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	<title>वैश्वीकरण Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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		<title>खासे भोले हैं चीनी सामान का बहिष्कार कर चीन को सबक सिखाने वाले लोग</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/people-who-teach-chinese-a-lesson-by-boycotting-chinese-goods-are-quite-naive/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2020 05:10:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[# India-China Ladakh]]></category>
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		<category><![CDATA[आर्थिक नीति]]></category>
		<category><![CDATA[खासे भोले हैं चीनी सामान का बहिष्कार कर चीन सबक सिखाने वाले लोग]]></category>
		<category><![CDATA[चायनीज माल]]></category>
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		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी]]></category>
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		<category><![CDATA[हिंदी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[ श्रीश पाठक पूरी विनम्रता से कहना चाहता हूँ कि जो लोग चीनी सामान का बहिष्कार करके चीन को सबक सिखाना चाहते हैं, खासे भोले हैं। सरकार की देखरेख में अपनी सीमा के भीतर जो चायनीज माल आ गया, उसमें किसी भारतीय का निवेश हो चुका, अथवा उसकी देनदारी तय हुई और उसी क्षण भारतीय कोष &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong> श्रीश पाठक</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignright wp-image-94232 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/8.Shreesh-Pathak-300x226.jpg" alt="" width="254" height="192" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/8.Shreesh-Pathak-300x226.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/8.Shreesh-Pathak-768x578.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/8.Shreesh-Pathak-1024x770.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/04/8.Shreesh-Pathak.jpg 1420w" sizes="auto, (max-width: 254px) 100vw, 254px" />पूरी विनम्रता से कहना चाहता हूँ कि जो लोग चीनी सामान का बहिष्कार करके चीन को सबक सिखाना चाहते हैं, खासे भोले हैं। सरकार की देखरेख में अपनी सीमा के भीतर जो चायनीज माल आ गया, उसमें किसी भारतीय का निवेश हो चुका, अथवा उसकी देनदारी तय हुई और उसी क्षण भारतीय कोष में एक नियत सीमा कर राशि भी पहुँच गई। इसके बाद से चीनी बहिष्कार, चीनी नहीं रह जाता, वह भारतीय व्यावसायियों का बहिष्कार हो जाता है।</p>
<p>आर्थिक नीति के स्तर पर और सीमा पर ये दो ऐसे जगह हैं जहाँ चायनीज माल को रोका जा सकता है और इन दोनों ही जगहों पर कार्यकारी शक्ति सरकार के पास है। सचमुच अगर चायनीज माल का बहिष्कार करना है तो इन्हीं दो जगहों पर सरकार को खुलकर प्रतिबंध लगाना होगा। इसके बाद चीनी माल का बहिष्कार अथवा चीनी ऐप की अनइंस्टालिंग महज नारे हैं। सरकार के एक इशारे पर प्ले स्टोर/ ऐप स्टोर के भारतीय संस्करण से चायनीज ऐप हटाए जा सकते हैं।</p>
<p><strong><span style="color: #800000;"><a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/there-are-thorns-on-the-roads-calling-them-roses-cannot-cut-a-journey/">ये भी पढ़े : रास्तों पर कांटें हैं, इन्हें गुलाब कहने भर से सफर नहीं कट सकता</a></span></strong></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/poor-health-system-the-battle-against-corona-not-winning-like-this/">लचर स्वास्थ्य व्यवस्था : ऐसे तो नहीं जीत पायेंगे कोरोना के खिलाफ लड़ाई</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े :   <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/no-change-in-kashmiri-pandits-life/">अनुच्छेद 370 भी हट गया मगर कश्मीरी पंडितों नहीं बदला हाल</a></strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-174661" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/chinies-product.jpg" alt="" width="968" height="527" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/chinies-product.jpg 968w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/chinies-product-300x163.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/chinies-product-768x418.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 968px) 100vw, 968px" /></p>
