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	<title>Jubilee Post &#060; Jubilee Post | जुबिली पोस्ट</title>
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	<description>News &#38; Information Portal</description>
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		<title>सुन भाई रमज़ान भी यही है&#8230;</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/listen-brother-this-is-also-ramazan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 Apr 2022 13:07:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[लिट्फेस्ट]]></category>
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					<description><![CDATA[चंचल जमुना बिन्नी को हम भी नहीं जानते थे, क्योंकि हमारे जानने का दायरा, दिल्ली की कुछ कुर्सियों, बम्बई के लिपे- पुते चेहरों, या लकड़ी के फट्टे से मार खाई एक गेंद के पीछे भागते मस्तंडों तक ही महदूद कर दिया गया है. हम कैसे जानेंगे जमुना-बिन्नी को ? हमको तो गहरी खाई के सामने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img decoding="async" class="alignleft wp-image-252289 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-150x150.jpg" alt="" width="150" height="150" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-150x150.jpg 150w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-300x300.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-1024x1024.jpg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal-768x768.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/chanchal.jpg 1276w" sizes="(max-width: 150px) 100vw, 150px" />चंचल</strong></span></p>
<p>जमुना बिन्नी को हम भी नहीं जानते थे, क्योंकि हमारे जानने का दायरा, दिल्ली की कुछ कुर्सियों, बम्बई के लिपे- पुते चेहरों, या लकड़ी के फट्टे से मार खाई एक गेंद के पीछे भागते मस्तंडों तक ही महदूद कर दिया गया है. हम कैसे जानेंगे जमुना-बिन्नी को ? हमको तो गहरी खाई के सामने खड़ा कर दिया गया है, कहा जा रहा है &#8211; “जानो मत, सवाल मत पूछो, बस मिटाओ”.</p>
<p>जमुना बिन्नी को हम भी नहीं जानते, क्योंक़ि हम दुनिया के सबसे बड़े जानकार हैं. अचानक किसी ने कान की ललरी पर सिटकी लगा कर ज़ोर से दबाया &#8211; “ हम तुम्हारे भगत सिंह, सुभाषचंद बोस, अज्ञेय, बिरजू महराज, राजेश खन्ना, गावस्कर को जानते हैं. तुम हमारे ( पूर्वोत्तर के सातों राज्यों ) के कितने लोगों को जानते हो ? यह थी जमुना बिन्नी जी. अरुणाचल प्रदेश में राजीव गांधी विश्वविद्यालय में हिंदी की प्रोफ़ेसर और कविता में महारत. अभी हाल में एक और बड़े अलंकरण से पुरस्कृत हुई हैं- “ तिलका माँझी पुरस्कार ”. कविता है &#8211; जब आदिवासी गाता है.</p>
<p>&#8211; तिलका माँझी ?</p>
<p>हम नहीं जानते, जब हम हैदर अली, टीपू सुल्तान, महाराजा रणजीत सिंह, राम किंकर, ऋत्विक घटक को नहीं जानते, किताबों से इनके पाठ हटा दिए गये तो आप हमसे तिलका माँझी के बारे में पूछ रहे हैं ?</p>
<p>एक गहरी साज़िश के तहत, हमें आत्मकेंद्रित किया जा रहा है, तुर्रा यह कि हम बेहद आत्म मुग्ध हुए, जयकारा कर रहे हैं.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-252290 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/Ramzaan.jpg" alt="" width="640" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/Ramzaan.jpg 640w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2022/04/Ramzaan-300x225.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p>रमज़ान मुबारक हो</p>
