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	<title>यूनिटी कालेज Archives &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>यूनिटी कालेज का वार्षिक खेल-कूद : देखें-पूरा रिजल्ट</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/annual-sports-meet-of-unity-college-view-full-result/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Dec 2022 14:12:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[स्पोर्ट्स]]></category>
		<category><![CDATA[यूनिटी कालेज]]></category>
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					<description><![CDATA[शिक्षा के अधिकार के साथ खेलने का अधिकार भी आवश्यक: संजय सारस्वत कायम अब्बास, जैद, अयान,आरिफ, वफा व सानिया रही आकर्षण का केन्द्र यूनिटी कालेज का वार्षिक खेल-कूद दिवस सम्पन्न लखनऊ। हुसैनाबाद स्थित यूनिटी कालेज के वार्षिक खेल-कूद दिवस में शनिवार को कायम अब्बास जैदी 2 स्वर्ण सहित 5 पदक के अलावा मोहम्मद जैद, अयान, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><span style="color: #ff6600;"><strong>शिक्षा के अधिकार के साथ खेलने का अधिकार भी आवश्यक: संजय सारस्वत</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff6600;"><strong>कायम अब्बास, जैद, अयान,आरिफ, वफा व सानिया रही आकर्षण का केन्द्र</strong></span></li>
<li><span style="color: #ff6600;"><strong>यूनिटी कालेज का वार्षिक खेल-कूद दिवस सम्पन्न</strong></span></li>
</ul>
<p><span style="color: #800000;"><strong>लखनऊ।</strong></span> हुसैनाबाद स्थित यूनिटी कालेज के वार्षिक खेल-कूद दिवस में शनिवार को कायम अब्बास जैदी 2 स्वर्ण सहित 5 पदक के अलावा मोहम्मद जैद, अयान, आरिफ रिजवी, वफा अब्बास सानिया जहरा, डैनियल आग व इमरान जाफरी ने एथलेटिक्स की विभिन्न स्पर्धाओं में स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक जीतकर कालेज के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने।</p>
<p>इससे पूर्व वार्षिक खेल कूद दिवस का शुभारंभ मुख्य अतिथि भारतीय खेल प्राधिकरण क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक संजय सारस्वत ने किया। इस मौके पर हाकी ओलम्पियन व भारतीय हाकी टीम के पूर्व कप्तान दानिश मुजतबा ने मशाल प्रज्वलित करके स्पोर्ट्स कैप्टन को सौंपी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-268796" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/1-4-1024x702.jpg" alt="" width="618" height="424" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/1-4-1024x702.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/1-4-300x206.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/1-4-768x527.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/1-4-110x75.jpg 110w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/1-4.jpg 1193w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /></p>
<p>मुख्य अतिथि संजय सारस्वत ने अपने सम्बोधन में कहा कि जिस प्रकार भारत के हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है, उसी प्रकार देश के हर बच्चे को खेलने का भी अधिकार होना चाहिए। इसके लिए सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फिट इण्डिया की ओर से खेलकूद का प्रचार और प्रसार किया जा रहा है और देश की लाखों की संख्या में प्रतिभायें सामने निकल कर आ रही हैं।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff6600;"><strong>खेल दिवस के रंगारंग कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि डॉ संजय सारस्वत, विशिष्ट अतिथि भारतीय हाकी टीम के पूर्व कप्तान दानिश मुजतबा, मेजर ध्यानचंद के सुपुत्र और अंतर्राष्ट्रीय हाकी खिलाड़ी देवेन्द्र ध्यानचंद, उप्र नान ओलम्पिक एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय दीप सिंह (रिटायर्ड आईएएस ) एवं महासचिव एके सक्सेना ने पधार कर इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुए कालेज के विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरित किये।</strong></span></p></blockquote>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-268797" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/2-1-1024x632.jpg" alt="" width="618" height="381" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/2-1-1024x632.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/2-1-300x185.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/2-1-768x474.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/2-1.jpg 1322w" sizes="auto, (max-width: 618px) 100vw, 618px" /></p>
