जुबिली स्पेशल डेस्क
वॉशिंगटन/रोम। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका हर हाल में इस द्वीप पर नियंत्रण हासिल करेगा, चाहे यूरोपीय देश सहमत हों या नहीं। ट्रंप का कहना है कि अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता, तो रूस या चीन वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं, जिसे अमेरिका किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगा।
ट्रंप के इस बयान के बाद इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की प्रतिक्रिया सामने आई है। मेलोनी ने कहा कि उन्हें भरोसा नहीं है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के लिए सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाएगा। साथ ही उन्होंने आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए नाटो की मजबूत भूमिका पर जोर दिया।

‘ग्रीनलैंड में सैन्य कार्रवाई किसी के हित में नहीं’
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, मेलोनी ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड में सैन्य कार्रवाई किसी भी देश के हित में नहीं होगी और इसके नाटो के लिए गंभीर नतीजे हो सकते हैं। उन्होंने दोहराया कि इटली इस तरह के किसी कदम का समर्थन नहीं करेगा और अब भी उन्हें विश्वास नहीं है कि अमेरिका सैन्य बल का इस्तेमाल करेगा।
इस बीच व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन ग्रीनलैंड जैसे रणनीतिक और खनिज-समृद्ध द्वीप पर नियंत्रण के लिए विभिन्न ‘विकल्पों’ पर विचार कर रहा है, जिनमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। ग्रीनलैंड फिलहाल नाटो सहयोगी डेनमार्क का हिस्सा है।
ट्रंप का फोकस सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर: मेलोनी
मेलोनी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन अपने कुछ आक्रामक बयानों के जरिए ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को रेखांकित कर रहा है। उनके मुताबिक, यह ऐसा इलाका है जहां कई वैश्विक शक्तियां सक्रिय हैं और अमेरिका का संदेश साफ है कि वह किसी भी विदेशी ताकत के बढ़ते प्रभाव को स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि नाटो की मजबूत मौजूदगी अमेरिका की सुरक्षा चिंताओं को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
ट्रंप की करीबी मानी जाती हैं मेलोनी
जॉर्जिया मेलोनी को यूरोप में डोनाल्ड ट्रंप की करीबी नेताओं में गिना जाता है। वे अक्सर अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच टकराते हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती रही हैं।
पहले कार्यकाल से ग्रीनलैंड पर नजर
गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी डेनमार्क से ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव रखा था। हाल के घटनाक्रमों और वैश्विक रणनीतिक बदलावों के बीच उन्होंने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग को हवा दी है।
यूरोपीय देशों का विरोध
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड और स्पेन समेत कई यूरोपीय देशों ने डेनमार्क के साथ मिलकर ग्रीनलैंड की संप्रभुता का समर्थन किया है। अमेरिका ने भी 20वीं सदी में ग्रीनलैंड पर डेनमार्क के अधिकार को मान्यता दी थी।
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