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	<title>Jubilee Post &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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		<title>हाथरस से कैसे मजबूत हुआ कांग्रेस का पंजा ?</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/congress-became-stronger-after-hathras-issue/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Oct 2020 15:34:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अविनाश भदौरिया  कहते हैं एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है। लोग कही सुनी बातों को तो भूल जाते हैं लेकिन तस्वीरें मन मस्तिष्क में ऐसी छाप छोड़ती हैं कि उनका असर आखिर तक बना रहता है। चाहे आजादी का आन्दोलन हो या राम मंदिर आन्दोलन लोग आज भी इसे अपने जहन में बैठाए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-190081 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/priyanka-hathras.jpg" alt="" width="914" height="531" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/priyanka-hathras.jpg 659w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/10/priyanka-hathras-300x174.jpg 300w" sizes="(max-width: 914px) 100vw, 914px" /></p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>अविनाश भदौरिया </strong></span></p>
<p>कहते हैं एक तस्वीर हजार शब्दों के बराबर होती है। लोग कही सुनी बातों को तो भूल जाते हैं लेकिन तस्वीरें मन मस्तिष्क में ऐसी छाप छोड़ती हैं कि उनका असर आखिर तक बना रहता है। चाहे आजादी का आन्दोलन हो या राम मंदिर आन्दोलन लोग आज भी इसे अपने जहन में बैठाए हुए हैं ये तस्वीरों का ही तो कमाल है। खैर ये तो बात है इतिहास की लेकिन इस वक्त चर्चा में हैं कुछ नई तस्वीरें।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>ये तस्वीरें हैं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की। कभी कार्यकर्ताओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई की तरह साहसी बनकर सामने आ खड़ी होने वाली प्रियंका तो कभी पुलिसिया दुर्व्यवहार को बर्दाश्त करती प्रियंका फिर एक दुखी मां को ढांढस बंधाती बेटी के रूप में प्रियंका। तरह-तरह के रूपों में नजर आई यह प्रियंका लोगों के मन में बस गई है। आज सोशल मीडिया से लेकर गली नुक्कड़ तक सभी जगह अगर कोई चर्चा कर है तो बस प्रियंका गांधी की।</strong></span></p></blockquote>
<p>इस घटना का इतना व्यापक असर हुआ है कि विरोधी भी प्रियंका गांधी के इस जुझारूपन के कायल हो गए हैं। मेरे एक मित्र हैं जो कि बीजेपी समर्थक है जब उन्होंने मुझसे कहा कि अगर प्रियंका गांधी के साथ काम करने का मौका मिले तो वो भी अब कांग्रेस से जुड़ना चाहते हैं। उनके साथ हुए दुर्व्यवहार पर वह दुःख जताते हैं और कहते हैं कि भले ही कांग्रेस राजनीति करने हाथरस गई हो लेकिन योगी सरकार को उस दलित परिवार और प्रियंका गांधी जैसी बड़ी नेता के साथ ऐसा सलूक नहीं करना चाहिए था।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/distribution-of-seats-in-nda-bjp-jdu-bihar-election-2020/">सीटों के बंटवारे के बाद उठे सवाल, NDA में बड़ा भाई कौन</a></strong></span></p>