<p>कार्यक्रम के समापन पर कालेज के सचिव नजमुल हसन रिजवी ने कालेज की ओर से शिक्षा के अतिरिक्त विभिन्न परम्परागत और गैर परम्परागत खेलों में सक्रिय भागीदारी का उल्लेख किया और अतिथियों का इस रंगारंग कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने की लिए धन्यवाद् किया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-large wp-image-268798" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/12/Screenshot-2022-12-03-194028-1024x631.jpg" alt="" width="618" height="381" /></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>खेल दिवस के परिणाम इस प्रकार हैं</strong> </span></p>
<ul>
<li>सीनियर ब्वायज 100 मीटर दौड़ :- कायम अब्बास जैदी (प्रथम), जैद सिद्दीकी (द्वितीय), लारैब अब्बास</li>
<li>(तृतीय),सीनियर ब्वायज डिस्कस थ्रो :- कायम अब्बास जैदी (प्रथम), जीशान (द्वितीय), सैफ अली (तृतीय)</li>
<li>सीनियर ब्वायज शॉटपुट :- सैफ अली (प्रथम), कायम अब्बास जैदी (द्वितीय), युसूफ अब्बास (तृतीय)</li>
<li>सीनियर ब्वायज 800 मीटर :- मोहम्मद जैद (प्रथम), मोहम्मद लारैब (द्वितीय), कायम अब्बास (तृतीय)</li>
<li>सीनियर ब्वायज 400 मीटर दौड़ :- मोहम्मद जैद (प्रथम), कायम अब्बास जैदी, (द्वितीय), मोहम्मद लारैब (तृतीय)</li>
<li>सीनियर ब्वायज लॉग जम्प :- वफा अब्बस (प्रथम),मोहम्मद जैद (द्वितीय), मोहम्मद लारैब (तृतीय)</li>
<li>सीनियर ब्वायज 1500 मीटर दौड़ : &#8211; मोहम्मद जैद (प्रथम), मोहम्मद लारैब (द्वितीय), नफीस रजा (तृतीय)</li>
<li>सीनियर गर्ल्स लांग जंप :- आफी रिजवी (प्रथम), इन्नमा जाफरी (द्वितीय), किसा फातिमा (तृतीय)</li>
<li>सीनियर गर्ल्स:शॉट पुट :- सानिया जहरा (प्रथम),अर्याी खान (द्वितीय), शिप्ऊा फातिमा (तृतीय)</li>
<li>जूनियर ब्वायज लॉग जम्प :- डैनियल आगा (प्रथम),मोहम्मद समीर (द्वितीय), अयान हैदर (तृतीय)</li>
<li>जूनियर ब्वायज शॉटपुट :- डैनियल आगा (प्रथम),मोहम्मद अमान (द्वितीय), मोहम्मद समीर (तृतीय)जूनियर</li>
<li>गर्ल्स 800 मीटर दौड़ :- दृष्टि शर्मा (प्रथम), जैनब फातिमा (द्वितीय), अरीबा फातिमा (तृतीय)सीनियर गर्ल्स</li>
<li>डिस्कस थ्रो :- सानिया जहरा (प्रथम), मरियम बाकर (द्वितीय), शिफा फातिमा (तृतीय)</li>
<li>जूनियर ब्वायज 800 मीटर दौड़ :- अयान हैदर (प्रथम), एच मेंहदी (द्वितीय), मोहम्मद समीर (तृतीय)</li>
<li>4 गुणो 100 मीटर रिले गर्ल्स :- सानिया जहरा, अर्शी खान,किसा फातिमा, मुनजरा फातिमा (प्रथम), सर सैयद</li>
<li>हाउस, शिफा फातिमा, सबीका, मरियम जाफरी, मरियम बाकर (द्वितीय) टैगोर हाउस, आफी रिजवी, तुबा</li>
<li>फातिमा, महविश फातिमा, इन्नमा जाफरी (तृतीय) गांधी हाउस।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>डंके की चोट पर : इसे मैंने आखिर लिख क्यों दिया?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/why-did-i-write-this/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Aug 2021 11:32:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली डिबेट]]></category>
		<category><![CDATA[अखिलेश यादव]]></category>
		<category><![CDATA[आईपीएस नवनीत सिकेरा]]></category>
		<category><![CDATA[आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड]]></category>
		<category><![CDATA[इंजीनियरिंग]]></category>
		<category><![CDATA[इरा मेडिकल कालेज]]></category>
		<category><![CDATA[डंके की चोट पर]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. कल्बे सादिक]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम अफ्रीका]]></category>
		<category><![CDATA[फुटबाल खिलाड़ी]]></category>
		<category><![CDATA[मेडिकल]]></category>
		<category><![CDATA[मोहर्रम]]></category>
		<category><![CDATA[यूनिटी कालेज]]></category>
		<category><![CDATA[शबाहत हुसैन विजेता]]></category>
		<category><![CDATA[सलीम खान]]></category>
		<category><![CDATA[सलीम-जावेद]]></category>
		<category><![CDATA[सादियो माने सेनेगल]]></category>
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					<description><![CDATA[शबाहत हुसैन विजेता पश्चिम अफ्रीका के एक फुटबाल खिलाड़ी हैं सादियो माने सेनेगल. 27 साल का यह खिलाड़ी छह करोड़ रुपये महीना कमाता है. एक प्रेस कांफ्रेंस में उनके मोबाइल के टूटे हुए स्क्रीन को देखकर एक पत्रकार ने सवाल किया कि आप टूटा हुआ मोबाइल लेकर घूम रहे हैं. सेनेगल ने कहा कि इसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-87885 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/Shabahat-Husain-Vijeta-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" />शबाहत हुसैन विजेता</strong></span></p>