<p>सरकार क्यूँ ऐसा नहीं करती, पर सत्ताधारी राजनीतिक दल के लोकल गुर्गे ऐसा क्यूँ करने की कोशिश करते हैं। सरकार को दुनिया भर के मंचों पर जाना होता है, वहाँ राजनीतिक-आर्थिक-सामरिक डील करनी होती है। वहाँ भाँति-भाँति के देशों के मुखर-मूक समर्थन की जरूरत होती है। इस लिबरल ऑर्डर वैश्विक व्यवस्था में वैश्वीकरण से इतर राह लेने की गुंजायश बेहद कठिन है इसलिए आप पॉलिसी के स्तर पर किसी एक विशेष देश के आयात पर रोक लगाते हुए प्रगतिशील राष्ट्र प्रतीत नहीं हो सकते और फिर पड़ोसियों में चीन से तो सर्वाधिक व्यापार हमारा होता रहा है।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/vip-culture-peoples-representative-becoming-special-from-mango/">वीआईपी संस्कृति : आम से खास बनते जनप्रतिनिधि</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/laborers-may-be-hunting-of-political-party/">कहीं बेबस मजदूर न बन जाएं दलीय राजनीति का शिकार</a></strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-174536" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/cheen-again-protest-1.jpg" alt="" width="806" height="527" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/cheen-again-protest-1.jpg 806w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/cheen-again-protest-1-300x196.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/06/cheen-again-protest-1-768x502.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 806px) 100vw, 806px" /></p>
<p>लोकल गुर्गे इसलिए कभी-कभी ऐसा कराते हैं ताकि बड़े मुद्दों का साधारणीकरण किया जा सके, सरकार के कर्तव्यों से अधिक नागरिक को महसूस कराया जा सके कि तुम भी अपने स्तर से असर डाल सकते हो, देखो, सरकार को जो करना चाहिए वो तो वो कर ही रही है, तुम्हीं हो जो सस्ते के चक्कर में चायनीज माल नहीं छोड़ते। चूँकि लोकल स्तर पर कुछ छोटे व्यापारियों का काम भी इन चायनीज माल से खराब होता है तो इस दिशाहीन मुहिम को आँच मिल जाती है कुछ समय के लिए, इस बीच सरकार अपनी जवाबदेही से बच खड़ी होती है। आपकी सरकार चीनी माल के विरोध में न हो और आप हों ऐसा तभी जायज हो सकता है जब सरकार आपकी न होकर अंग्रेज बहादुर की हो।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/modi-government-speaks-in-the-language-of-moneylenders-coronavirus-lockdown/">साहूकारों की भाषा में बात करती सरकार</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>उत्तर कोरोना काल में क्या होगा वैश्वीकरण का भविष्य ?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/globalization-in-post-corona-period/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Utkarsh Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2020 09:12:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[आर्थिक मंदी]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर कोरोना काल]]></category>
		<category><![CDATA[ग्लोबलाईज़ेशन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली पोस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[मनीष पाण्डेय]]></category>
		<category><![CDATA[वैश्वीकरण]]></category>
		<category><![CDATA[सामाजिक-आर्थिक]]></category>