<p>अपने इस मित्र की बातें सुनने के बाद ही मेरे मन में ख्याल आया कि पिछले कई मुद्दों पर भी कांग्रेस ने सड़क पर उतर कर संघर्ष किया है लेकिन इस संघर्ष में कहीं न कहीं कुछ अलग है। फिर इसे समझने के लिए गांव और राजधानी से दूर के माहौल को समझने के लिए कई और लोगों से बात की।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>संतोष श्रीवास्तव जो कि बहुत अधिक राजनीति में इंटरेस्ट नहीं रखते और सामाजिक मुद्दों पर शार्ट फिल्म बनाते हैं। उनका मानना है कि हाथरस की घटना के बाद ऐसा लगा कि कांग्रेस में बदलाव तो हुआ है। </strong></span></p></blockquote>
<p>वो आगे कहते हैं, पहले की कांग्रेस में अब की कांग्रेस में अंतर तो है। बीते कुछ वर्षों में गायब सी होती जा रही कांग्रेस अब दिखने लगी है। प्रियंका गांधी और अजय कुमार लल्लू के आ जाने से लोग कांग्रेस में उम्मीद देखने लगे हैं।</p>
<p>बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर जनपद से कांग्रेस जिला महासचिव डॉ अभिन्दन सिंह भदौरिया से जब पूछा कि आपके नेताओं के इस संघर्ष से आप क्या महसूस कर रहे हैं तो उन्होंने बताया कि अब हमें ऐसा लग रहा है कि 2022 के चुनाव में हमारी पार्टी की न सिर्फ सीटें बढ़ेगी बल्कि हम सरकार भी बना लेंगे।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/uttar-pradesh-sitapur-women-burnt-alive-by-lover/">बर्बर अपराधों का नही रुक रहा सिलसिला</a></strong></span></p>
<p>उन्होंने कहा कि अभी तक पार्टी के कार्यकर्ता ही आयोजनों या कार्यक्रमों में शामिल नहीं होते थे लेकिन अब तो हमारे पास अन्य पार्टी के लोग भी आ रहे हैं जो हमसे जुड़ना चाहते हैं। जो लोग कल तक हमारी बातों पर हँसते थे अब वो हमारी हाँ में हाँ मिला रहे हैं। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अजय कुमार लल्लू के नेतृत्व से हम सभी लोगों में नया उत्साह जागा है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>कुलमिलाकर देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी अभी चुनाव में भले ही बहुत अच्छे परिणाम न हासिल कर सके लेकिन एक बात सपष्ट हो गई है कि जिस तरह प्रियंका गांधी की तस्वीरे इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रही है। उसके बाद उत्तर प्रदेश में बाजी पलटती दिख रही है। प्रियंका गांधी ने साबित कर दिया है कि राज्य में असली विपक्ष वही हैं और भविष्य की बड़ी नेता हैं। एक मजबूत विपक्ष कैसा होना चाहिए इस तस्वीरों ने लोगों को इतना तो बता ही दिया है।</strong></span></p></blockquote>
<p>हाथरस जाते समय पुलिस की लाठियों के सामने जिस तरह प्रियंका आईं उसने लोगों को इंदिरा गांधी की याद दिला दी है । इंदिरा गांधी की कई छवियां जनता के और खासतौर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओ के मन में स्थाई हैं। अब उसी तरह ये तस्वीरें भी लोगों के मन में बस गईं हैं।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/kisan-nyay-yatra-start/">यूपी कांग्रेस की ‘किसान न्याय यात्रा’ का हुआ आगाज</a></strong></span></p>
<p><iframe loading="lazy" title="#Episode18 : बातें दिलों की... गीत, ग़जल और कविताओं की महफ़िल" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/WBnD26QEQ1A?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