<p>पश्चिम अफ्रीका के एक फुटबाल खिलाड़ी हैं सादियो माने सेनेगल. 27 साल का यह खिलाड़ी छह करोड़ रुपये महीना कमाता है. एक प्रेस कांफ्रेंस में उनके मोबाइल के टूटे हुए स्क्रीन को देखकर एक पत्रकार ने सवाल किया कि आप टूटा हुआ मोबाइल लेकर घूम रहे हैं. सेनेगल ने कहा कि इसे बनवाने का वक्त ही नहीं मिला. पहली फुर्सत में यही काम करुंगा. पत्रकार ने पूछा कि नया मोबाइल क्यों नहीं खरीद लेते तो उन्होंने कहा कि ऐसे एक हज़ार मोबाइल फोन इसी वक्त खरीद सकता हूँ. मैं चाहूँ तो दो जेट प्लेन खरीद लूं, मैं चाहूँ तो दस फरारी गाड़ियाँ खरीद लूं, चाहूँ तो डायमंड की घड़ियां पहनूं लेकिन मुझे आखिर यह सब क्यों चाहिए?</p>
<p>एक उंगली से अपनी आँखों में उतर आयी नमी को पोछते हुए सेनेगल ने कहा कि गरीबी की वजह से मैं पढ़ नहीं पाया. यही वजह है कि जब पैसा होता है तो स्कूल खोल देता हूँ. मैं ढेर सारे स्कूल खोल चुका हूँ ताकि मेरे जैसे किसी गरीब को यह तकलीफ न हो कि गरीबी की वजह से पढ़ नहीं पाया. मैं फ़ुटबाल खेलता था लेकिन मेरे पाँव में जूते नहीं थे. खेलते वक्त रोजाना चोट लगती थी मगर जूते खरीद नहीं सकता था. मेरे पास अच्छे कपड़े नहीं थे, अच्छा खाना नहीं था. आज मेरे पास पैसे हैं तो मैं अपनी कमाई लोगों में बांटना चाहता हूँ.</p>
<p>आईपीएस नवनीत सिकेरा से सेनेगल के बारे में यह जानकारी मिली तो सहसा यकीन नहीं हुआ कि इस दुनिया में आज भी ऐसे लोग हैं.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-230262 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/sadio-mane.jpg" alt="" width="640" height="405" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/sadio-mane.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/sadio-mane-300x190.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वाइस प्रेसीडेंट थे मौलाना डॉ. कल्बे सादिक. धार्मिक व्याख्यान के लिए डॉ. कल्बे सादिक दुनिया भर में घूमते थे. मोहर्रम के सवा दो महीने वह अमेरिका और ब्रिटेन में ही रहते थे. यह दोनों देश धार्मिक व्याख्यान के एवज़ में उन्हें खूब पैसा देते थे. उन्होंने बेशुमार पैसा कमाया लेकिन मामूली सा कुर्ता पैजामा और शेरवानी ही उनकी पोशाक बनी रही. विदेशों में उन्होंने ऐसे लोग भी तलाश किये जो एजूकेशन और मेडिकल फैसीलिटीज़ को बेहतर बनाने के लिए पैसा खर्च करते हैं. मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ऐसे लोगों के सम्पर्क में आ गए और इसके बाद पैसों की बारिश शुरू हो गई. उनके एकाउंट में बेशुमार पैसा आने लगा लेकिन उनके रहन-सहन में कोई फर्क नहीं आया.</p>
<p>पुराने लखनऊ में मोहर्रम के दौरान अक्सर दंगे हुआ करते थे. इन दंगों में माल का भी नुक्सान होता था और जान का भी लेकिन मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने इन दंगों को लेकर कभी सियासत नहीं की. उनका कहना था कि दंगा जाहिल लोग करते हैं. पढ़े-लिखे लोगों के पास इस तरह के काम के लिए फुर्सत ही नहीं होती. मौलाना ने पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद में यूनिटी कालेज शुरू किया. यूनिटी कालेज को दो शिफ्ट में चलाया जाता है. पहली शिफ्ट में वह बच्चे पढ़ते हैं जिनके माँ-बाप के पास स्कूल की फीस देने के लिए पैसे हैं. दूसरी शिफ्ट में वह बच्चे पढ़ते हैं जिनके पास फीस के पैसे नहीं हैं.</p>
<p>इस स्कूल में एडमिशन के लिए किसी वर्ग विशेष का होने की ज़रूरत नहीं है. माँ-बाप गरीब हैं तो बच्चे को यूनिटी स्कूल पढ़ायेगा. मौलाना डॉ. कल्बे सादिक का स्पष्ट कहना था कि एक पीढ़ी को पढ़कर निकलने में 20 साल का वक्त लगेगा. 20 साल के बाद दंगाई खत्म हो जाएंगे. मौलाना कल्बे सादिक ने यह काम कर दिखाया.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-230263 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/dr-kalbe-sadiq.jpg" alt="" width="578" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/dr-kalbe-sadiq.jpg 578w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/dr-kalbe-sadiq-300x249.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 578px) 100vw, 578px" /></p>