<p>&#8211; रमज़ान क्या है ?</p>
<p>&#8211; यह तो मुसलमानों का त्योहार है, हमसे क्या मतलब ?</p>
<p>&#8211; मुसलमान को कितना जानते हो ?</p>
<p>बरगद ठहाका लगाता है &#8211; किससे पूछते हो, क़ि वह मुसलमान को कितना जानता है? जब वह खुद अपने को नहीं जानता तो मुसलमान को कितना जानेगा ? इससे इंसानियत के मूल स्वरूप पर बात करो, इसकी ज़ुबान में.</p>
<p>“ गर्मी के तपते महीने में एक अभावग्रस्त इंसान चुपचाप सड़क किनारे धूप में बैठा है, कोई कुछ दे दे तो पेट की आग शांत हो ?”</p>
<p>सामने से गुजरने वाले अलग अलग मानसिकता के होंगे. अलहदा उनकी सोच होगी, लेकिन एक बात पर सब एक मत होंगे क़ि यह भिखारी है. इस पहली राय के बाद ही दूसरी कोई बात उठेगी. उस डगर से गुजरने वालों की एक सूची देखिए &#8211;</p>
<p>1- इन्हें न सड़क दिख रही है न वह &#8211; इन्हें अपना दम्भ और ग़ुरूर दिख रहा है. नाक पर रूमाल रख कर आगे बढ़ जायेंगे.</p>
<p>2- हाथ पाँव सलामत हैं, काम क्यों नहीं करते ? ये उपदेशक जी हैं, राजनीति में नहीं हैं लेकिन नेता बाबू के खर्चे पर सब्ज़ी ख़रीदते हैं. सरकारी गल्ला की दुकान पर क़तार बद्ध होकर.</p>
<p>“ मुफ़्त” वाला नमक और रिफ़ाइन उठाते हैं और जिसका नमक खाते हैं उसका हक़ मज़बूत करते हैं.</p>
<p>3- माफ़ करे उपरवाला ! यह दिन न दिखलाए ! मरजी उसकी कब क्या कर दे ? लो भाई और खीसे से कुछ निकाल कर इज्जत के साथ उसके हाथ पर रख दिया.</p>
<p>4- उसे देखा , उसमें खुद को पाया, हम भी इस हालात से गुज़रे हैं. चुपचाप जो कुछ था निकाल कर उसके सामने रख कर आगे बढ़ गया, बुदबुदाता गया &#8211; वक्त बदलता है मित्र !</p>
<p>&#8211; आप किस क़तार में हैं ?</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>भारतीय वांगमय इमदाद की बात करता है, दधीच, कर्ण, की कथा में वह ज़िंदा रखता है अपनी तहज़ीब. धूप बैठा रह गया है, तपती धूप में, बारिश में, ठंड में, संदेश देता है आत्म नियंत्रण, समय बोध. इंद्रियों की पिपासा पर नकले लगाओ उसे अंकुश में रखो. सारे सलीके एक हैं नाम अलग अलग हैं. सुन भाई ! रमज़ान भी यही है. अपने पर नियंत्रण और दूसरे की इमदाद. “ मुफ़्त “ विशेषण के साथ वाला इमदाद नहीं. रहीम वाला इमदाद &#8211;</strong></span></p></blockquote>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>देनदार कोउ और है, भेजत सो दिन रैन । </strong></span><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>लोग भरम हम पै धरें, याते नीचे नैन ॥</strong></span></p>
<p>ओ अभाव में है उसकी इमदाद कर दो, चुपचाप. रमज़ान में इसे ज़कात कहते हैं.</p>
<p>स्वाभिमान और सलीका समाज देता है तब कर्ण दधीच, रहीम बुद्ध और गांधी पैदा होते हैं. स्वाभिमान स्व से ऊपर उठकर समष्टि तक जाता है. पाव भर चना और नमक के मुफ़्त (?) पर, दाता जब अपना नाम और चेहरा दिखाने लगे और समाज उससे उपकृत होने लगे तो वह समाज भिखमंगे पैदा कर सकता है, स्वाभिमानी नहीं.</p>
<p>बापू ने चुपचाप अपनी चादर, अभाव में खड़ी महिला की ओर बढ़ा दिया था, आँखें नीचे ही नहीं थीं नम भी थीं.</p>
<p>हम तो इंसानी सभ्यता को मुबारकबाद दे रहे हैं.</p>
