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	<title>योगेन्द्र यादव Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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	<item>
		<title>वोटबंदी की हार: आधार से मताधिकार</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/defeat-of-voting-ban-voting-rights-through-aadhaar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Supriya Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 10:25:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ओपिनियन]]></category>
		<category><![CDATA[आधार कार्ड]]></category>
		<category><![CDATA[चुनाव आयोग]]></category>
		<category><![CDATA[योगेन्द्र यादव]]></category>
		<category><![CDATA[वोटबंदी]]></category>
		<category><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[योगेन्द्र यादव सांप मरा तो नहीं लेकिन उसका डंक निकल गया। सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर के फैसले से वोटबंदी का अभियान अभी रुका तो नहीं, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बहाने लाखों-करोड़ों नागरिकों का मताधिकार छीने जाने की आशंका पर काफ़ी हद तक विराम लग गया। यह आदेश किसी पार्टी की विजय नहीं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff"><strong>योगेन्द्र यादव</strong></span></p>
<p>सांप मरा तो नहीं लेकिन उसका डंक निकल गया। सुप्रीम कोर्ट के 8 सितंबर के फैसले से वोटबंदी का अभियान अभी रुका तो नहीं, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बहाने लाखों-करोड़ों नागरिकों का मताधिकार छीने जाने की आशंका पर काफ़ी हद तक विराम लग गया।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-327561 size-large" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/RFPGCK2NmFmTXyJC-1024x576.jpg" alt="" width="618" height="348" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/RFPGCK2NmFmTXyJC-1024x576.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/RFPGCK2NmFmTXyJC-300x169.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/RFPGCK2NmFmTXyJC-768x432.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2025/09/RFPGCK2NmFmTXyJC.jpg 1200w" sizes="(max-width: 618px) 100vw, 618px" /></p>
<p>यह आदेश किसी पार्टी की विजय नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में नज़रों से ओझल लोक की विजय है। अगर इस निर्णय को राष्ट्रीय स्तर पर मान्य किया जाए तो इससे राष्ट्रव्यापी एसआईआर में कोई 10 करोड़ नागरिकों का वोट कटने से बच जाएगा। इस लिहाज से यह आधार से मताधिकार देने का यह आदेश ऐतिहासिक साबित हो सकता है।</p>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000">पहली नज़र में देखें तो यह आदेश बहुत सीमित और तकनीकी है। निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार से शुरू हुई वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर कई संवैधानिक, कानूनी और प्रक्रियागत सवाल उठाये गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का नवीनतम आदेश फ़िलहाल इनमें से किसी भी बुनियादी सवाल का जवाब नहीं देता। वह सिर्फ़ एक व्यावहारिक सवाल तक सीमित है: नई वोटर लिस्ट बनाते वक्त चुनाव आयोग किन दस्तावेजों को स्वीकार करेगा?</span></strong></p></blockquote>
<p>लेकिन यह सीमित सवाल ज़मीन पर एसआईआर का सबसे बड़ा सवाल बन गया था। इस का कारण था चुनाव आयोग की एक अजीबोगरीब सूची। अब तक वोटर लिस्ट के संशोधन करते समय सभी लोगों से कुछ भी दस्तावेज नहीं मांगा जाता था। लेकिन अगर कोई नया नाम जुड़वाना चाहे तो उसे चुनाव आयोग का फॉर्म-6 भरना पड़ता था जिसके तहत उन चंद लोगों से सामान्यतः प्रचलित १२ दस्तावेज में से एक-दो मांगे जाते थे। लेकिन एसआईआर के आदेश में चुनाव आयोग ने उन पुरानी सूची में से ९ दस्तावेजों को ख़ारिज कर दिया और उसके बदले ८ नए दस्तावेज जोड़ कर ११ दस्तावेजों की एक नई सूची बनायी जो एसआईआर के तहत मान्य होंगे।</p>