<p>स्कूल चलाने के अलावा मौलाना का एक और काम था. किसी गरीब बच्चे ने अगर इंजीनियरिंग या मेडिकल का इंट्रेंस इक्जाम पास कर लिया है लेकिन उसके पास फीस का पैसा नहीं है तो डॉ. कल्बे सादिक अपने स्टाफ से उसकी पूरी पड़ताल कराने के बाद जिस कालेज में एडमिशन होता था वहां सीधे फीस जमा करा देते थे. गरीब लड़कियों की शादी और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी मौलाना खुले हाथ से पैसा बांटते थे.</p>
<p>मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि कोई उन्हें क्या कहता है. हुकूमत किसी की भी हो लेकिन वह किसी के दरवाज़े पर कभी नहीं गए. जिस सियासी व्यक्ति को मुलाक़ात करनी हो वह उनके दरवाज़े पर आये. बीमारों को अच्छा इलाज दिलाने के लिए इरा मेडिकल कालेज (अब यूनिवर्सिटी) खोलने में उन्होंने काफी मदद की. अपनी रात-दिन की मेहनत के बदले में किसी ने भी उन्हें कोई सम्मान देना चाहा तो उन्होंने साफ़ इनकार कर दिया.</p>
<blockquote><p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-104687 alignright" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/05/Danke-Chote-Par.jpg" alt="" width="150" height="150" /><span style="color: #ff0000;"><strong>अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने कई धर्मगुरुओं को अपने आवास पर बुलाकर सम्मानित किया था. उस लिस्ट में डॉ. कल्बे सादिक का नाम भी था. उनका नम्बर आया तो वह उठकर गए लेकिन सम्मान लेने से पहले दो मिनट बोलने की इजाजत माँगी. उन्होंने कहा कि मैं दंगों को खत्म करना चाहता हूँ जो सिर्फ शिक्षा के प्रसार से ही रुक सकते हैं. शिक्षा को बढ़ाने के लिए मैं रात-दिन मेहनत कर रहा हूँ. मैं बीमारों का मर्ज़ खत्म करना चाहता हूँ इसलिए मरीजों की ज़िन्दगी बचाने के लिए ज़रूरी मशीनें दुनिया के दूसरे देशों से लाकर मेडिकल कालेज में लगवा रहा हूँ. इन कामों के लिए अगर सम्मान देने के लिए सरकार सोच रही है तो यह काम अभी अधूरे हैं, अधूरे काम का कोई अवार्ड नहीं होता है.</strong></span></p></blockquote>
<p>मौलाना ने कहा कि अखिलेश यादव युवा हैं, मुख्यमंत्री हैं. जनता के लिए काम कर रहे हैं. अवार्ड तो उन्हें मिलना चाहिए. इसके बाद मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गले में अंगवस्त्रम डाला और ट्रे में रखा मोमेंटो उठाकर अखिलेश यादव को पकड़ा दिया. अवार्ड लेने के बाद अखिलेश ने झुककर डॉ. कल्बे सादिक के पैर छुए और कल्बे सादिक ने अखिलेश को गले से लगा लिया. डॉ. कल्बे सादिक ने जीते जी कोई अवार्ड नहीं लिया. भारत सरकार ने मरणोपरांत उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-230264 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/Salim-Khan.jpg" alt="" width="640" height="427" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/Salim-Khan.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/08/Salim-Khan-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p><span style="color: #000000;">फिल्मों की कहानियां लिखने वाली सलीम-जावेद की जोड़ी का नाम आपने ज़रूर सुना होगा. सलीम जावेद यानि सलीम खान और जावेद अख्तर. सलीम खान सलमान खान के पिता हैं. सलीम खान के दरवाज़े पर रोजाना सुबह गंभीर बीमारियों के मरीजों की लाइन लगती है. सलीम खान का एक असिस्टेंट दरवाज़े से बाहर निकलता है और सभी मरीजों से बात करते और उनकी परेशानियों को सुनते हुए उनके पर्चे लेता हुआ आगे बढ़ता जाता है.पर्चे जमा होने के बाद यह असिस्टेंट एक-एक पर्चा निकालता जाता है और सम्बंधित अस्पताल के डॉक्टर से बात करता जाता है. मरीज़ की बीमारी और इलाज के बारे में पूरी जानकारी जुटाने के बाद पूरी डीटेल बनाकर सलीम खान को दे देता है. कुछ घंटों बाद सलीम खान अपने असिस्टेंट के साथ घर से बाहर निकलते हैं और मरीजों की लाइन में उनके पास जा-जाकर उनके पर्चे के साथ-साथ सम्बन्धित अस्पताल में जमा होने वाली रकम का चेक बांटते चले जाते हैं.</span></p>
<p>पश्चिम अफ्रीका के फ़ुटबाल खिलाड़ी सेनेगल की दरियादिली की दास्तान सुनने के बाद अचानक से ज़ेहन में डॉ. कल्बे सादिक और सलीम खान के चेहरे उभरे. इन चेहरों के साथ हज़ारों सवालों ने भी सीधे से हमला बोल दिया.</p>
<p>ग़मों और उलझनों से भरी इस दुनिया में मोहब्बत की बारिश सिर्फ इसी वजह से नहीं होती क्योंकि सादियो माने सेनेगल सिर्फ एक है. डॉ. कल्बे सादिक जैसा कोई दूसरा नहीं है. सलीम खान जैसी दरियादिली मुम्बई में कोई और नहीं दिखाता है.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/that-girl-among-the-corpses-and/">डंके की चोट पर : लाशों के बीच वो लड़की और …</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/on-the-pretext-of-phoolan-devi/">डंके की चोट पर : फूलन देवी के बहाने से…</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/is-the-government-just-for-spectacle/">डंके की चोट पर : हुकूमत क्या सिर्फ तमाशा देखने के लिए है</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/let-us-leave-this-story-incomplete-today/">डंके की चोट पर : चलो हम आज ये किस्सा अधूरा छोड़ देते हैं</a></strong></span></p>
