85 साल के बुजुर्ग को 35 साल पुराने केस में सजा, कोर्ट पहुंचते ही वायरल हुआ वीडियो

वैशाली: बिहार के वैशाली जिले की एक अदालत ने 35 साल पुराने आपराधिक मामले में 85 वर्षीय बुजुर्ग दीपा राय को तीन साल की सजा सुनाई है। जवानी में किए गए अपराध की सजा उन्हें बुढ़ापे में मिली, जिससे यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। अदालत के फैसले के बाद बुजुर्ग को उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अंतरिम जमानत भी प्रदान कर दी गई।

वैशाली के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की अदालत ने मंगलवार को वर्ष 1992 के एक मामले में फैसला सुनाते हुए पांच आरोपियों को दोषी ठहराया। इनमें चार अभियुक्तों को 10-10 साल की सजा और 25-25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया, जबकि दीपा राय को आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल की सजा सुनाई गई।

हालांकि, उनकी उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी, ताकि वे उच्च न्यायालय में अपील कर सकें।

सजा सुनाए जाने के दौरान 85 वर्षीय दीपा राय को उनके परिजन सहारा देकर अदालत परिसर तक लेकर पहुंचे। वह ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। इस दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच न्यायिक प्रक्रिया में देरी को लेकर बहस छिड़ गई।

वीडियो में बुजुर्ग की हालत देखकर कई लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर 35 साल बाद फैसला आने से न्याय व्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।

सूत्रों के अनुसार, वायरल वीडियो देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) तक भी पहुंच गया। बताया जाता है कि हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी बैठक के दौरान उन्होंने इस मामले की जानकारी मिलने पर तत्काल रिपोर्ट मंगाने के निर्देश दिए।

जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में स्वतः संज्ञान लेने की संभावना भी बन गई थी। इसके लिए कोर्ट रूम दोबारा खोला गया और आवश्यक कागजी कार्रवाई शुरू कर दी गई।

हालांकि, बाद में पटना हाईकोर्ट से मिली रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि निचली अदालत पहले ही दीपा राय को अंतरिम जमानत दे चुकी है। इसके बाद तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं समझी गई और मामला आगे नहीं बढ़ाया गया।

यह मामला बिहार के वैशाली जिले का है, जहां वर्ष 1992 में दीपा राय समेत अन्य आरोपियों पर एक दंपति पर गोलीबारी करने का आरोप लगा था। इस मामले में कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया गया था।

लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान चार आरोपियों की मौत हो गई, जबकि शेष पांच आरोपियों के खिलाफ अदालत ने फैसला सुनाया। दीपा राय को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया गया, जबकि अन्य आरोपियों को गंभीर धाराओं में सजा मिली।

35 वर्षों बाद आए इस फैसले ने न्यायिक प्रक्रिया में देरी के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय तक मुकदमे लंबित रहने से न्याय के उद्देश्य और प्रभाव दोनों प्रभावित होते हैं।

वहीं, सोशल मीडिया पर लोग इस बात पर भी चर्चा कर रहे हैं कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून की नजर में उसकी जवाबदेही बनी रहती है।

दीपा राय को मिली अंतरिम जमानत के बाद अब उनके पास उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने का विकल्प है। आने वाले दिनों में इस मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

Related Articles

Back to top button