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					<description><![CDATA[डा. मनीष पांडेय वैश्वीकरण की प्रक्रिया के विस्तार में मूल आर्थिक पक्ष के सापेक्ष ही स्थानीयता और राजनीतिक समीकरण का भी महत्व है। कोरोना संकट के उत्तर काल में वैश्वीकरण से सम्बंधित परिदृश्य व्यापक रूप से बदलेगा। वैश्वीकरण ने विश्व स्तर पर सामाजिक-आर्थिक बदलाव करते हुए व्यक्ति के जीवन स्तर में वृद्धि की है और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>डा. मनीष पांडेय</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-159885 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/manish-panday.jpg" alt="" width="150" height="150" />वैश्वीकरण की प्रक्रिया के विस्तार में मूल आर्थिक पक्ष के सापेक्ष ही स्थानीयता और राजनीतिक समीकरण का भी महत्व है। कोरोना संकट के उत्तर काल में वैश्वीकरण से सम्बंधित परिदृश्य व्यापक रूप से बदलेगा।</p>
<p>वैश्वीकरण ने विश्व स्तर पर सामाजिक-आर्थिक बदलाव करते हुए व्यक्ति के जीवन स्तर में वृद्धि की है और संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं, लेकिन बौद्ध धर्म में एक मुहावरा है कि स्वर्ग पहुंचने की जो चाभी है, वह नर्क के दरवाज़े भी खोलती है।</p>
<p>बात यहाँ भी कुछ अलग नहीं है। वैश्वीकरण ने व्यापक समृद्धि के साथ ही असमानता एवं वंचना को भी बढ़ाया है। हक़ीक़त में हमने वैश्वीकरण को तो अपनाया, लेकिन उससे जुड़े जोखिमों के बारे में कभी विचार नहीं किया।</p>
<p>यही कारण है कि एक निश्चित समयकाल के पश्चात अर्थव्यवस्था के उदारीकरण और निजीकरण का दौर भी बार-बार मंदी से जूझता है और प्रायः विभिन्न देश पूंजी और श्रम के मुक्त प्रवाह पर नियंत्रण करने लगते हैं।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>ग्लोबल विलेज का सपना देखने वाली दुनिया के अधिकांश हिस्सों में मंदी, राष्ट्रवाद एवं सजातीयता के उभार, ब्रेक्जिट, डब्ल्यूटीओ एवं डब्ल्यूएचओ जैसी वैश्विक संस्थाओं की निरपेक्षता पर उठते सवाल और कई देशों की बदलती आर्थिक नीति के कारण पूर्व से ही वि-वैश्वीकरण (डी-ग्लोबलाइजेशन) की प्रवृत्ति उभरने के संकेत मिल रहे थे, जिसे कोरोना के खतरे ने और भी बेनक़ाब कर दिया है।</strong></span></p></blockquote>
<p>कोरोना वायरस के फैलाव होने के बाद इसी अप्रैल में जापान ने चीन से कारोबार समेटने वाली कंपनियों के लिए आर्थिक पैकेज का एलान कर दिया। हालाँकि 2017 में भी ऐसी खबरें आईं थी कि जापान चीन से अपना निवेश हटाकर दक्षिण पूर्व एशिया या भारत में लाना चाहता है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार अमेरिकी हितों को लेकर नौकरियां बाहर जाने से रोकने और चीन के ख़िलाफ़ कोरोना वायरस फैलाने को आरोप लगाकर उसे अलग-थलग करने का प्रयास कर रहे हैं।</p>
<p>कोरोना संकट काल में विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे बहुराष्ट्रीय संगठनों पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ भी समन्वय की कमीं को लेकर विभिन्न देशों के निशाने पर है। व्यापार प्रणाली में विवाद उत्पन्न होने की घोर आशंकाएं हैं। जेनेवा स्थित डब्ल्यूटीओ को किनारे लगाया जा सकता है।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>मंदी की चपेट में है दुनिया </strong></span></p>
<p>इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने हाल में कहा, कि &#8216;कोरोना वायरस की वजह से 90 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ चुकी है&#8217;। आईएमएफ चीफ ने साफ कहा कि &#8216;दुनिया के 170 देशों के लोगों की प्रति व्यक्ति आय में भी बड़ी कटौती होगी&#8217;। मंदी के कारण तमाम बहुराष्ट्रीय कम्पनियां बड़े पैमाने पर छटनी करेंगी।</p>