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		<title>एक राजा जो बन गया बुन्देलों का भगवान</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/king-who-became-lord-of-the-bundelas/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2020 15:00:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डॉ अभिनन्दन सिंह भदौरिया यूँ तो बुंदेलखंड में अनेक राजाओं ने राज किया लेकिन कोई भी राजा हरदौल के जैसा बुंदेलखंड के आम जन के मन का राजा न बन सका, लाला हरदौल को बुंदेलखंड के लोंगो द्वारा राजा नहीं बल्कि भगवान माना जाता है और इतिहास में राजा तो कई रहे लेकिन भगवान कोई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-156194 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/raja.jpg" alt="" width="845" height="564" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/raja.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/raja-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 845px) 100vw, 845px" /></p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>डॉ अभिनन्दन सिंह भदौरिया</strong></span></p>
<p>यूँ तो बुंदेलखंड में अनेक राजाओं ने राज किया लेकिन कोई भी राजा हरदौल के जैसा बुंदेलखंड के आम जन के मन का राजा न बन सका, लाला हरदौल को बुंदेलखंड के लोंगो द्वारा राजा नहीं बल्कि भगवान माना जाता है और इतिहास में राजा तो कई रहे लेकिन भगवान कोई नहीं बन सका।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>आज भी बुंदेलखंड में विवाह के अवसर पर लाला हरदौल भगवान के रूप में पूजे जाते है, बुंदेलखंड के प्रत्येक गाँव के बाहर लाला हरदौल का मंदिर सहज ही मिल जाता है। लाला हरदौल बुंदेलों के भगवान कैसे बने ये इतिहास के पन्नों में आज भी दर्ज है……</strong></span></p></blockquote>
<p>जिस समय भारत मे मुगल बादशाह अकबर का शासन चल रहा था, उस समय बुन्देलखण्ड की राजधानी ओरछा में सम्राट वीर सिंह जूदेव शासन कर रहे थे सोलह सौ आठ ईस्वी में वीर सिंह जूदेव की तीसरी संतान के रूप में लाला हरदौल का जन्म हुआ, हरदौल के ज्येष्ठ भ्राता का नाम जुझार सिंह था, हरदौल के एक बहन भी थी जिसका नाम कुंजावती था वीर सिंह जूदेव लाला हरदौल को राज्य का उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे। लेकिन पिता के निधन के बाद हरदौल ने अपने बड़े भाई जुझार सिंह को राज्य सौंप कर अपने त्याग का परिचय दिया।</p>
<p>हरदौल जुझार सिंह से ज़्यादा पराक्रमी थे और कई बार मुगलों से भी भिड़ जाते थे। हरदौल ने शाहजहाँ की ओर से ओरछा में धर्म प्रचार के लिये आये फ़ारसी पठान मेहंदी हसन को मार दिया। इससे हरदौल के शौर्य की चर्चा चारों ओर धीरे धीरे फैलने लगी। 1627 में मुगलो का भीषण आक्रमण ओरछा में हुआ, हरदौल ने इस महासमर में अब्दुल्ला खां, महावत खां को घायल कर मार गिराया और विजय हासिल की।</p>
<p>इस समय हरदौल की आयु 19 वर्ष थी हरदौल की ख्याति से जहाँ एक ओर मुगल खुश नहीं थे वहीं जुझार सिंह मन ही मन हरदौल से ईर्ष्या करते थे, जुझार सिंह के दरबार के कुछ मुस्लिम अधिकारियों ने जुझार सिंह के मन मे हरदौल के प्रति संदेह पैदा करना शुरू किया। और हरदौल के मृत्यु को मूर्त रूप देने के लिये षड़यंत्र करना प्रारंभ कर दिया, हरदौल अपनी भाभी चम्पावती को माँ के रूप में प्यार करता था।</p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/here-is-root-of-delhi-violence/">दिल्ली हिंसा की जड़ यहाँ है</a></strong></span></p>
<p>मुस्लिम अधिकारियों ने जुझार सिंह को हरदौल और चम्पावती के अवैध संबंधों की झूठी कहानी में फ़साना शुरू क़िया, और इस तरह उन्होंने राजा जुझार सिंह से चम्पावती द्वारा हरदौल को विष देने का निश्चय करवा लिया। जुझार सिंह ने चम्पावती से हरदौल और उसके अवैध संबंधों के बारे में चर्चा की और कहा कि यदि तुम निर्दोष हो तो आज भोजन में विष मिला के खिला दो। चम्पावती ने जुझार सिंह को बहुत बहुत समझने की कोशिश की लेकिन जुझार सिंह नहीं माना।</p>