<p>आत्म नियंत्रण और परहित है रमज़ान.</p>
<p>ज़कात में उतर कर देखिए, किसी का अभाव दूर करके आपको एक आंतरिक सुख मिलेगा. ज़कात की भाषा अलग हो सकती है लेकिन भारतीय उप महाद्वीप का गाँव इसी ज़कात पर ज़िंदा है.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/love-is-in-immortality-not-in-fleeting/">प्रेम अमरता में है क्षणभंगुरता में नहीं</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/better-if-the-kashmir-files-becomes-a-ointment/">डंके की चोट पर : द कश्मीर फाइल्स मरहम बने तो बेहतर वर्ना…</a></strong></span></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बीना राय को थी फिल्मों में काम करने की जिद, कर दी भूख हड़ताल</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/it-collage-student-bina-rai-become-a-great-actress/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Utkarsh Sinha]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Jul 2021 05:58:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[जुबिली सिनेमा]]></category>
		<category><![CDATA['दादी मां"]]></category>
		<category><![CDATA['मेरा सलाम"]]></category>
		<category><![CDATA['राम राज्य"न]]></category>
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		<category><![CDATA[उद्योगपति आनन्द महेन्द्रा]]></category>
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		<category><![CDATA[दिलीप कुमार]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेम नाथ]]></category>
		<category><![CDATA[बाम्बे टाकीज]]></category>
		<category><![CDATA[बीना राय]]></category>
		<category><![CDATA[मधुबाला]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रेमेन्द्र श्रीवास्तव लखनऊ की मुकद्दस सरजमीं ने बॉलीवुड को अनेक मशहूर व मारूफ फनकार दिये हैं। उनकी कला के जलवे मौसिकी, अदाकारी, फिल्म निर्देशन , नगमानिगारी, कहानी लेखन व स्क्रिप्ट राइटरिंग में सर्वविदित हैं।  लखनऊ में पले बढ़े फनकारों की अगली कड़ी में प्रस्तुत हैं सुप्रसिद्ध अभिनेत्री कृष्णा सरीन उर्फ बीना राय के बारे में &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>प्रेमेन्द्र श्रीवास्तव</strong></span></p>
<p><span style="color: #ff0000;"><em><img loading="lazy" decoding="async" class="alignleft wp-image-227164 size-thumbnail" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/premendra_ji-removebg-preview-150x150.png" alt="" width="150" height="150" />लखनऊ की मुकद्दस सरजमीं ने बॉलीवुड को अनेक मशहूर व मारूफ फनकार दिये हैं। उनकी कला के जलवे मौसिकी, अदाकारी, फिल्म निर्देशन , नगमानिगारी, कहानी लेखन व स्क्रिप्ट राइटरिंग में सर्वविदित हैं।  लखनऊ में पले बढ़े फनकारों की अगली कड़ी में प्रस्तुत हैं सुप्रसिद्ध अभिनेत्री कृष्णा सरीन उर्फ बीना राय के बारे में</em></span></p>
<p>कृष्णा सरीन का परिवार बंटवारे की त्रासदी झेलते हुए पाकिस्तान के लाहौर से माइग्रेट होकर कानपुर आया था। उच्च शिक्षा के लिए कृष्णा सरीन ने लखनऊ के आईटी कालेज में फर्स्ट इयर में दाखिला लिया। वे डे स्कालर नहीं बल्कि हॉस्टलर थीं। वे कालेज के नाट्य फेस्टिवल में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेतीं। थियेटर में काम करते करते उन्हें फिल्मों में काम करने का भूत सवार हो गया।</p>