<p>भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी मजबूत आर्थिक स्थिति वाली कंपनी ने कर्मचारियों के वेतन कटौती का एलान कर दिया हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का भी कहना है कि &#8216;कोरोनावायरस की महामारी का असर देश के भविष्य पर काली छाया की तरह मंडराता रहेगा और लॉकडाउन का असर सीधे तौर पर देश की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा&#8217;। गरीब वर्ग को सरकारें काफ़ी हद अनुवृत्ति (सब्सिडी) देकर संभाल सकती हैं किंतु मिडिल और लोअर मिडल क्लास को गंभीर आर्थिक संकट और तनाव का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p>एक अनुमान के अनुसार, कोविड-19 की महामारी के कारण वैश्विक उत्पाादन, सप्ला ई, व्याापार और पर्यटन पर विपरीत असर पड़ना तय है। इसके अलावा गावों में वापसी करने वाले लोगों की संख्या लॉकडाउन खुलते ही तेजी से बढ़ेगी, जो स्थानीय स्तर पर रोजगार या उद्यम शुरू करने का प्रयास करेंगे।</p>
<p>अब उनके लिए रोज़गार पैदा करना मुश्किल भरा काम होगा। देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर होने वाला निर्बाध आवागमन अब अधिक कठिन होने जा रहा है। मुट्ठी में दुनिया रखने की जिजीविषा को इस अदृश्य वायरस ने कमज़ोर कर दिया है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/4-5-lakh-crores-needed-to-bring-the-battered-economy-back-on-track/">पस्त अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए चाहिए 4.5 लाख करोड़</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/why-swadeshi-jagran-manch-of-rss-is-against-arogya-setu-app/">RSS का स्वदेशी जागरण मंच क्यों है आरोग्य सेतु एप के खिलाफ</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/so-did-saudi-arabia-have-to-survive-the-big-crisis/">…तो क्या सऊदी अरब बड़े संकट से बच गया?</a></strong></span></p>
<p>विश्व के तमाम चिंतक आशंकाओं से घिरे हुए हैं कि यह महामारी वैश्वीकरण को पूरी तरह कमजोर कर देगी; इसकी व्याख्याओं का आधार बदल जाएगा। यद्यपि कई आर्थिक असमंजस के कारण पहले से ही बदलते परिप्रेक्ष्य के अनुरूप वैश्वीकरण को समझने की ज़रूरत महसूस हो रही थी, किंतु कोरोना संकट के उत्तर काल में यह अधिक आवश्यक हो गया है।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>वैश्वीकरण की नीति पर फिर शुरू हुई बहस </strong></span></p>
<p>आज वैश्वीकरण को फ़िर से समझने की जरूरत आ पड़ी है। इसे हम कैसे परिभाषित करते हैं, यह इस पर तय होगा कि इसके किस संदर्भ पर बात की जानी हैं। यदि एशिया के संदर्भ में बात कर रहे हैं, तो ऐसा लगता है कि भारत, चीन और इंडोनेशिया जैसी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में तेज वृद्धि दिखेगी, जहाँ पर दक्ष मानव संसाधन की अधिकता है, क्योंकि कोरोना वायरस के कारण आधारभूत संरचना पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नही पड़ा है जैसा कि प्राकृतिक आपदाओं की वजह से होता है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>महामारी खत्म होने के बाद ऐसी प्रबल आबादी वाली अर्थव्यवस्थाएं उभर जाएंगी। हम अन्य स्थानों में भी वृद्धि देखेंगे, लेकिन यह वृद्धि धीमी होगी। आर्थिक विकास की क्षतिपूर्ति में मजबूत अर्थव्यवस्था सहायक होगी। आर्थिक रूप से डाँवाडोल देश परिस्थितियों को अपने पक्ष में भुना पाने में असफल रहेंगे।</strong> </span></p></blockquote>
<p>भारत की अर्थव्यवस्था का परीक्षण भी इसी आधार पर होगा। ढंग से प्रबंधन होने पर भारत जैसे देश मैन्युफैक्चरिंग का हब बन सकते हैं। विकसित देश चीन की जगह भारत को अपने बाजार में विकल्प दे सकते हैं। अमीर देश संकट के समय कामगारों और उद्यमियों को क्षतिपूर्ति देकर और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित कर अर्थव्यवस्था को पटरी पर बनाए रख सकते हैं, लेकिन जिन गरीब देश के लोगों के पास ऐसी सुरक्षा नहीं है, वहाँ वंचित लोगों के सड़कों पर उतरने का खतरा है। हालाँकि यह आशंकाएँ महामारी नियंत्रित होने की समयसीमा पर भी बहुत कुछ निर्भर होंगी।</p>
<p>लंबे समय से यह विमर्श हो रहा है कि वैश्वीकरण पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। एक धारा इसे पूँजीवाद के विस्तार के परिणाम के रूप में देखती है, जिसमें एक समय पश्चात मंदी का आना स्वाभाविक है। दूसरी धारा समाज और संस्कृति के व्यापक परिप्रेक्ष्य पर बल देती है। इन दोनों ही कारणों से बढ़े मानव आवागमन ने कोविड-19 को रिकॉर्ड तेजी से फैलाने का आधार दे दिया।<br />