<p>चम्पावती ने भोजन में जहर मिलाया और हरदौल के सामने प्रस्तुत किया ऐसा भी कहा जाता है कि रानी ने हरदौल से इस बारें में सब कुछ बता दिया था लेकिन फिर भी हरदौल ने अपने और भाभी माँ के रिश्ते की पवित्रता एवम रक्षा के लिए जानबूझ कर जहर मिला भोजन ग्रहण कर लिया। इस तरह 1631 ईस्वी में हरदौल की मृत्यु हो गयी ओरछा नगरी शोकमग्न हो गयी चारों ओर हाहाकार मच गया। प्रकृति ने भी अकुलश और पुनीत हृदय हरदौल की मृत्यु का शोक मनाया। और इस तरह ओरछा का पराभव (विनाश) प्रारंभ हो गया। उनकी बहन कुंजा वती को भी हरदौल की मृत्यु का बहुत दुख हुआ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>लाला हरदौल और चम्पावती की ये कहानी सन 1875 में विंसेट स्मिथ की किताब पर आधारित है लेकिन सच्चाई कुछ और है ऐसा लगता है कि विंसेट स्मिथ को ये कहानी किसी ने सुनाई और उसने किताब में बिना जाँच पड़ताल किये कहानी ज्यों की त्यों लिख दी, स्मिथ ने उक्त घटना का जिक्र करते हुये सत्यता की जाँच बिल्कुल भी नहीं की, उसने ये भी पता लगाने की कोशिश नहीं कि हरदौल के जन्म के समय वीर सिंह देव 66 वर्ष के थे, वहीं जुझार सिंह 45 वर्ष के वहीं चम्पावती की उम्र 39 वर्ष थी। चम्पावती का लड़का विक्रमाजीत 19 वर्ष तथा विक्रमाजीत का लड़का हरदौल के जन्म के कुछ दिनों बाद ही पैदा हुआ था, जुझार सिंह के हरदौल से मतभेद थे लेकिन उसने यह कभी नहीं सोचा था कि उसकी पत्नी के हरदौल से अवैध संबंध हैं। इस संबंध में एक जो कहानी प्रचलित है वो गलत है। हरदौल के संबंध में एक मज़ेदार कथा प्रचलित है।</strong></span></p></blockquote>
<p>हरदौल के जन्म के कुछ दिनों बाद जब उनकी माँ का देहांत हो गया तब उन्हें दूध पिलाने का दायित्व कमलकुमारी पर था, जब हरदौल को दूध पिलाने के लिये लाया जाता था तब बकायदा सूचित किया जाता था कि कक्का जू पधार रहे है, कमलकुमारी ससम्मान घूँघट डालकर खड़ी हो जाती थी और हरदौल को गोद में लेकर दूध पिलाकर तथा ससम्मान विदा करती थी। वात्सल्य का इतना विलक्षण उदाहरण कहीं देखने को नहीं मिलता है। घटनाओं से यह निश्चित है कि हरदौल की मृत्यु जहर देने से हुई थी और जहर जुझार सिंह ने ही दिलाया था। लेकिन कारण कुछ और था।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-156196 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/hardaul-temple.jpg" alt="" width="810" height="531" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/hardaul-temple.jpg 835w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/hardaul-temple-300x197.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/03/hardaul-temple-768x503.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 810px) 100vw, 810px" /></p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%b5-%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ac/">अयोध्या में उद्धव ठाकरे, बोले- मैं बीजेपी से अलग हुआ हूं, हिंदुत्व से नहीं</a></strong></span></p>
<p>जब शाहजहाँ मुगल शहंशाह बना तो उसने तख्तपोशी रस्म के लिये जुझार सिंह को भी निमंत्रण भेजा। हरदौल, बुंदेला, चम्पत राय और सरदारों ने आगरा जाने का विरोध किया, उस समय जुझार सिंह अपनी पारिवारिक समस्याओं से परेशान थे और वह भाइयों के विद्रोह को दबाने के लिये सत्ता का सहयोग चाहते थे। जिसकी आशंका थी अंततः वही हुआ शाहजहाँ ने जुझार सिंह की कैद करने की योजना बना ली लेकिन जुझार सिंह को योजना का पता चल गया और वो वहाँ से भाग निकले। शाहजहाँ ने महावत खां को जुझार सिंह के पीछे लगा दिया, महावत खां सतारा नदी के तट पर पहुँच गया वहाँ पहले ही हरदौल ने अपनी सेना लगा रखी थी भयंकर युद्ध हुआ लेकिन महावत खां को कुछ हासिल नहीं हुआ। अंत में महावत खां ने जुझार सिंह को लालच देकर शाहजहाँ के यहाँ जाने के लिए तैयार कर लिया, अंत में जुझार सिंह को अपनी रिहाई के बदले में फिरौती के रूप में 15 लाख रुपये, 40 हाथी तथा करेरा का परगना देना पड़ा। इसके अलावा दक्षिण में मुगल सेना के साथ जाने की नौकरी भी करनी पड़ी।</p>
