Tamil Nadu Politics: शपथ ग्रहण से पहले बवाल, टीटीवी दिनाकरन ने विजय की पार्टी पर लगाया ‘जालसाजी’ का आरोप

जुबिली स्पेशल डेस्क
चेन्नई। तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मचे घमासान के बीच नया मोड़ आ गया है। तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के चीफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले AMMK महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात कर एक सनसनीखेज दावा किया है। दिनाकरन का आरोप है कि विजय की पार्टी ने उनके एकमात्र विधायक कामराज एस. का फर्जी समर्थन पत्र राजभवन को सौंपा है।
‘फर्जी समर्थन पत्र’ का पूरा मामला क्या है?
दिनाकरन के अनुसार, टीवीके ने जिस समर्थन पत्र के आधार पर बहुमत का दावा किया है, उसमें उनके विधायक के जाली हस्ताक्षर हो सकते हैं।
- शिकायत: दिनाकरन ने इस मामले में आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है।
- हैरानी: दिनाकरन ने बताया कि जब उन्होंने टीवी पर देखा कि उनकी पार्टी विजय का समर्थन कर रही है, तो वे दंग रह गए।
- जांच की मांग: उन्होंने राज्यपाल से इस मामले की जांच करने की अपील की है और इसे ‘लोकतंत्र का मज़ाक’ करार दिया है।
AMMK का रुख: “पलानीस्वामी ही हमारे सीएम उम्मीदवार”
टीटीवी दिनाकरन ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी एनडीए (NDA) गठबंधन का हिस्सा है और वे एआईएडीएमके (AIADMK) के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।
- समर्थन पत्र: दिनाकरन ने राज्यपाल को सौंपे अपने पत्र में ईपीएस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की अपील की है।
- विधायक का रुख: उन्होंने दावा किया कि विधायक कामराज एस. ने पहले ही पलानीस्वामी के समर्थन में हस्ताक्षर कर दिए थे।
- सीटों का गणित: हालिया विधानसभा चुनाव में AMMK को केवल 1 सीट (कामराज एस.) मिली है।
क्या रुक जाएगा विजय का शपथ ग्रहण?
9 मई (शनिवार) को विजय का शपथ ग्रहण समारोह प्रस्तावित है, लेकिन इस नए विवाद ने कानूनी और संवैधानिक पेच फंसा दिए हैं।
- हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप: दिनाकरन ने इसे सीधे तौर पर ‘विधायकों की खरीद-फरोख्त’ या जालसाजी का मामला बताया है।
- संपर्क से बाहर विधायक: दिनाकरन ने यह भी स्वीकार किया कि घटना के दौरान उनका अपने विधायक कामराज से संपर्क नहीं हो पाया था।
तमिलनाडु की सत्ता की चाबी अब राजभवन के पास है। यदि विधायक के हस्ताक्षर जाली पाए जाते हैं, तो विजय की सरकार बनाने की दावेदारी पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हैं।



