ा टकराव खड़ा हुआ है, उसका मौजूदा नाम ‘मारिनेरा’ है, लेकिन पहले यह ‘बेला-1’ के नाम से जाना जाता था।
अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार कर अवैध रूप से ईरानी तेल की तस्करी कर रहा था। हालांकि ऐतिहासिक तौर पर यह टैंकर वेनेजुएला का कच्चा तेल ढोने के लिए इस्तेमाल होता रहा है। फिलहाल दावा किया जा रहा है कि जहाज खाली है।

यह पूरा खेल पिछले महीने कैरिबियन सागर में शुरू हुआ था। अमेरिकी कोस्ट गार्ड के पास इसे जब्त करने का वारंट होने का दावा किया गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए जहाज ने कई बार अपनी पहचान बदली—पहले नाम बदला, फिर झंडा बदला और अंत में खुद को रूसी जहाज के रूप में री-रजिस्टर करा लिया। हालांकि ये सभी दावे अमेरिका की ओर से किए गए हैं।

जवाब में रूस ने उतारा ‘समुद्री राक्षस’

जैसे-जैसे अमेरिकी नेवी ने उत्तरी अटलांटिक में जहाज का पीछा तेज किया, हालात और बिगड़ते चले गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने इस जहाज को अमेरिकी कब्जे से बचाने के लिए एक पनडुब्बी को एस्कॉर्ट मिशन पर भेज दिया है।

अब अटलांटिक महासागर में अमेरिकी कोस्ट गार्ड और रूसी पनडुब्बी आमने-सामने हैं, जिससे हालात बेहद संवेदनशील हो गए हैं।

फिलहाल जहाज कहां है?

ताजा ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, जहाज ने आइसलैंड से करीब 200 किलोमीटर दक्षिण अचानक यू-टर्न लिया है। रूसी समयानुसार सुबह 11:26 बजे यह दक्षिण की ओर मुड़ा और इसकी रफ्तार घटकर 8 नॉट्स रह गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने समुद्र में अपनी रेड लाइन खींच दी है और वह इस जहाज को किसी भी कीमत पर आगे बढ़ने नहीं देना चाहता।

पुतिन की चुप्पी, लेकिन तनाव बरकरार

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन मॉस्को से सख्त प्रतिक्रिया के संकेत मिल रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यहां तक दावा किया जा रहा है कि रूसी पनडुब्बी ने अमेरिकी जहाज पर टॉरपीडो लॉक कर लिया है।
अगर समुद्र में एक भी गोली या टॉरपीडो चला, तो यह टकराव सीधे युद्ध में बदल सकता है।

रूस के पास क्या विकल्प हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस जवाब में अमेरिका या उसके किसी सहयोगी देश के जहाज को काला सागर या बाल्टिक क्षेत्र में रोक सकता है।
इसके अलावा, यूक्रेन में सैन्य दबाव बढ़ाना, कूटनीतिक बातचीत रद्द करना या ईरान के जरिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ाना भी रूस के विकल्पों में शामिल हो सकता है।

कानूनी मोर्चे पर रूस की मुश्किल

रूस के लिए चुनौती यह भी है कि ‘मारिनेरा’ मूल रूप से रूसी जहाज नहीं था। रूसी ट्रांसपोर्ट मंत्रालय खुद मान चुका है कि इसे हाल ही में अस्थायी अनुमति दी गई थी। अमेरिका इसी आधार पर दावा कर सकता है कि जहाज फर्जी दस्तावेजों पर चल रहा था, जिससे रूस की कानूनी स्थिति कमजोर पड़ सकती है।

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