<p>पैसा बहुत मुश्किल से आता है. ज़िन्दगी की तमाम ज़रूरतों को पैसा ही पूरा करता है. जेबों में पैसा भरा हो तो ज़िन्दगी स्मूथली चलती है. मगर यह पैसा रहती सांस तक ही साथ रहता है. सांस की डोर टूटते ही पैसा किसी काम का नहीं रह जाता है. पैसा इस दुनिया से उस दुनिया में नहीं जाता. पैसा इहलोक में तो काम आता है मगर परलोक तक नहीं जा पाता. एक फ़ुटबाल खिलाड़ी, एक धर्मगुरु और एक पटकथा लेखक ने इस सच्चाई को समझ लिया तो ज़रूरतमंदों तक मदद पहुँचने लगी है. यही बात धन्ना सेठों, धर्म का व्यापार करने वालों और अन्य बड़े खिलाड़ियों की समझ में भी आ जाये तो यही ज़मीन जन्नत में बदल सकती है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>&#8230;और मुख्यमंत्री झुक गए डॉ. कल्बे सादिक के क़दमों में</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/ahh-dr-kalbe-sadiq-extinguished-ilms-lamp/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Nov 2020 10:08:04 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[कैंसर]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. कल्बे सादिक]]></category>
		<category><![CDATA[बेगम हजरत महल]]></category>
		<category><![CDATA[मजलिस]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[यूनिटी कालेज]]></category>
		<category><![CDATA[शिया सुन्नी इत्तेहाद]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दुस्तान]]></category>
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					<description><![CDATA[शबाहत हुसैन विजेता लखनऊ. आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष, यूनिटी कालेज और इरा मेडिकल कालेज के संस्थापक, शिया सुन्नी इत्तेहाद के पैरोकार, हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर और वक्त की पाबंदी की मिसाल शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक लाखों चाहने वालों की मौजूदगी में सुपुर-ए-ख़ाक कर दिए गए. प्रसिद्ध विद्वान मौलाना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>शबाहत हुसैन विजेता</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ.</strong> आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष, यूनिटी कालेज और इरा मेडिकल कालेज के संस्थापक, शिया सुन्नी इत्तेहाद के पैरोकार, हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल पक्षधर और वक्त की पाबंदी की मिसाल शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक लाखों चाहने वालों की मौजूदगी में सुपुर-ए-ख़ाक कर दिए गए.</p>
<p>प्रसिद्ध विद्वान मौलाना गजनफर अब्बास तूसी ने मौलाना कल्बे सादिक के न रहने की खबर सुनते ही कहा, “सादिक तुम्हारे मरने ने साबित यह कर दिया, आलिम की मौत वाकई आलम की मौत है”.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-198126 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/maulana-kalbe-saadik-2-1-300x251.jpg" alt="" width="580" height="485" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/maulana-kalbe-saadik-2-1-300x251.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/maulana-kalbe-saadik-2-1.jpg 574w" sizes="auto, (max-width: 580px) 100vw, 580px" /></p>
<p>मौलाना डॉ. कल्बे सादिक कैंसर का आपरेशन कराने के बाद पिछले करीब दो साल से लगातार इरा मेडिकल कालेज की डाक्टरों की निगरानी में थे. पिछले दिनों निमोनिया की शिकायत होने के बाद उनकी हालत बिगड़ती चली गई. उनकी किडनी ने साथ देना बंद कर दिया. उनकी तीन बार डायलेसिस की गई. वह वेंटीलेटर पर चले गए. हिन्दुस्तान ही नहीं दुनिया के कई देशों में उनके लिए दुआएं की गईं लेकिन 24 नवम्बर की रात मलिन बस्तियों में इल्म का चिराग रौशन करने वाला सूरज डूब गया.</p>
<p>मौलाना कल्बे सादिक हिन्दुस्तान में होने वाले दंगों के सख्त खिलाफ थे लेकिन वह यह भी नहीं चाहते थे कि इस मामले में लोगों को समझाया जाए. दंगाग्रस्त इलाकों में भी वह किसी को जागरूक करने के पक्ष में नहीं थे. उनका मानना था कि दंगा जाहिल लोग करते हैं, पढ़े-लिखे लोग अपने काम धंधों में ही इतना बिजी रहते हैं कि उनके पास दंगा-फसाद की फुर्सत ही नहीं होती.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-198127 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Kalbe-sadiq-Death-3-300x222.jpg" alt="" width="569" height="421" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Kalbe-sadiq-Death-3-300x222.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Kalbe-sadiq-Death-3.jpg 640w" sizes="auto, (max-width: 569px) 100vw, 569px" /></p>