दरअसल, हम सोचते हैं कि वैश्वीकरण बहुत अच्छा है क्योंकि यह लोगों को गरीबी से बाहर निकालता है, जीवन को विलासी और सुविधाजनक बनाता है, नौकरियों के अवसर पैदा करता है, टीके, दवाइयां, सामान और पैसे देता है। निःसंदेह इसकी वजह से ही भारत ने भी कई अन्य विकासशील देशों की तरह तेजी से प्रगति की है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-168203 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/globalization-.jpg" alt="" width="768" height="576" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/globalization-.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/globalization--300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 768px) 100vw, 768px" /></p>
<p>वैश्वीकरण से ही विचारों, प्रौद्योगिकियों, कौशल, वस्तुओं एवं सेवाओं और अन्य देशों के साथ वित्तीय आदान-प्रदान होता है। लेकिन, यह तभी तक सकारात्मक है, जबतक हम इसे अनुशासित और व्यवस्थित कर सकें अन्यथा यह बहुत खतरनाक भी है। इसका डरावना पक्ष भी है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>वैश्वीकरण अच्छा और बुरा दोनों है। इसका फायदा लिया जा चुका है, और अधिक दोहन के लिए इसमें सन्निहित जोखिमों के उचित प्रबंधन की तैयारी करनी चाहिए थी। किन्तु वास्तविकता यह है कि वैश्वीकरण के कारण उत्पन्न खतरों का प्रबंधन नहीं हो पाया हैं। प्रबंधन की कमीं से ही वैश्वीकरण खतरनाक परिणाम दे रहा है। वर्तमान महामारी भी इसी का नतीजा है।</strong> </span></p></blockquote>
<p>डच-अमेरिकी समाजशास्त्री ससकिया ससेन का मानना है कि वैश्वीकरण यद्यपि राज्यों (स्टेट) के बीच होने वाली प्रक्रिया है, परन्तु वास्तव में यह बड़े-बड़े नगरों के बीच होता है। उनकी पुस्तक &#8216;द ग्लोबल सिटी&#8217; (1991) के मुताबिक़ ये नगर ही पूंजीवाद के विकास के केंद्र हैं। इन्ही &#8216;विश्व नगरों&#8217; के आस-पास अब क्षेत्रीय केंद्र (रीजनल सेंटर्स) भी बनने लगे हैं।</p>
<p>उदाहरण के लिए भारत में मुंबई और चीन के वुहान जैसे शहरों ने तेजी से विकास किया है। ऐसे ही विश्व नगरों में व्यापारिक केंद्र, पर्यटन और हवाई अड्डे हैं, जहाँ दुनियाभर के यात्रियों का आना-जाना है। यही लोग अच्छी चीजों के साथ बुरी चीज़ भी फैला रहे हैं। विभिन्न देशों की पारस्परिक आर्थिक निर्भरता वित्तीय संकट का भी प्रसार करती है।</p>
<p>सन 2008 का वित्तीय संकट इसका उदाहरण है। वैश्विक जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण पर भी इस विकास का व्यापक असर है। यानी एक विश्व नगर में कुछ भी होने वाली अच्छी या बुरी घटना बहुत तेजी से पूरी दुनिया में फैल जाती है। वुहान शहर से कोविड-19 वायरस का तेजी से पूरी दुनिया में फैल जाना इस तथ्य को प्रमाणित करता है।</p>
<p>मुक्त व्यापार और निर्बाध आवागमन में इस वायरस के कारण आई बाधाओं और बदली आर्थिक-राजनीतिक परिस्थितियों में वही देश अपने विकास दर को बनाए रख सकता है, जिसकी घरेलू अर्थव्यवस्था और आधारभूत आर्थिक संरचना मजबूत है। तो क्या वैश्वीकरण का समय ख़त्म हो गया? बिल्कुल नहीं! बस हम एक अलग प्रकृति के वैश्वीकरण की ओर बढ़ रहे हैं।</p>
<p><strong><em>(लेखक दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के अध्यापक हैं)</em></strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>उत्तर कोरोना काल मे बहुत कुछ बदलेगा</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/a-lot-will-change-in-the-north-corona-era/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Apr 2020 13:36:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>
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		<guid isPermaLink="false">https://www.jubileepost.in/?p=161007</guid>