<p>उन्हीं दिनों राइटर, डायरेक्टर, हीरो किशोर साहू एक फिल्म बना रहे थे जिसके लिए उन्होंने हिरोइन की तलाश में आल इंडिया कांटेस्ट रखी। उसका विज्ञापन अखबार में देखकर कृष्णा सरीन मचल गयीं। तबस्सुम ने अपने यूट्यूब चैनल बाम्बे टाकीज में राज खोला था कि बीना राय की दो प्रोफेसर आशा माथुर (जिनकी बाद में फिल्म निर्देशक मोहन सहगल से शादी हुई) व इन्दिरा पंचाल (जो बाद में सुप्रसिद्ध उद्योगपति आनन्द महेन्द्रा की मां बनीं ) को जब पता चला कि कृष्णा सरीन हिरोइन बनने जा रही है तो उन्होंने भी साथ चलने की तैयारी कर ली। क्योंकि किशोर साहू को अपनी फिल्म में तीन अदाकाराओं की तलाश थी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-228997 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/WhatsApp-Image-2021-07-21-at-10.58.34-AM.jpeg" alt="" width="720" height="660" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/WhatsApp-Image-2021-07-21-at-10.58.34-AM.jpeg 720w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/WhatsApp-Image-2021-07-21-at-10.58.34-AM-300x275.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 720px) 100vw, 720px" /></p>
<p>ऑडिशन में कृष्णा सरीन को किशोर साहू ने पूरे भारत से आयीं सैकड़ों लड़कियों में हिरोइन के लिए चुन लिया। उनके साथ आयीं प्रोफेसरों को भी फिल्म में काम करने के लिए सेलेक्ट कर लिया गया। पर कृष्णा सरीन के पुराने ख्यालात के घर वालों ने फिल्मों में काम करने की इजाजत नहीं दी। अब तो उनका रोना फूट पड़ा। भूख हड़ताल पर बैठ गयीं।</p>
<p>रेलवे में एक बड़े पद पर कार्यरत पिता अविनाश राम सरीन, मां राजवंती सरीन व उनके तीन भाई व चार बहनें भी उनकी भूख हड़ताल से नहीं पिघले। कृष्णा सरीन अब रुकने वाली नहीं थीं। वे बगावत कर, बम्बई पहुंच गयीं। 1950 में फिल्म बनना शुरू हुई।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>किशोर साहू ने कृष्णा सरीन को नया नाम दिया बीना राय। फिल्म का नाम था &#8216;काली घटा&#8221;। फिल्म 1951 में बनकर रिलीज हुई। इसके लिए उन्हें 25 हजार रुपये का भुगतान किया गया। फिल्म ठीक ठाक चली। बीना राय के खूबसूरत चेहरे और  उनकी मनमोहक मुस्कान ने निर्माताओें का ध्यान जरूर अपनी ओर खींचा। उनका जादू निर्माता निर्देशकों के सिर चढ़कर बोलने लगा।</strong></span></p></blockquote>
<p>इसी साल उन्होंने &#8216;बादल&#8221; नाम की एक फिल्म साइन की। जिसमें उनके हीरो थे प्रेम नाथ। इस फिल्म में बीना राय का करेक्टर चुलबुली लड़की का था। वो शॉट देने के बाद शरमा जातीं। इस पर प्रेम नाथ ने अपने अंदाज में तंज कसा कि ऐसी लड़कियों को तो फिल्म में काम करने की बजाए शादी कर घर बसा लेना चाहिए।</p>
<p>एक दिन बीना राय ने प्रेम नाथ के मेकअप रूम में जाकर एक पर्ची व एक लाल गुलाब रख दिया। पर्ची में लिखा था &#8216;यदि आप मुझसे प्रेम करते हैं तोे गुलाब को स्वीकार करें अन्यथा वापस कर दें।&#8221; प्रेम नाथ चकित से खड़े रह गये। फिर उन्होंने गुलाब को धीरे से अपनी जेब में रख लिया। जबकि वे मधुबाला के प्रेम में दीवाने थे और  कहते हैं कि मधुबाला दिलीप कुमार से प्यार करती थीं, दिलीप कुमार की बेरुखी से दुखी मधुबाला ने प्रेम नाथ से रिश्ते के लिए हां भी कर दी थी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-228998 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/WhatsApp-Image-2021-07-21-at-10.58.35-AM.jpeg" alt="" width="672" height="716" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/WhatsApp-Image-2021-07-21-at-10.58.35-AM.jpeg 672w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/WhatsApp-Image-2021-07-21-at-10.58.35-AM-282x300.jpeg 282w" sizes="auto, (max-width: 672px) 100vw, 672px" /></p>