<p>मौलाना कल्बे सादिक चाहते थे कि दंगा ग्रस्त इलाकों में स्कूल खोले जाएं. कोशिश की जाए कि हर घर का बच्चा स्कूल जाए और पढ़ाई करे. जिन माँ-बाप के पास पढ़ाने के लिए पैसा नहीं हो उनके बच्चो को मुफ्त शिक्षा दी जाए.</p>
<p>मौलाना कल्बे सादिक का कहना था कि जब हर घर में इल्म की रौशनी हो जायेगी तब दंगा-फसाद अपने आप रुक जाएगा. इसी सोच के साथ उन्होंने पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके में यूनिटी कालेज शुरू किया था. वह घंटाघर के सामने वाली ज़मीन पर लड़कियों के लिए बेगम हजरत महल के नाम पर डिग्री कालेज खोलना चाहते थे.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-198128 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Kalbe-sadiq-4-300x196.jpg" alt="" width="569" height="372" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Kalbe-sadiq-4-300x196.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Kalbe-sadiq-4.jpg 640w" sizes="auto, (max-width: 569px) 100vw, 569px" /></p>
<p>मौलाना का मानना था कि यूनिटी कालेज में एडमिशन लेने वाले पढ़ाई करने के बाद रोज़गार हासिल करने में करीब 20 साल लेंगे. यानी दंगा कम करने में 20 साल लगेंगे. वह कहते थे कि मैं 20 साल इंतज़ार करने को तैयार हूँ.</p>
<p>मौलाना कल्बे सादिक ने नई पीढ़ी को दो सबसे अहम बातें सिखाईं. पहली यह कि चाहे जिस हाल में पढ़ना पड़े लेकिन पढ़ाई करो और दूसरी बात थी कि वक्त के पाबन्द रहो. वक्त की पाबंदी उन्होंने लोगों को इस अंदाज़ में सिखाई कि लोग उनके दिए वक्त के हिसाब से काम करते थे.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-198129 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/kalbe-sadiq-5-300x196.jpg" alt="" width="563" height="368" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/kalbe-sadiq-5-300x196.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/kalbe-sadiq-5.jpg 640w" sizes="auto, (max-width: 563px) 100vw, 563px" /></p>
<p>लखनऊ के गोमतीनगर में एक बड़ा कार्यक्रम था. तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उसमें मुख्य अतिथि थे और डॉ. कल्बे सादिक को अध्यक्षता करनी थी. मौलाना कल्बे सादिक को शाम साढ़े पांच बजे बोलना था. मुख्यमंत्री कार्यक्रम में करीब पांच बजे पहुंचे. इसके बाद कार्यक्रम शुरू हुआ. ठीक साढ़े पांच बजे कल्बे सादिक अपनी जगह से उठे और डायस पर पहुँच गए. उन्होंने कहा कि माफी चाहता हूँ कि बीच प्रोग्राम में बगैर बुलाये माइक पर आ गया हूँ. चीफ मिनिस्टर अभी अच्छी-अच्छी बातें बताएँगे लेकिन अफ़सोस की बात है कि अपने पूर्व निर्धारित दूसरे प्रोग्राम की वजह से मैं उन्हें सुन नहीं पाऊंगा. उन्होंने कहा कि दो मिनट में अपनी बात कहकर मैं चला जाऊंगा. प्रोग्राम पहले की तरह से चलता रहेगा.</p>
<p><a href="https://www.facebook.com/kalbe.sibtain/videos/789106571636799/">https://www.facebook.com/kalbe.sibtain/videos/789106571636799/</a></p>
<p>एक और वाक्या याद आता है. मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर कई धर्मगुरु बुलाये गए थे. सबका सम्मान किया जाना था. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों कई धर्मगुरु सम्मानित किये गए. मौलाना कल्बे सादिक को भी सम्मान के लिए बुलाया गया. कल्बे सादिक ने सम्मान लेने से पहले एक मिनट बोलने को कहा और माइक पर पहुँच गए.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-198130 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/kalbe-sadiq-6-300x245.jpg" alt="" width="572" height="467" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/kalbe-sadiq-6-300x245.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/kalbe-sadiq-6.jpg 587w" sizes="auto, (max-width: 572px) 100vw, 572px" /></p>