					<description><![CDATA[दिनेश दत्त शुक्ल हमने अपनी जिजीविषा से बीते कालखंड में बहुत कुछ झेला है, गिरे हैं, फिर उठ खड़े हुए हैं किन्तु मानव इतिहास के इस सबसे लम्बे और व्यापक विषाणु काल से उपजे लॉक डाउन के बाद उत्तर कोरोना वाली दुनिया की स्थिति निश्चित रूप से अपने वर्तमान से कुछ भिन्न होगी। हम एक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-161017 alignleft" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/dinesh-150x150.jpg" alt="" width="90" height="120" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/dinesh-225x300.jpg 225w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/dinesh.jpg 480w" sizes="auto, (max-width: 90px) 100vw, 90px" />दिनेश दत्त शुक्ल</strong></span></p>
<p>हमने अपनी जिजीविषा से बीते कालखंड में बहुत कुछ झेला है, गिरे हैं, फिर उठ खड़े हुए हैं किन्तु मानव इतिहास के इस सबसे लम्बे और व्यापक विषाणु काल से उपजे लॉक डाउन के बाद उत्तर कोरोना वाली दुनिया की स्थिति निश्चित रूप से अपने वर्तमान से कुछ भिन्न होगी।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>हम एक दूसरे से हाथ मिलाने की तहजीब को भूलने का प्रयास करेंगे, आजादी के बाद हुये सबसे बड़े पलायन और विस्थापन के दर्द को झेलने वाले, क्या अपने उसी रूप में फिर से महानगरों की ओर मुखातिब होंगे।</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-160877" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/nagla-2_5948589_835x547-m_5949921_835x547-m.jpg" alt="" width="835" height="547" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/nagla-2_5948589_835x547-m_5949921_835x547-m.jpg 835w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/nagla-2_5948589_835x547-m_5949921_835x547-m-300x197.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/nagla-2_5948589_835x547-m_5949921_835x547-m-768x503.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 835px) 100vw, 835px" /></p></blockquote>
<p>यह एक विचारणीय विषय होगा कि आधुनिक राष्ट्र राज्य की अवधारणा और ग्राम स्वराज की अवधारणा में कैसे सामंजस्य बैठाया जाये कि आवश्यकता पड़ने पर ग्राम स्तर पर निवास कर रहे लोगों को /जन को, राष्ट्रीय तंत्र के भरोसे का मोहताज न होना पड़े। वैश्वीकरण, निजीकरण, विकास की अ-सीमा(दो लेन चार लेन अब सोलह लेन), धन और लोभ का अधिकतम संग्रह, सत्ता का अहंकार, धर्म की निजता आदि जैसे इन सब तमाम संदर्भों पर नये सिरे से विचार करने की आवश्यकता निश्चित रूप से पड़ेगी।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>बीते कई दिनों से जब धर्म के सारे मठ/ केंद्र (मंदिर मस्जिद चर्च) बंद पड़े हैं तो क्या हम सबको ईश्वर के अनीश्वरता पर फिर से बहस करनी पड़ेगी।</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>ऐसे तमाम प्रश्न हम सबके सामने मुंह बाये खड़े होंगे और तब आगे इसके उत्तर भी आयेंगे जो निश्चित रूप से नयी अवधारणाओं को जन्म देंगे।</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-161013" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/कोरोना-काल.jpg" alt="" width="650" height="540" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/कोरोना-काल.jpg 650w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/कोरोना-काल-300x249.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 650px) 100vw, 650px" /></p>
<p>उत्तर कोरोना के बाद पूरे विश्व की आर्थिकी बदल जायेगी। धन का जो असीमित प्रवाह अबाध रूप से हवा में तैर रहा था उस पर विराम लगेगा। महानगरों से गाँव की ओर लौटी एक बड़ी आबादी राष्ट्र राज्य के भरोसे कब तक जीवित रहेगी? बड़ी बड़ी कम्पनियों के बंद होने से बेकार हो रहे मध्यम वर्ग के युवा क्या करेंगे?</p></blockquote>
<p>धन के प्रवाहता की कमी हमारे बैंकिंग तंत्र पहले से झेल रहे हैं ऐसे में इस कोरोना संकट और इससे उपजे लॉक डाउन को क्या हम सिर्फ उनको बड़ा और बड़ा बनाते जाने भर से संभाल पाएंगे? यह एक यक्ष प्रश्न होगा।</p>