<p>अजीब बात यह थी कि जो दस्तावेज लोगों के पास मिल सकते हैं उन्हें लिस्ट से निकाल दिया गया और जो बहुत कम लोगों के पास हैं उन्हें लिस्ट में जोड़ दिया गया। नीचे दिए गए सभी आंकड़े बिहार में १८ से ४० वर्ष के आयु समूह के बारे में आधिकारिक स्रोतों से लिए गए हैं। पुरानी लिस्ट से तीन दस्तावेज नई लिस्ट में शामिल किए गए: पासपोर्ट (बिहार में ५% से कम वयस्क व्यक्तियों के पास है), जन्म प्रमाण पत्र (२% से कम) और मैट्रिक या अन्य डिग्री (लगभग ४३%) के प्रमाणपत्र। लिस्ट में जो नए दस्तावेज जोड़े गए उनकी बानगी देखिए: राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (बिहार में है ही नहीं), सरकारी नौकरी का पहचान पत्र (१%), वनाधिकार पट्टा (नगण्य) स्थायी निवास पत्र (बिहार में जारी नहीं होता), जाति प्रमाण पत्र (१५-२०%), ज़मीन/मकान आवंटन पत्र (१%) आदि।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000"><strong>बिहार के डेढ़ से दो करोड़ लोगों के पास इनमे से कोई काग़ज़ नहीं है। अब कुछ उन दस्तावेजों पर गौर कीजिए जिन्हें अब तक चुनाव आयोग स्वीकार करता रहा है, आज भी बाक़ी देश में मान्य करता है, लेकिन जिन्हें एसआईआर की लिस्ट से निकाल दिया गया: बैंक पासबुक (७८%), पैन कार्ड (५६%) मनरेगा जॉब कार्ड (३४%) ड्राइविंग लाइसेंस (८%) और पाँच साल पहले तक मान्य राशन कार्ड (६४%) जैसे दस्तावेज।</strong></span></p></blockquote>
<p>आधार कार्ड इन ग़ायब दस्तावेजों की सूची में सबसे महत्वपूर्ण है।अब तक चुनाव आयोग हर नए वोटर से आधार कार्ड माँगता रहा है, लेकिन एसआईआर के दस्तावेजों की सूची से यह गायब है। यह एक आश्चर्यजनक फ़ैसला था चूंकि आधार कार्ड वो एकमात्र दस्तावेज है जिसको वोटर लिस्ट के लिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम १९५० की धारा २३(४) के तहत क़ानूनी मान्यता है।</p>
<p>आधार उन चंद दस्तावेजों में है जो नाम, आयु, माँ-पिता के नाम, फ़ोटो और निवास को प्रमाणित करता है। पासपोर्ट को छोड़ कर और किसी दस्तावेज की प्रमाणिकता इतनी व्यापक नहीं है। और सबसे बड़ी विशेषता यह कि आधार कार्ड लगभग सर्वव्यापी (बिहार की जनसंख्या में ८८%, लेकिन वयस्क लोगों में लगभग १००%) है। इसलिए सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की सैद्धांतिक लड़ाई व्यवहार में आधार कार्ड को मान्य करने के सवाल पर लड़ी गई। चूंकि आधार कार्ड को मान्य करने का मतलब था कमोबेश प्रत्येक वयस्क निवासी को मताधिकार प्रदान करना।</p>
<p>इसीलिए वोटबंदी के पैरोकार आधार कार्ड को ना मानने पर अड़े हुए थे। चुनाव आयोग ने तर्क दिया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है। लेकिन इस संदर्भ में यह कानूनी तथ्य अप्रासंगिक था चूंकि वोटर लिस्ट के लिए उसकी जरूरत नहीं है। वैसे भी चुनाव आयोग द्वारा मान्य अधिकांश दस्तावेज नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं। जो सरकार दिन-रात हर योजना को आधार कार्ड से जोड़ रही है, उसी के प्रवक्ता अब आधार के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार में जुट गए। कहा गया कि बिहार के कुछ जिलों में आबादी की तुलना में १४०% आधार कार्ड हैं।</p>
<p>इशारा मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल के जिलों पर था। यह सफ़ेद झूठ था, चूँकि यह गिनती करने वालों ने आबादी के आंकड़े २०११ से उठाए थे और आधार कार्ड के आंकड़े २०२५ से! इस ऊट-पटाँग गिनती के हिसाब से तो कुछ जिले ही नहीं पूरे बिहार और देश का आंकड़ा १००% के ऊपर होगा। यह कहा गया कि जाली आधार कार्ड बनाना आसान है, बिना यह पूछे कि इसे ठीक करने की जिम्मेदारी किसकी है। इस तथ्य को भी दबा दिया गया कि चुनाव आयोग द्वारा मान्य निवास प्रमाण पत्र तो पिछले महीने एक कुत्ते और ट्रेक्टर के नाम पर भी जारी हो चुका था। बताया गया कि आधार कार्ड तो विदेशियों और भारतीय मूल के ग़ैर नागरिकों का भी बन सकता है, लेकिन इस बात को छुपा लिया गया कि ग़ैर भारतीय लोगों के आधार कार्ड सामान्य से अलग होते हैं चूंकि उनकी एक समय सीमा बंधी होती है।</p>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000">फिर भी सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग येन-केन-प्रकारेण आधार को ना मानने पर अड़ा रहा। अदालत ने पहले शराफ़त से सुझाव दिया, फिर इशारा किया, फिर केवल काटे हुए नामों के बारे में सीमित आदेश दिया। लेकिन चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का भी मान नहीं रखा। बल्कि आधार को स्वीकार करने वाले कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की। ऐसे में अदालत के पास यह स्पष्ट आदेश देने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा था कि आधार कार्ड को भी अन्य ११ दस्तावेजों की तरह १२ वाँ दस्तावेज माना जाएगा। </span></strong></p></blockquote>