<p>सन 1629 में खानजहान लोधी भी जुझार सिंह की तरह शाहजहाँ की कैद से बचने के लिये अपनी सेना सहित आगरा से भाग आया। मुगल सेना उसे रोक नहीं पाई वह बुन्देलखण्ड की सीमा से होता हुआ दक्षिण की ओर चला गया, उस समय जुझार सिंह दक्षिण में थे, ओरछा में हरदौल थे खानजहान लोधी बुंदेलों का सहयोगी रहा इसलिए हरदौल ने उसे नहीं रोका और अपने राज्य की सीमा से जाने दिया, शाहजहाँ को जुझार सिंह पर बरसने का मौका मिल गया। उसने जुझार सिंह को हुकुम दिया कि कैसे भी हो खानजहान लोधी को जिंदा या मुर्दा उसके सामने पेश करो, मजबूर हो कर जुझार सिंह ने अपने लड़के विक्रमाजीत को खान जहान लोधी को पकड़ने के लिये भेजा। काफी परेशानी के बाद विक्रमाजीत ने खानजहान के भाई दरियाखान व उसके लड़के को मारने में सफलता प्राप्त की। इस युद्ध में 200 बुंदेला सैनिक भी मारे गये जुझार सिंह का ऐसा मानना था कि यह सब उन्हें हरदौल के कारण झेलना पड़ा और उन्होंने हरदौल को अपने रास्ते से हटाने का निर्णय लिया।</p>
<p>लाला हरदौल की मृत्यु के पश्चात उनकी बहन कुंजावती ने अपनी पुत्री का विवाह किया जिसमें कुंजावती के समक्ष ऐसी परिस्थितियां आयी जिसके चलते कुंजावती परेशान हो उठी। तब लाला हरदौल ने अपनी बहन को स्वप्न दिया और बहन से शादी में भात लेकर आने को कहा और लाला हरदौल ने अपनी मृत्यु के पश्चात शादी के रस्म के तय समय पर पहुँच कर बहन का दुःख दूर किया। इन्ही सब विशेषताओं के कारण राजा हरदौल को बुंदेलखंड में आज भी भगवान के रूप में विवाह के शुरूआत में याद किया जाता है और उनसे शादी सफल होने की कामना मांगी जाती है।</p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/holi-is-celebrated-here-with-pomp-and-color-wearing-a-cap-and-playing-color/">यहां धूमधाम से मनाई जाती है होली, बुरका- टोपी पहन खेलते हैं रंग</a></strong></span></p>
<p><iframe loading="lazy" title="दो से ज्यादा बच्चे हुए तो नहीं लड़ सकेंगे चुनाव! | jubilee tv" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/-NTSRFrKlzA?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
<p><strong>(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Jubilee Post उत्तरदायी नहीं है।)</strong></p>
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		<title>जयंती विशेष : दीवान शत्रुघ्न सिंह को क्यों कहते हैं बुंदेलखंड का गांधी</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/diwan-shatrughan-singh-gandhi-of-bundelkhand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Dec 2019 14:01:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डॉ अभिनन्दन सिंह भदौरिया 25 दिसंबर सन 1900 बुंदेलखंड के स्वतंत्रता संग्राम के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि हमीरपुर जनपद की राठ तहसील के मंगरौठ गांव में हमीरपुर जनपद के स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व करने वाले गांधीवादी दीवान शत्रुघ्न सिंह का जन्म हुआ था। दीवान साहब ओजस्वी वक्ता होने के साथ प्रखर गांधीवादी व्यक्ति &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>डॉ अभिनन्दन सिंह भदौरिया</strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-143614 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/abhinandan-singh-bhadauriya-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/abhinandan-singh-bhadauriya-150x150.jpg 150w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/abhinandan-singh-bhadauriya-300x300.