<p>डॉ. कल्बे सादिक ने कहा कि मैं समाज में इल्म की रौशनी फैलाना चाहता हूँ. मैं समाज को यह सिखाना चाहता हूँ कि मानव धर्म सबसे बड़ा धर्म है. मैं अपने मिशन में लगा हूँ. हज़ारों बच्चो को पढ़ाने में लगा हूँ. मेरा मिशन अभी अधूरा है ऐसे में मेरा सम्मान क्यों और कैसे हो सकता है. हां अखिलेश यादव युवा मुख्यमंत्री हैं. उन्होंने अपनी सरकार में विकास के बहुत से काम किये हैं इसलिए मुझे लगता है कि सम्मान मेरा नहीं अखिलेश यादव का होना चाहिए. वह माइक छोड़कर आये और ट्रे में रखी शाल उठाकर अखिलेश यादव के गले में दाल दी और मोमेंटो अखिलेश यादव को सौंप दिया. हतप्रभ से खड़े अखिलेश मौलाना कल्बे सादिक के क़दमों में झुक गए और मौलाना ने उन्हें गले से लगा लिया.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-198136 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/K.Sadiq-with-akhilesh-300x165.jpg" alt="" width="573" height="315" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/K.Sadiq-with-akhilesh-300x165.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/K.Sadiq-with-akhilesh.jpg 640w" sizes="auto, (max-width: 573px) 100vw, 573px" /></p>
<p>मौलाना कल्बे सादिक के बहुत से किस्से ज़ेहन में हैं. एक बार वह किसी दूसरे शहर में मजलिस पढने गए. उन्हें बताया गया था कि उन्हें दस बजे मजलिस पढ़नी है लेकिन वहां एलान हो रहा था कि मौलाना कल्बे सादिक सुबह आठ बजे से मजलिस को खिताब करेंगे.</p>
<p>मौलाना कल्बे सादिक ने पूछा कि जब मुझे दस बजे का वक्त दिया गया है तो फिर एलान आठ बजे का क्यों हो रहा है. मजलिस के संयोजक ने बताया कि जब आठ बजे का एलान होता है तो लोग दस बजे घर से निकलना शुरू करते हैं.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-198131 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Kalbe-Sadiq-Death-248x300.jpg" alt="" width="545" height="659" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Kalbe-Sadiq-Death-248x300.jpg 248w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Kalbe-Sadiq-Death.jpg 480w" sizes="auto, (max-width: 545px) 100vw, 545px" /></p>
<p>मौलाना कल्बे सादिक ने कहा कि अब तो मैं सुबह आठ बजे ही मजलिस पढूंगा. एक आदमी सुनने वाला होगा तो उसी से मुखातिब होऊंगा. उन्होंने मजलिस में पूछा कि ट्रेन और जहाज़ पकड़ने के लिए वक्त पर निकला जा सकता है. फिल्म देखने वक्त पर पहुंचा जा सकता है तो फिर यहाँ वक्त की पाबंदी क्यों नहीं, उनका कहना था कि वक्त का पाबन्द हुए बगैर तरक्की के रास्ते पर नहीं पहुंचा जा सकता.</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>मौलाना डॉ. कल्बे सादिक मेधावी बच्चो को सबसे ज्यादा प्यार करते थे. उन्होंने तौहीदुल मुस्लेमीन ट्रस्ट बनाया. इस ट्रस्ट के ज़रिये उन बच्चो की उच्च शिक्षा का इंतजाम किया जिन्होंने आईआईटी या सीपीएमटी परीक्षा पास कर ली है. पढ़ने वाले का वह धर्म नहीं परसेंटेज पूछते थे. जिन लड़कियों की शादी के लिए माँ-बाप के पास पैसे नहीं होते थे उनकी शादी का पूरा इंतजाम करते थे. बड़ी संख्या में इंजीनियर और डाक्टर उनके पैसों से पढ़कर यहाँ तक पहुंचे हैं.</strong></span></p></blockquote>
<p>मौलाना डॉ. कल्बे सादिक कई दशक तक अमेरिका और ब्रिटेन में मजलिसें पढ़ते रहे हैं. सवा दो महीने के मोहर्रम के दौरान वह उन देशों के स्कूल-कालेज और अस्पतालों का दौरा भी करते थे. वहां के एडवांस टेक्नालाजी को हिन्दुस्तान लेकर आते थे. धनवान लोगों को गरीब बच्चो की पढ़ाई में थोड़ा सा खर्च करने के लिए तैयार कर लेते थे.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/dr-kalbe-sadiq-dies-at-era-medical-college/">शिया धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक का लखनऊ में इंतकाल</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/see-the-health-bulletin-of-maulana-dr-kalbe-sadiq-know-the-condition-of-this-time/">देखिये मौलाना डॉ. कल्बे सादिक का हेल्थ बुलेटिन, जानिये इस इस वक्त का हाल</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/will-owaise-gave-a-tough-fight-to-mamata/">क्या वाकई बंगाल में ममता को चुनौती दे पाएंगे ओवैसी ?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/love-refuses-to-obey-such-a-law/">डंके की चोट पर : मोहब्बत ऐसे क़ानून को मानने से इनकार करती है</a></strong></span></p>
<p>आज कोशिशों का सूरज डूब गया है. इल्म का वह चिराग आज कमज़ोर हो गया है जिसमें वह अपनी मेहनत का खून पसीना दाल रहे थे. शिया-सुन्नी इत्तेहाद का पैकर आज खत्म हो गया है. हिन्दू-मुसलमान के बीच का जो पुल था वह अचानक से ढह गया है.</p>
