जुबिली स्पेशल डेस्क
ट्रंप के शासनकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके जॉन बोल्टन ने ग्रीनलैंड को पश्चिमी देशों के लिए बेहद अहम बताया है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि, बोल्टन ने ट्रंप की हालिया बयानबाजी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात के बदले अपने ही सहयोगी देशों पर टैरिफ लगाने की धमकियां पूरी तरह बेतुकी हैं। उनके मुताबिक, इस तरह के कदम आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता स्थापित करने को और मुश्किल बना रहे हैं।
ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर यूरोपीय यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा फायदा चीन और रूस उठा रहे होंगे।
सहयोगी देशों के बीच बढ़ती फूट का लाभ उन्हीं ताकतों को मिलता है, जो वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देना चाहती हैं। काजा कैलास ने इशारों में चेतावनी दी कि अगर पश्चिमी देशों की एकजुटता कमजोर होती है, तो इसका सीधा फायदा विरोधी शक्तियों को मिलेगा। उन्होंने साफ कहा कि अगर ग्रीनलैंड की सुरक्षा को कोई खतरा है, तो इस मुद्दे को NATO के भीतर रहकर ही सुलझाया जाना चाहिए।
EU नेता ने यह भी कहा कि टैरिफ लगाने से न तो अमेरिका को फायदा होगा और न ही यूरोप को। इससे दोनों ही पक्ष आर्थिक रूप से कमजोर होंगे, साझा समृद्धि को नुकसान पहुंचेगा और ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में दरार और गहरी होगी।
यूक्रेन या ग्रीनलैंड में कोई धमकी हमें प्रभावित नहीं कर सकती: मैक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप की टैरिफ धमकियों को सख्त लहजे में खारिज किया है। उन्होंने कहा कि फ्रांस राष्ट्रों की संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मैक्रों ने कहा,
“ना तो यूक्रेन में, ना ही ग्रीनलैंड में और ना ही कहीं और किसी तरह की धमकी या दबाव हमें प्रभावित कर सकता है।”
मैक्रों ने टैरिफ धमकियों को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए कहा कि अगर ये वास्तव में लागू की जाती हैं, तो यूरोपीय देश एकजुट और समन्वित तरीके से जवाब देंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फ्रांस डेनमार्क के साथ मिलकर ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास में शामिल है, क्योंकि यह आर्कटिक और यूरोप की सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा है।
ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर का कड़ा रुख
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी ट्रंप की टैरिफ धमकियों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और उसका भविष्य केवल ग्रीनलैंड के लोगों और डेनमार्क के फैसले पर निर्भर करता है।
स्टारमर ने कहा कि आर्कटिक की सुरक्षा NATO के सभी सहयोगी देशों के लिए महत्वपूर्ण है और रूस के खतरे से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। लेकिन NATO सहयोगियों पर टैरिफ लगाना, जो साझा सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं, बिल्कुल गलत कदम है।
ट्रंप की 25 फीसदी टैरिफ की धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए घोषणा की थी कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर कोई समझौता नहीं होता, तो 1 जून 2026 से यह टैरिफ बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया जाएगा।
ट्रंप ने लिखा कि अमेरिका ने वर्षों तक डेनमार्क और यूरोपीय यूनियन के देशों को बिना टैरिफ या किसी भुगतान के सब्सिडी दी है और अब “वापस देने का समय आ गया है।”
उन्होंने दावा किया कि दुनिया की शांति दांव पर है और चीन तथा रूस ग्रीनलैंड पर नजर बनाए हुए हैं। ट्रंप ने डेनमार्क की सुरक्षा क्षमताओं पर भी तंज कसते हुए कहा कि उसके पास सुरक्षा के लिए सिर्फ दो डॉगस्लेड हैं।
वैश्विक शांति के लिए कड़े कदम जरूरी: ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा की रक्षा के लिए कड़े और निर्णायक कदम उठाना जरूरी है, ताकि किसी संभावित खतरनाक स्थिति को जल्दी और बिना किसी संदेह के खत्म किया जा सके।
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