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/abhinandan-singh-bhadauriya.jpg 640w" sizes="auto, (max-width: 150px) 100vw, 150px" /></p>
<p>25 दिसंबर सन 1900 बुंदेलखंड के स्वतंत्रता संग्राम के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि हमीरपुर जनपद की राठ तहसील के मंगरौठ गांव में हमीरपुर जनपद के स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व करने वाले गांधीवादी दीवान शत्रुघ्न सिंह का जन्म हुआ था।</p>
<p>दीवान साहब ओजस्वी वक्ता होने के साथ प्रखर गांधीवादी व्यक्ति थे उन्होंने सन 1919 में हमीरपुर जनपद की राठ तहसील में सर्वप्रथम कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। विद्यार्थी जीवन में उनके ऊपर राजकीय हाईस्कूल बाँदा के कर्मठ अध्यापक पंडित लक्ष्मी नारायण अग्निहोत्री के विचारों का गहरा प्रभाव पड़ा, जिसने गांधी जी के प्रति आकर्षण पैदा कर दिया। उनके जीवन पर मलेहटा निवासी कुँवर मनोहर सिंह तथा क्रान्तधर्मी पंडित परमानंद जी का प्रभाव पड़ा जिसके कारण क्रांतिकारी राजनैतिक जीवन का अंकुरण हुआ।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>सन 1917 तक दीवान साहब सशस्त्र संघर्ष के पक्षधर थे लेकिन 1917 के बाद भारतीय राजनीति में गांधी जी का प्रभाव दिखाई देने लगा था। </strong></span></p></blockquote>
<p>इस कारण दीवान साहब ने अपने क्रांतिकारी दल की एक बैठक बुलाई और कांग्रेस में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की, इस बात को लेकर क्रांतिकारी दल के सदस्यों और दीवान साहब के बीच काफी वाद विवाद हुआ अंत मे निर्णय हुआ जो लोग कांग्रेस में शामिल होना चाहते है वो शामिल हो सकते है अन्ततः दीवान साहब गांधीमार्गी हो गए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-143615 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/Diwan-Shatrughan-Singh.jpg" alt="" width="810" height="936" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/Diwan-Shatrughan-Singh.jpg 288w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/Diwan-Shatrughan-Singh-259x300.jpg 259w" sizes="auto, (max-width: 810px) 100vw, 810px" /></p>
<p>उसी समय एक महत्वपूर्ण घटना घटी जिसने दीवान साहब को गांधी वादी नेता के रूप में स्थापित कर दिया। घटना कुछ इस तरह थी कि राठ के तहसीलदार ने प्रबुद्धजनों की एक बैठक बुला कर उनसे सरकार को चंदा देने की अपील की। राठ कांग्रेसियों के कहने पर उन्होंने असहयोग करना स्वीकार कर लिया। दीवान साहब ने चंदा देने से साफ इंकार कर दिया और बैठक से बाहर चले गए।</p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/swami-brahmanand-birthday-special/">स्वामी ब्रह्मानन्द : बालक शिवदयाल कैसे बना बुंदेलखंड का मालवीय</a></strong></span></p>