<p>अपने पीछे वह स्कूल छोड़ गए हैं जो जाहिलों में इल्म की रौशनी बिखेरेंगे. वह मेडिकल कालेज छोड़ गए हैं जहाँ बीमारों के होटों पर खुशी लौटेगी. जब तक उनके बनाए स्कूल इल्म की रौशनी बिखेरते रहेंगे तब तक उनका मकसद भी जिंदा रहेगा. शायर ने कहा भी है, होठ थम जाने से पैगाम नहीं थम जाते, जिस्म की मौत कोई मौत नहीं होती है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>देखिये मौलाना डॉ. कल्बे सादिक  का हेल्थ बुलेटिन, जानिये इस इस वक्त का हाल</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/see-the-health-bulletin-of-maulana-dr-kalbe-sadiq-know-the-condition-of-this-time/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Nov 2020 11:38:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड]]></category>
		<category><![CDATA[इरा मेडिकल कालेज]]></category>
		<category><![CDATA[मौलाना डॉ. कल्बे सादिक]]></category>
		<category><![CDATA[यूनिटी कालेज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.jubileepost.in/?p=197051</guid>

					<description><![CDATA[प्रमुख संवाददाता लखनऊ. अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक इन दिनों गंभीर रूप से बीमार हैं. वह इरा मेडिकल कालेज के ICU में एडमिट हैं. चिकित्सकों ने उनकी हालत नाज़ुक बताई है. आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं मौलाना डॉ. कल्बे सादिक. मौलाना कल्बे सादिक को प्रगतिशील दृष्टि का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong>प्रमुख संवाददाता</strong></span></p>
<p><strong>लखनऊ.</strong> अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के शिया धर्मगुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक इन दिनों गंभीर रूप से बीमार हैं. वह इरा मेडिकल कालेज के ICU में एडमिट हैं. चिकित्सकों ने उनकी हालत नाज़ुक बताई है. आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं मौलाना डॉ. कल्बे सादिक.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-197052 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Dr-Kalbe-Sadiq-300x157.jpg" alt="" width="569" height="298" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Dr-Kalbe-Sadiq-300x157.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/Dr-Kalbe-Sadiq.jpg 640w" sizes="auto, (max-width: 569px) 100vw, 569px" /></p>
<p>मौलाना कल्बे सादिक को प्रगतिशील दृष्टि का माना जाता है. शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय काम किया है. लखनऊ के हुसैनाबाद इलाके में उन्होंने यूनिटी कालेज स्थापित किया है. यूनिटी कालेज दो शिफ्टों में चलता है. दूसरी शिफ्ट में चलने वाली क्लास में गरीब तबके के बच्चो को मुफ्त लेकिन क्वालिटी शिक्षा दी जाती है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-197053 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/ERA-231x300.jpg" alt="" width="536" height="696" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/ERA-231x300.jpg 231w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/11/ERA.jpg 480w" sizes="auto, (max-width: 536px) 100vw, 536px" /></p>
<p>मौलाना कल्बे सादिक ने तौहीदुल मुस्लेमीन ट्रस्ट की स्थापना की है. इस ट्रस्ट के ज़रिये मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने हज़ारों छात्रों की शिक्षा व्यवस्था की है. कमज़ोर तबके की लड़कियों की पढ़ाई और शिक्षा के क्षेत्र में मौलाना काफी पैसा खर्च करते हैं. इस ट्रस्ट के ज़रिये सभी धर्मों के ज़रूरतमंदों की शिक्षा, चिकित्सा और शादियों की व्यवस्था की जाती है.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/high-court-stamp-on-kejriwals-decision/">केजरीवाल के फैसले पर हाईकोर्ट की मोहर</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/akhilesh-said-a-big-attack-on-the-yogi-government/">अखिलेश ने योगी सरकार पर बोला बड़ा हमला</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/early-next-year-vaccine-to-fight-corona-will-come/">अगले साल के शुरुआती दौर में आ जायेगी कोरोना से लड़ने वाली वैक्सीन</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/namaste-trump/">डंके की चोट पर : नमस्ते ट्रम्प</a></strong></span></p>
<p>मौलाना डॉ. कल्बे सादिक समय के बहुत पाबंद हैं. वह अपना एक मिनट भी बर्बाद नहीं करते हैं. किसी भी मुद्दे पर उनकी राय बेबाक होती है. पिछले काफी समय से मौलाना डॉ. कल्बे सादिक कैंसर की समस्या से ग्रस्त हैं. उनका दिल्ली में आपरेशन भी हो चुका है.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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