<p>ज़ाहिर है अदालत ने इसकी इजाज़त दी है कि अन्य कागजों की तरह आधार कार्ड की प्रमाणिकता की भी जांच की जा सकेगी। अब आशा करनी चाहिए की चुनाव आयोग अदालत के आदेश को उसकी भावना के अनुरूप बिहार में लागू करेगा और उसका सम्मान करते हुए शेष भारत में एसआईआर लागू करते समय शुरू से ही आधार को वांछित दस्तावेजों की सूची में शामिल कर देगा। अगर चुनाव आयोग अब भी आना-कानी करता है तो उससे यह संदेह गहरा होगा कि चुनाव आयोग वोट काटने के राजनीतिक षड्यंत्र में शामिल है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>दिल्ली में फिर तैयारी है ट्रैक्टर रैली की</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/tractor-rally-is-again-in-delhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Jun 2021 09:30:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[किसान आन्दोलन]]></category>
		<category><![CDATA[कृषि क़ानून]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ ब्यूरो नई दिल्ली. किसान बिना बताये दिल्ली जायेंगे. दिल्ली में फिर निकालेंगे ट्रैक्टर रैली. गुरुवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान ट्रैक्टर यात्रा निकालकर बाकायदा रिहर्सल कर लिया है. किसानों का आन्दोलन एमएसपी पर क़ानून बनाए जाने तक जारी रहेगा. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत को उम्मीद है कि सरकार किसानों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ ब्यूरो</strong></span></p>
<p><strong>नई दिल्ली.</strong> किसान बिना बताये दिल्ली जायेंगे. दिल्ली में फिर निकालेंगे ट्रैक्टर रैली. गुरुवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान ट्रैक्टर यात्रा निकालकर बाकायदा रिहर्सल कर लिया है. किसानों का आन्दोलन एमएसपी पर क़ानून बनाए जाने तक जारी रहेगा. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत को उम्मीद है कि सरकार किसानों से बात करेगी.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-226272 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/traiktar.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/traiktar.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/06/traiktar-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>कृषि कानूनों के खिलाफ सात महीने से दिल्ली बार्डर पर आन्दोलन कर रहे किसानों ने आन्दोलन में तेज़ी लाने के लिए ही ट्रैक्टर यात्रा का फैसला लिया. ट्रैक्टर पर सवार होकर किसान सहारनपुर से मुज़फ्फरनगर पहुंचे. मुज़फ्फरनगर में इस यात्रा में स्थानीय किसान भी अपने ट्रैक्टरों और कारों के साथ शामिल हो गए और मेरठ के लिए रवाना हो गए. मेरठ में रात्रि विश्राम के बाद आज शुक्रवार की सुबह हज़ारों की तादाद में किसान गाजीपुर बार्डर के लिए रवाना हो चुके हैं. हालत यह है कि दिल्ली मार्ग पर सिर्फ किसान और ट्रैक्टर ही नज़र आ रहे हैं.</strong></span></p></blockquote>
<p>किसान नेता योगेन्द्र यादव ने केन्द्र सरकार को चेताया है कि वह जितना देर करेगी उसे उतना ही महंगा पड़ेगा. उन्होंने कहा कि देश में खेती बचेगी तभी लोकतंत्र भी बचेगा. योगेन्द्र यादव ने कहा कि इस देश में 26 जून को इमरजेंसी लगी थी और इत्तफाक से 26 जून को ही किसान आन्दोलन को सात महीने पूरे हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि 26 जून को देश भर में किसान सरकार को जगाने का काम करेंगे. 26 जून को सभी राज्यों के राज्यपालों को राष्ट्रपति के नाम पत्र सौंपे जायेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार घमंड में है. उसे लग रहा है कि वह किसानों को थका कर उनके आन्दोलन को तोड़ देगी लेकिन सच बात यह है कि सरकार ग़लतफ़हमी में है. सरकार के मंसूबे किसी भी सूरत में कामयाब नहीं होंगे. सरकार पहले भी किसानों के आन्दोलन को नहीं तोड़ पाई और आगे भी किसानों को झुका नहीं पायेगी.