<p>तहसीलदार ने उनके इस अहसयोगी कदम के प्रति उन्हें सचेत किया लेकिन दीवान साहब अड़िग थे। अब सरकारी अधिकारी तिलमिला उठे थे और उन्हें जिलाधीश ने जेल भेजने की सारी तैयारी कर ली थी उसी समय दीवान साहब ने धारा 144 का उल्लंघन कर स्वयंसेवी के रूप में कांग्रेस में भर्ती होने की घोषणा कर दी। अधिकारियों ने इस मौके का फायदा उठाया और उनके नाम वारंट जारी कर साथियो सहित हमीरपुर जेल में बंद कर दिया। इसके बाद वह कई बार जेल गए।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-143616 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/दीवान-शत्रुघ्न-सिंह.jpg" alt="" width="852" height="588" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/दीवान-शत्रुघ्न-सिंह.jpg 730w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/दीवान-शत्रुघ्न-सिंह-300x207.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/दीवान-शत्रुघ्न-सिंह-110x75.jpg 110w" sizes="auto, (max-width: 852px) 100vw, 852px" /></p>
<p>उन्हें नेहरू, पंत, शास्त्री, विद्यार्थी एवं विनोबा जी जैसे चोटी के नेताओ का सान्निध्य प्राप्त था। दीवान साहब ने मई 1952 में मंगरौठ ग्राम को बिनोवा जी को दान कर दिया इसलिए उन्हें आज हिंदुस्तान का पहला ग्राम दानी होने का गौरव प्राप्त है, उन्होंने कुछ रचनात्मक कार्य भी किये, जिसमे जीआरवी इंटर कॉलेज राठ एवं मंगरौठ में पंडित परमानंद इंटर कॉलेज की स्थापना शामिल है। उन्होंने जीवन भर गांधीवादी विचारों का पालन किया। इसी लिए लोग उन्हें बुंदेलखंड का गांधी कहते है।</p>
<p><strong>(लेखक एक पीजी कॉलेज में प्राचार्य है, समय समय पर लेखन का कार्य करते रहते है)</strong></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/rani-rajendra-kumari-second-lakshmibai-of-bundelkhand/">रानी राजेन्द्र कुमारी : बुंदेलखंड की दूसरी लक्ष्मीबाई</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/bundelkhand-poet-manjul-mayank/">बुन्देलखण्ड के इस कवि को क्यों कहते हैं ‘गीतों का दानवीर कर्ण’</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>रानी राजेन्द्र कुमारी : बुंदेलखंड की दूसरी लक्ष्मीबाई</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/rani-rajendra-kumari-second-lakshmibai-of-bundelkhand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Sep 2019 14:43:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[डॉ. अभिनन्दन सिंह भदौरिया झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में बहुत सुना होगा लेकिन बुंदेलखंड की दूसरी रानी लक्ष्मीबाई के नाम से विख्यात रानी राजेन्द्र कुमारी को बहुत कम लोग जानते होंगे। फतेहपुर जनपद के गाजीपुर गांव में रानी साहिबा का जन्म हुआ था। उनके पिता ठाकुर शिवराज सिंह ने अपनी बेटी का विवाह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<figure id="attachment_127968" aria-describedby="caption-attachment-127968" style="width: 812px" class="wp-caption aligncenter"><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-127968" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/Rani-Rajendra-Kumari.jpg" alt="" width="812" height="728" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/Rani-Rajendra-Kumari.jpg 480w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/Rani-Rajendra-Kumari-300x269.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 812px) 100vw, 812px" /><figcaption id="caption-attachment-127968" class="wp-caption-text">रानी राजेन्द्र कुमारी</figcaption></figure>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>डॉ. अभिनन्दन सिंह भदौरिया</strong></span></p>