<p>बीना राय और  प्रेम नाथ को पता ही नहीं चला कि साथ साथ काम करते हुए दोनों में कब प्यार पनप गया। बीना राय चूंकि संस्कारी परिवेश से आयीं थीं सो शादी वाली संस्था पर उन्हें पूर्ण विश्वास था। 1953 में फिल्म &#8216;औरत&#8221; के सेट पर उन्होंने अपनी नायिका बीना राय से शादी कर ली। उन्होंने अपना हनीमून अमेरिका में मनाया। वहां दोनों भारतीय प्रतिनिधि के रूप में गये थे।</p>
<p>उनकी शादी की खबर से लाखों चाहने वालों का दिल टूट गया। विवाह के बाद भी पारिवारिक जिम्मेदारी निभाते हुए अपने दो बेटों प्रेम किशन व कैलाश मल्होत्रा &#8216;मोंटी&#8221; की परवरिश करते हुए उनकी कई फिल्में रिलीज हुयी । जिनमें कई हिट भी रहीं। &#8216;काली घटा&#8221;, &#8216;औरत &#8221; के बाद &#8216;सपना&#8221;, &#8216;गौहर&#8221;, &#8216;शोले&#8221;, &#8216;सरदार&#8221;, &#8216;मीनार&#8221;, &#8216;मैरिन ड्राइव&#8221;, &#8216;हिल स्टेशन&#8221;, &#8216;मदभरे नैन&#8221;, &#8216;चंद्रकांत&#8221;, &#8216;दुर्गेशनंदनी&#8221;, &#8216;तलाश&#8221;, &#8216;चंगेज खां&#8221;, &#8216;घूंघट&#8221;, &#8216;बंदी&#8221;, &#8216;वल्लाह क्या बात है&#8221;, &#8216;अनारकली&#8221;, &#8216;ताजमहल&#8221;, &#8216;इंसानियत&#8221;, &#8216;दादी मां&#8221;, &#8216;मेरा सलाम&#8221;, &#8216;राम राज्य&#8221; अपने होम प्रोडक्शन पीएन फिल्म्स में पति प्रेम नाथ के साथ &#8216;शगूफा&#8221;, &#8216;गोलकुंडा का कैदी&#8221;, &#8216;हमारा वतन&#8221; व &#8216;समुन्दर&#8221; नामक फिल्मों में काम किया लेकिन दुर्भाग्य से इनमें से कोई भी फिल्म नहीं चली। प्रोड्क्शन हाउस को बंद करना पड़ा।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>यह भी एक मजेदार किस्सा है कि मुगले आजम के निर्माण में लगातार देरी के चलते एक छोटे फिल्मकार नंदलाल जसवंत लाल ने आगे बढ़कर बीना राय और प्रदीप कुमार को लेकर फिल्म &#8216;अनारकली&#8217; लांच कर दी। फिल्म सुपर डुपर हिट हो गयी। इसी कामयाब जोड़ी की दूसरी फिल्म &#8216;ताजमहल&#8221; ने भी सफलता के झंडे गाड़ दिये। उसके गीत &#8216;पांव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी&#8221;,&#8217;जो बात तुझमें है तेरी तस्वीर में नहीं&#8221; व &#8216;जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा&#8221; गली गली में सुनाई देने लगे। </strong></span></p></blockquote>
<p>जब &#8216;मुगले आजम&#8221; 1960 में बनकर तैयार हुई तो उसी दौरान बीना राय की पारिवारिक फिल्म &#8216;घूंघट&#8221; भी रिलीज हुई। फिल्मफेयर अवार्ड में दोनों ही बेस्ट हीरोइन की नामिनी थीं। सभी समझ रहे थे कि यह पुरस्कार मधुबाला ही जीतेंगी लेकिन जब बीना राय का नाम लिया गया तो सबके मुंह खुले के खुले रह गये। इसके लिए मीडिया ने पुरस्कार कमेटी की खिंचाई भी की।</p>