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/kolkata-got-the-most-benefit-of-the-lockdown-know-how/">लॉकडाउन का सबसे ज्यादा फायदा कोलकाता को मिला जानिए कैसे</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/reliance-has-prepared-5g-phone-will-be-handed-over-to-the-market-on-this-occasion/">रिलायंस ने तैयार किया 5 जी फोन, इस मौके पर होगा बाज़ार के हवाले</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/whom-did-yogi-accept-chanakya/">योगी ने किसे मान लिया चाणक्य ?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/arto-rajeshwar-yadav-suspended-in-mukhtar-ansari-ambulance-case/">मुख़्तार अंसारी एम्बुलेंस कांड में एआरटीओ राजेश्वर यादव सस्पेंड</a></strong></span></p>
<p>योगेन्द्र यादव ने कहा कि किसानों का आन्दोलन चलते हुए सात महीने हो चुके हैं. किसी भी राजनीतिक दल की औकात नहीं है जो इतने दिनों तक कोई आन्दोलन चला सके, उन्होंने कहा कि आन्दोलन स्थल के आसपास रहने वालों को ज़रूर दिक्कत हो रही है जिसके लिए हम माफी चाहते हैं.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>उत्तर प्रदेश में सरकार ने क्यों लगाई धारा 144?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/why-did-the-government-put-section-144-in-up/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Mar 2021 03:58:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[किसान आंदोलन]]></category>
		<category><![CDATA[किसान आंदोलन की वजह से यूपी में लगाई गई धारा 144]]></category>
		<category><![CDATA[किसान महापंचायत]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली पोस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[बीजेपी]]></category>
		<category><![CDATA[योगी आदित्यनाथ]]></category>
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		<category><![CDATA[हिंदी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[हिंदी समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क दिल्ली की सीमा पर पिछले तीन माह से चल रहे किसान आंदोलन की आग अब देश के अगल-अलग राज्यों में पहुंचने लगा है। किसान नेता लगातार देश के राज्यों में दौरा कर रहे हैं और आंदोलन को धार देने की अपील कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भी किसान आंदोलन की संभावनाओं &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>दिल्ली की सीमा पर पिछले तीन माह से चल रहे किसान आंदोलन की आग अब देश के अगल-अलग राज्यों में पहुंचने लगा है। किसान नेता लगातार देश के राज्यों में दौरा कर रहे हैं और आंदोलन को धार देने की अपील कर रहे हैं।</p>
<p>उत्तर प्रदेश में भी किसान आंदोलन की संभावनाओं को देखते हुए योगी सरकार ने 5 अप्रैल तक के लिए लखनऊ में धारा 144 लागू कर दिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहले से ही किसानों का आंदोलन चल रहा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-200007" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/kisan-aandolan.jpg" alt="" width="836" height="627" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/kisan-aandolan.jpg 720w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/12/kisan-aandolan-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 836px) 100vw, 836px" /></p>
<p>सरकार द्वारा जारी आदेश में लिखा गया है कि विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के द्वारा किसान आंदोलन आयोजित किया जा सकता है, जिससे शांति व्यवस्था भंग हो सकती है। इसलिए लखनऊ प्रमंडल में धारा लगायी जा रही है।</p>
<h4><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/how-much-will-congress-benefit-from-priyankas-tour-of-assam/">प्रियंका के असम दौरे से कांग्रेस को कितना होगा फायदा</a></strong></span></h4>
<h4><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/stop-the-business-blow-the-stove-eat-the-jumle/">‘व्यवसाय बंद कर दो, चूल्हा फूंकों, जुमले खाओ!’</a></strong></span></h4>
