मध्यप्रदेश में 40 हिंदू परिवारों ने अपनाया बौद्ध घर्म, हैरान करने वाली वजह आई सामने

जुबिली न्यूज डेस्क

मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले का एक वीडियों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. यह वीडियों सामने आने के बाद काफी हलचल मचा दिया है. दरअसल इस वीडियों में मध्य प्रदेश के 40 हिन्दू लोगों को बौद्ध धर्म अपनाते हुए दिखाया गया है।

बता दे कि मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में धर्म बदलने का एक मामला सामने आया है। करैरा के बहगवां गांव में जाटव समाज के कुछ लोगों ने छुआछूत से परेशान होकर बौद्ध धर्म अपनाने की बात कही है। इस दौरान यहां के 40 परिवारों ने हिंदू धर्म का परित्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया। साथ ही बौद्ध धर्म की शपथ ली है। बौद्ध धर्म की शपथ लेने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में गांव के नाराज लोग हिंदू धर्म को छोड़ बौद्ध धर्म की शपथ ले रहे हैं।

मामला सामने आने ने के बाद खलबली मच गई है। शिवपुरी कलेक्टर ने कहा है कि हमारे सामने यह मामला अभी संज्ञान में आया है। यह मामला गंभीर है और जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी। दरअसल, करैरा के बहगवां गांव में जाटव समाज के लोगों को एक धार्मिक कार्यक्रम में कथित रूप से अपमानित किया गया था। धार्मिक आयोजन में हुए अपमान के बाद हिंदू धर्म का त्याग करते हुए बौद्ध धर्म अपनाने की बात कही।

यह पूरा मामला 31 जनवरी का बताया जा रहा है और अब सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो रहा है । बताया जा रहा है कि बहगवां गांव में सभी ग्रामीणों ने मिलकर 25 साल बाद गांव में भागवत कथा का आयोजन किया था। इस भागवत कथा का आयोजन भी गांव में हुआ। भागवत कथा के भंडारे से एक दिन पहले 31 जनवरी को जाटव समाज के 40 घरों ने अचानक से बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया और हिंदू धर्म का परित्याग करने की शपथ ली।

बताया जा रहा है कि भंडारे में सभी समाज और लोगों को अलग-अलग काम सौंपे गए थे। जाटव समाज को जूठी पत्तल उठाने का काम सौंप दिया गया था। इसी बात को लेकर जाटव समाज के लोगों ने एकजुट होकर हिंदू धर्म का परित्याग करते हुए बौद्ध धाम को अपना लिया।

बताया जा रहा है कि 31 जनवरी को ही गांव में एक टेंट लगाकर कार्यक्रम आयोजित किया था। जहां बौद्ध धर्म के धर्म गुरु को बुलाया था और लगभग 40 परिवारों ने हिंदू धर्म का परित्याग करते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया था। कार्यक्रम का एक वीडियो भी सामने आया है।

इस दौरान भीम आर्मी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य महेंद्र बौद्ध ने बताया कि भंडारे में सभी समाजों को काम बांटे गए, इसी क्रम में जाटव समाज को पत्तल परसने और जूठी पत्तल उठाने का काम सौंपा गया था। बाद में किसी व्यक्ति ने यह कह दिया कि अगर जाटव समाज के लोग पत्तल परसेंगे तो पत्तल तो वैसे ही खराब हो जाएगी। ऐसे में इनसे सिर्फ जूठी पत्तल उठवाने का काम करवाया जाए।

अंत में गांव वालों ने कह दिया कि अगर आपको जूठी पत्तल उठाना है तो उठाओ नहीं तो खाना खाकर अपने घर जाओ। इसी छुआछूत के चलते हम लोगों ने समाज को बौद्ध धर्म अपनाने को कहा कि सभी लोगों ने बौद्ध धर्म अपना लिया।

वहीं, गांव के सरपंच ने बताया कि जाटव समाज को बहलाफुसलाकर धर्म परिवर्तन कराया है। सरपंच गजेंद्र रावत ने कहा कि जाटव समाज के आरोप पूरी तरह निराधार है। उनके अनुसार उस समाज के लोगों ने एक दिन पूर्व ही अपने हाथ से केले का प्रसाद बांटा था जो पूरे गांव से लिया और खाया भी। उनके अनुसार गांव में बौद्ध भिक्षु आए थे, उन्होंने समाज के लोगों को बहलाफुसला कर धर्म परिवर्तन करवाया है।

इस मामले में कलेक्टर रविंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि हमारे सामने यह मामला संज्ञान में आया है। यह मामला गंभीर और जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।

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