तस्वीरें तो यही कह रही हैं कि लंबा चलेगा किसान आंदोलन

जुबिली न्यूज डेस्क

जैसे-जैसे समय गुजर रहा है वैसे-वैसे किसान आंदोलन पर चर्चा कम हो गई है। भले ही सरकार किसान आंदोलन पर चुप्पी साधे हुए है लेकिन किसान झुकने को तैयार नहीं है।

दिल्ली सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के हौसले बुलंद हैं। अभी वहां जो हालात दिख रहे हैं उससे तो यही लग रहा है कि किसानों की यह लड़ाई लंबी चलने वाली है।

नवंबर माह से दिल्ली की सीमा पर डेरा डाले किसानों ने गर्मी के मौसम को देखते हुए अपने लिए अब पक्के आशियाने बनाने शुरू कर दिए हैं।

कृषि कानून वापसी तक दिल्ली सीमा पर डेरा डालने के इरादे से किसानों के लिए लिए अब सीमा पर ही ईंट-सीमेंट के पक्के घर भी तैयार हो रहे हैं। इतना ही नहीं, गर्मी के मौसम को देखते हुए पंखे, एसी से लेकर हर तरह की तैयारियां दिख रही हैं।

ये भी पढ़े: कौन हैं बदरुद्दीन अजमल, जो असम के ‘दुश्मन’ बन गए हैं?

ये भी पढ़े: दुनिया में हर साल पैदा हो रहे हैं 16 लाख जुड़वां बच्चे

ये भी पढ़े: मोदी और बाइडेन की बैठक को लेकर चीन ने क्या कहा?

वहीं इस मामले में किसानों का कहना है कि जब तक सरकार ये कृषि कानून वापस नहीं लेती, तब तक वे यहां डटे रहे हैं। इसी सिलसिले में टिकरी बॉर्डर पर परमानेंट शेल्टर बनाए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किसान सोशल आर्मी टिकरी दिल्ली की सीमा पर ईंट-सीमेंट से पक्के मकान की तरह अपने आशियाने को बना रहे हैं। उनका मानना है कि किसान आंदोलन लंबा चलेगा, इसलिए उन्होंने ईंट-सीमेंट से परमानेंट शेल्टर का निर्माण किया है।

ये भी पढ़े: तिहाड़ जेल में बंद आतंकियों के पास कैसे पहुंचा मोबाइल फोन

ये भी पढ़े: पंजाब में 169 दिन से रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन कर रहे किसान क्यों हटें ?

ये भी पढ़े: ‘भाजपा को वोट न दो, इसने तो पूरा देश बर्बाद कर दिया’

वहीं इस मामले में किसान सोशल आर्मी के अनिल मलिक ने कहा, ये घरें किसानों की इच्छाशक्ति के जैसे ही मजबूत और परमानेंट हैं। अब तक 25 घर बनाए गए हैं और आने वाले दिनों में ऐसे 1000 से 2000 घरों का निर्माण किया जाएगा।

टिकरी बॉर्डर पर किसानों के लिए जो घर बनाए गए हैं, वह एक आम कमरे की तरह हैं। इस कमरे में कूलर और पंखे के साथ-साथ खिड़की की व्यवस्था भी की गई है। हां अलबत्ता घरों की छत की सीमेंट-बालू से ढलाई नहीं हुई है, बल्कि ऊपर पराली और घास-फूस की छत बिछाई गई है, ताकि गर्मी से राहत मिले।

 

Related Articles

Back to top button