<h4><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/bjp-mlas-allegation-said-nehru-involved-in-chandrashekhars-murder/">भाजपा विधायक का आरोप, कहा-चंद्रशेखर की हत्या में शाामिल थे नेहरू</a></strong></span></h4>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p dir="ltr" lang="en">Section 144 imposed in Lucknow with immediate effect till 5th April to maintain law and order situation in the Commissionerate. <a href="https://t.co/H6BupP7B6Z">pic.twitter.com/H6BupP7B6Z</a></p>
<p>— ANI UP (@ANINewsUP) <a href="https://twitter.com/ANINewsUP/status/1366428935597092864?ref_src=twsrc%5Etfw">March 1, 2021</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>उत्तर प्रदेश में कई जिलों में पिछले कई दिनों से अलग-अलग राजनीतिक दलों के द्वारा किसान महापंचायत का आयोजन भी किया जा रहा है। इन महापंचायतों में भारी भीड़ उमड़ रही है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-208359" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/kisan-gajipur-1.jpg" alt="" width="918" height="488" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/kisan-gajipur-1.jpg 660w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/kisan-gajipur-1-300x160.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/01/kisan-gajipur-1-310x165.jpg 310w" sizes="auto, (max-width: 918px) 100vw, 918px" /></p>
<p>किसान आंदोलन को लेकर योगी आदित्यनाथ पहले से ही कई नेताओं पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं। पिछले दिनों एक चैनल पर बातचीत के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि क्या योगेन्द्र यादव और हन्नान मोल्लाह किसान हैं। ये लोग आंदोलनजीवी हैं, परजीवी हैं और विघटनकारी गतिविधियों की अगुवाई करते हैं।</p>
<h4><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/cm-amarinder-singh-says-prashant-kishor-has-joined-him-as-principal-advisor/">महज एक रुपये की सैलरी पर प्रशांत किशोर ने मिलाया कांग्रेस से हाथ</a></strong></span></h4>
<h4><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/ajay-lallu-showed-the-mirror-to-the-government/">अजय लल्लू ने सरकार को दिखाया आईना</a></strong></span></h4>
<h4><span style="color: #800000;"><strong>ये भी पढ़े :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/this-is-how-cm-yogi-made-the-first-day-of-school-memorable/">CM योगी ने ऐसे बना दिया स्कूल का पहला दिन यादगार</a></strong></span></h4>
<p>साथ ही योगी ने कहा था कि किसानों की मेहनत पर जीवित रहने वाले लोग या विदेशी जूठन पर जीवित रहने वाले लोग ही किसानों को गुमराह कर रहे हैं। ये लोग किसानों के साथ अपराध कर रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>CAA विरोध : योगेन्द्र यादव, रामचन्द्र गुहा सहित कई लोग हिरासत में</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/detention-in-citizenship-amendment-act/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Dec 2019 10:18:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[CAA विरोध]]></category>
		<category><![CDATA[Citizenship Amendment Act]]></category>
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		<category><![CDATA[रामचन्द्र गुहा]]></category>
		<category><![CDATA[हिरासत]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज़ डेस्क केंद्र सरकार के द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ आज पूरे देश से प्रदर्शन हो रहा है। इसी बीच आज लेफ्ट ने भबुलाया है। गुरुवार सुबह ही बिहार के कुछ इलाकों में लेफ्ट कार्यकर्ताओं ने ट्रेन को रोक दिया। बिहार के दरभंगा में नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-142599 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/guhayadav-1.jpg" alt="" width="829" height="461" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/guhayadav-1.jpg 759w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/guhayadav-1-300x167.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 829px) 100vw, 829px" /></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>जुबिली न्यूज़ डेस्क</strong></span></p>