<p>उत्तर कोरोना के बाद हमारी सामाजिकी में बड़े बदलाव आयेंगे। मात्र दस दिनों की घर बैठकी के बाद कितने परिवारों के सदस्य अवसाद की स्थिति में चले गये हैं, पड़ोस के मकान की एक महिला अपने आस पास श्रव्य और दृश्य दोनों माध्यमों में मात्र कोरोना की चर्चा के चलते गत कई दिनों से कोरोना कोरोना चिल्ला रही है। ऐसे में मनोविज्ञानियों और समाजशास्त्रियों का काम समाज के नये ढांचे को जांचने परखने में बढ़ जायेगा।</p>
<p>वर्तमान के हिसाब से हम एक ऐसे समाज में बदल रहे हैं जहाँ स्वयं को जीवित रखने के सिवा अन्य कोई मूल्य शेष नहीं रह गया है। आत्म और आत्मा से दूर बस एक देह का सवाल उपभोक्ता बनते जाने वाले लालच के परिणाम में दिखाई दे रहा है। इस एकांतवास के बाद सामाजिक संरचना का जो खुरदुरापन सतह पर फ़ैल रहा है उसकी भरपाई होने में वर्षों लग जायेंगे।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>उत्तर कोरोना काल के बाद जो वैश्विक पुनर्जागरण हो रहा है उसमें निश्चित रूप से पूर्व की तथाकथित महा शक्तियां कहाँ खड़ी होंगी और वैश्विक नेतृत्व कहाँ केन्द्रित होगा इसको लेकर राजनीति विज्ञानियों को शोध का एक नया अवसर मिलेगा।</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>उत्तर कोरोना और वैश्विक पुनर्जागरण के बाद इतिहास का कालखण्ड कोरोना पूर्व और उत्तर कोरोना के रूप में लिखा जायेगा। एक नये जैविक हथियार की उपज के चलते युद्ध के तरीकों में बदलाव निश्चित है। ऐसे में साहित्य की भूमिका और बड़ी हो जायेगी।</strong></span></p></blockquote>
<p>एक तरफ़ मानवता को बचाने के लिये इस जैविक युद्ध से लड़ रही सत्ता और दूसरी ओर इस लड़ाई में पीड़ित तमाम लोगों की स्थिति जीवन मरण के रूप में उपस्थित हो गयी है। सत्ता के लिए यह स्थिति तो – भइ गति सांप छंछूदर केरी, की हो गयी है। “शुद्ध स्फुरण रूपस्य दृश्य भावं पश्यत:, क्व विधिः क्व च वैराग्यम् क्व त्याग: क्व शमोअपि वा”।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-160988" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/mask.jpg" alt="" width="960" height="500" /></p>
<p>उत्तर कोरोना काल में चाँद और मंगल को छूने वाले हाथों के लिए प्रेम की नई परिभाषा गढ़नी पड़ेगी क्योंकि किसी का हाथ पकड़ने से पहले (माँ का वात्सल्य हो या भाई बहन का प्रेम या पति पत्नी का रिश्ता) उसके धुले होने की शर्त की प्राथमिकता आने से मन का उछाह तो गायब ही हो जायेगा।<br />
देह धरे का गुन यही देह देह कछु देह बहुरि न देही पाइये अबकी देह सो देह।</p>
<p>कबीर तो देह छोड़ने की बात करते हैं पर क्या वह हम सबके लिये इतना आसान है। “कबीर सो धन संचिये जो आगे का होय, सीस चढ़ाये गाठड़ी जात न देखा कोय”। जीवन की इसी मुक्ति से बचने के लिये हम सब कैद हैं घरों में।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>“न में जीव इति ज्ञात्वा, स जीवन्मुक्त उच्यते”। </strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>उलझनों से मुक्त होना ही जीवन का परम उद्देश्य है। </strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>गुरु गोविन्द सिंह ने लिखा – </strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>देह सिवा बरु मोहि इहै सुभ करमन से कबहूँ न टरों ।।।</strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>जब आव की अउध निदान बने अति ही रन में तब जूझ मरों। </strong></span><br />
<span style="color: #ff0000;"><strong>उत्तर: कोरोना और वैश्विक पुनर्जागरण के इस नवयुग में अपने संचेतना, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संरक्षण और परिवर्धन ही हम सबके अभ्युदय का कारक बने।</strong></span></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">(लेखक दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं )</span></strong></p>
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