<p>झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के बारे में बहुत सुना होगा लेकिन बुंदेलखंड की दूसरी रानी लक्ष्मीबाई के नाम से विख्यात रानी राजेन्द्र कुमारी को बहुत कम लोग जानते होंगे।</p>
<blockquote><p><span style="color: #993366;"><strong>फतेहपुर जनपद के गाजीपुर गांव में रानी साहिबा का जन्म हुआ था। उनके पिता ठाकुर शिवराज सिंह ने अपनी बेटी का विवाह राठ मंगरौठ निवासी दीवान शत्रुघ्न सिंह से किया। </strong></span></p></blockquote>
<p>दीवान शत्रुघ्न सिंह उस समय स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, इसका असर रानी साहिबा पर भी पड़ना स्वाभाविक था। इसलिए रानी राजेन्द्रकुमारी ने पर्दा प्रथा का त्याग कर दिया और स्वाधीनता की लड़ाई में कूद पड़ी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-127969 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/Rani-Lakshmi-bai.jpg" alt="" width="803" height="574" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/Rani-Lakshmi-bai.jpg 700w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/09/Rani-Lakshmi-bai-300x214.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 803px) 100vw, 803px" /></p>
<p>उन्होंने दीवान साहब से कांग्रेस के कार्य संचालन की अनुमति मांगी। 1921 में दीवान साहब के जेल जाने के बाद रानी साहिबा ने कांग्रेस पार्टी के स्वाधीनता आंदोलन की बागडोर संभाल ली।</p>
<blockquote><p><span style="color: #993366;"><strong>रानी साहिबा ने अपने सारे बहुमूल्य जेवरात कांग्रेस पार्टी के कोष में स्वाधीनता आंदोलन के संचालन हेतु, श्री पत सहाय रावत के माध्यम से दान दे दिये। उन्होंने 1921 में कांग्रेस के गया और झांसी सम्मेलन में भाग लिया जहाँ उन्हें कस्तूरबा गांधी, सरोजनी नायडू कमला नेहरू जैसी राष्ट्रीय स्तर की महिला नेताओं का सानिध्य प्राप्त हुआ। </strong></span></p></blockquote>
<p>रानी साहिबा के रात दिन भाग दौड़ और दीवान साहब के जेल में होने के कारण उनके एक मात्र अल्प वयस्क पुत्र का निधन हो गया। लेकिन रानी साहिबा इससे विचलित नही हुई बल्कि स्वाधीनता के इरादे उनके लिए और मजबूत हो गए।</p>
<p>उन्होंने सामाजिक सरोकार के काम भी किये राठ में शराब की दुकानों के सामने धरना दिया। 1933 में उन्हें एक वर्ष के कारागार की सजा हुई इस तरह उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन में पुरुषों के साथ कंधा से कंधा मिला कर काम किया और बुंदेलखंड में महिलाओं की प्रेरणाश्रोत बनी रही। स्वाधीनता के बाद उन्होंने मौदहा विधानसभा का प्रतिनिधित्व भी किया। लोग उन्हें बुंदेलखंड की दूसरी रानी लक्ष्मीबाई पुकारते है।</p>
<p><span style="color: #3366ff;"><strong>(लेखक एक निजी महाविद्यालय में प्राचार्य हैं)</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/why-kahmiri-pandits-are-loosing-hope/">370 हटने के बाद भी अब निराश क्यों होने लगे हैं कश्मीरी पंडित ?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/medicine-found-in-your-medical-store-is-real/">आपके मेडिकल स्टोर में मिलने वाली दवा असली है !</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #ff0000;" href="https://www.jubileepost.in/varanasi-dm-surendra-singh-fell-down-during-flood-relief-work-video-goes-viral/">VIDEO: राहत सामग्री बांटने गए डीएम के साथ हुआ हादसा</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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