<p>केंद्र सरकार के द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ आज पूरे देश से प्रदर्शन हो रहा है। इसी बीच आज लेफ्ट ने भबुलाया है। गुरुवार सुबह ही बिहार के कुछ इलाकों में लेफ्ट कार्यकर्ताओं ने ट्रेन को रोक दिया।</p>
<p>बिहार के दरभंगा में नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान लेफ्ट पार्टियों ने ट्रेन रोक दी है। पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनों का दौर जारी है। इसको ध्यान में रखकर कर्नाटक, उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान मंडी हाउस पर हिरासत में ले लिया गया। इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा को बेंगलुरु में गिरफ्तार किया गया। स्वराज इंडिया के संयोजक योगेंद्र यादव को लाल किले पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। </strong></span></p></blockquote>
<p>नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए योगेंद्र यादव लाल किले पर पहुंचे थे। स्वराज इंडिया समेत कुल 60 संगठन लालकिले से अपने प्रदर्शन की शुरुआत कर दिया है।</p>
<p>वहीं टाउन हॉल में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी के खिलाफ प्रदर्शन करने को लेकर प्रख्यात इतिहासकार रामचन्द्र गुहा सहित अन्य लोगों को पुलिस ने धारा 144 का उल्लंघन करने के आरोप में गुरुवार को हिरासत में लिया।</p>
<p>लेकिन पुलिस वाले उनको शहीद पार्क तक नहीं जाने दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने लालकिले इलाके में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। इस क्षेत्र में पुलिस ने धारा 144 लागू की हुई है।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करते हुए कहा है कि मेट्रो स्टेशन बंद हैं। इंटरनेट बंद है। हर जगह धारा144 है। किसी भी जगह आवाज उठाने की इजाजत नहीं है। जिन्होंने आज टैक्सपेयर्स का पैसा खर्च करके करोड़ों का विज्ञापन लोगों को समझाने के लिए निकाला है, वही लोग आज जनता की आवाज से इतना बौखलाएं हुए हैं कि सबकी आवाजें बंद कर रहे हैं।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/nand-kishore-gurjar-yogi-adityanath-government/">नंद किशोर प्रकरण से योगी सरकार को कोई खतरा नहीं</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/president-donald-trump-impeachment-pass-by-senate/">तो क्या खतरे में है ट्रंप की कुर्सी</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>आखिर क्यों परेशान है कश्मीर के सेब किसान</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/why-is-the-apple-farmer-of-kashmir-worried/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Nov 2019 09:59:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज डेस्क 5 अगस्त को जब केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 निष्प्रभावी किया और सुरक्षा कारणों से संचार पर प्रतिबंध लगाया था तो उस समय आंकलन किया गया था कि इससे कश्मीर के फल किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ेगा। और ऐसा हुआ भी। घाटी में बंदी की वजह से सबसे ज्यादा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-137906" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/apple-kashmeer.jpeg" alt="" width="1200" height="543" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/apple-kashmeer.jpeg 1200w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/apple-kashmeer-300x136.jpeg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/apple-kashmeer-1024x463.jpeg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/apple-kashmeer-768x348.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>5 अगस्त को जब केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 निष्प्रभावी किया और सुरक्षा कारणों से संचार पर प्रतिबंध लगाया था तो उस समय आंकलन किया गया था कि इससे कश्मीर के फल किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ेगा। और ऐसा हुआ भी।</p>
<p>घाटी में बंदी की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान सेब उत्पादकों को हुआ, क्योंकि संचार प्रतिबंधों की वजह से उत्पादकों, ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों के बीच संपर्क लगभग असंभव हो गया था। परिवहन पर प्रतिबंधों ने खरीद प्रक्रिया में भी बाधा उत्पन्न की। वहीं 19 नवंबर को लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान कश्मीर घाटी से सिर्फ 7,940 मिट्रिक टन सेब खरीदे हैं।</p>
<p>दरअसल यह आंकड़ा कश्मीर के सेब उत्पादन का एक फीसदी से भी कम है। गौरतलब है कि कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में औसतन सेब का उत्पादन औसतन 18 लाख मीट्रिक टन रहा है। वहीं साल 2018-19 में घाटी में सेब का उत्पादन 18.5 लाख मीट्रिक टन था।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-137907" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/kashmir-apple-letter.jpg" alt="" width="883" height="729" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/kashmir-apple-letter.jpg 883w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/kashmir-apple-letter-300x248.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/kashmir-apple-letter-768x634.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 883px) 100vw, 883px" /></p>
<p>दरअसल सेब उत्पादकों को सितंबर में घाटी में सेब की फसल शुरु होने के बाद संचार प्रतिबंधों और परिवहन नाकाबंदी के कारण अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की कि वह नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नैफेड) के माध्यम से उत्पादकों से सेब खरीदेगा।</p>
<p>उस समय यह अनुमान लगाया गया था कि केन्द्र सरकार घाटी से 13 लाख मीट्रिक टन सेब की खरीददारी करेगी। सरकार ने भी कहा था कि यह राशि सीधे उत्पादकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।</p>
<p>लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जो आंकड़ा रखा है उससे साफ है कि सरकार का प्रयास विफल हो गया। सरकार ने अपने लक्ष्य का एक फीसदी से भी कम और घाटी के कुल सेब उत्पादन का एक प्रतिशत से भी कम की खरीदारी की है।</p>
<p>वहीं इस मुद्दे पर स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने कहा, &#8216;यह एक बड़ी विफलता है। योजना शुरू से ही एक मजाक थी और अब सीजन ही खत्म हो गया है।&#8217;</p>
<p>मालूम हो योगेन्द्र यादव उस सात-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो एक सप्ताह पहले ही घाटी के सेब किसानों की स्थिति और उनके नुकसान का आंकलन करने के लिए जम्मू कश्मीर गया था।</p>
<p>अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले कश्मीर दौरे पर गए प्रतिनिधिमंडल में पूर्व सांसद राजू शेट्टी, सामाजिक वैज्ञानिक और राजनीतिज्ञ योगेंद्र यादव और किसान नेता वीएम सिंह शामिल थे।</p>
<p>यादव और उनकी टीम ने यह भी पाया था कि नाफेड ने घाटी में कुल सेब उत्पादन का एक फीसदी से भी कम की खरीददारी की है। प्रतिनिधिमंडल ने इसके लिए नाफेड के अनुभव और बुनियादी ढांचे की कमी का कारण बताया।</p>
<p>गौरतलब है कि सेब का व्यापार जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, जिसका वार्षिक कारोबार 8,000 करोड़ रुपये है। अनुमान के मुताबिक करीब 33 लाख से अधिक परिवार इस फल व्यापार पर निर्भर हैं।</p>
<p>पांच अगस्त के फैसले के बाद केंद्र द्वारा लगाए गए असाधारण प्रतिबंधों के कारण जम्मू कश्मीर की सेब अर्थव्यवस्था संकट में है।</p>
<p>योगेंद्र यादव की सात-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उत्पादकों और व्यापार संगठनों के साथ बातचीत के आधार पर बताया है कि इस साल घाटी के किसानों को कुल 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/no-religion-needs-to-be-afraid-of-nrc/">‘एनआरसी से किसी भी धर्म को डरने की जरूरत नहीं’</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/amu-professor-had-to-write-a-heavy-post-on-kashmir/">एएमयू की प्रोफेसर को कश्मीर पर पोस्ट लिखना पड़ा भारी</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong><span style="color: #ff0000;">यह भी पढ़ें : </span><a href="https://www.jubileepost.in/whats-cooking-between-ncp-and-bjp/"><span style="color: #ff0000;">एनसीपी और बीजेपी के बीच क्या खिचड़ी पक रही है</span></a></strong></span></p>
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