<p>ज्यादातर लोग 13 के अंक को अशुभ मानते हैं जबकि बीना राय की जिन्दगी में इस तारीख की अहम भूमिका रही। जहां 13 जुलाई 1931 को उनका जन्म लाहौर पाकिस्तान में हुआ वहीं अपनी पहली फिल्म के लिए उन्होंने कांट्रेक्ट साइन किया तो वह तारीख थी 13 जुलाई 1950 आैर उनकी &#8216;काली घटा&#8221; फिल्म 13 जुलाई 1951 को रिलीज हुई। 13 जुलाई 1952 को उनकी सगाई हुई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-228999 size-full" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/WhatsApp-Image-2021-07-21-at-10.58.38-AM.jpeg" alt="" width="680" height="581" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/WhatsApp-Image-2021-07-21-at-10.58.38-AM.jpeg 680w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2021/07/WhatsApp-Image-2021-07-21-at-10.58.38-AM-300x256.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 680px) 100vw, 680px" /></p>
<p>उनके साथ एक अन्य संयोग भी जुड़ा। प्रेम नाथ और  बीना राय को नींद बहुत प्यारी थी। वो अक्सर कहा करते थे कि नींद आधी मौत है और मौत पूरी नींद। इत्तेफाक देखिए प्रेम नाथ की 3 नवम्बर 1992 में नींद में सोते हुए मौत हो गयी और  6 दिसम्बर 2009 को बीना राय भी सोते हुए इस दुनिया को छोड़कर चली गयीं।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :<a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/connections-of-naushad-with-lucknow/">नौशाद से कोई नहीं छुड़ा पाया आखिरी दम तक लखनऊ</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :<a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/remembering-talat-mahamood/">थरथराती आवाज का वो सुरीला जादूगर</a></strong></span></p>
<p>1968 मेें बनी फिल्म &#8216;अपना घर अपनी कहानी&#8221; उनकी अंतिम फिल्म थी। 18 वर्ष के अपने फिल्मी कैरियर में उन्होंने मात्र 28 फिल्मों में काम किया। उसके बाद वह चालीस साल तक अपने परिवार में मीडिया से दूर खुशी खुशी जीवन व्यतीत करती रहीं।</p>
<p><em>( इस लेख को शेयर करना या किसी आंशिक या पूर्ण रूप से प्रयोग करने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य है। )</em></p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शर्मसार हुई राजधानी, दिल्ली में 3 बार बिकी ढाई महीने की बच्ची</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/two-and-a-half-month-old-girl-sold-3-times-in-shame-in-the-capital-delhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Aug 2020 04:44:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
		<category><![CDATA[इण्डिया]]></category>
		<category><![CDATA[इंसानियत]]></category>
		<category><![CDATA[कलयुगी पिता ने]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली महिला आयोग]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली में 3 बार बिकी ढाई महीने की बच्ची]]></category>
		<category><![CDATA[पुलिस]]></category>
		<category><![CDATA[शर्मसार हुई राजधानी]]></category>
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					<description><![CDATA[जुबिली न्यूज डेस्क ये खबर इंसानियत को शर्मसार करने वाली खबर है। इंसान इतना नीचे गिर चुका है कि उसे अब इंसान और जानवर में फर्क नहीं रह गया है। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई है। यहां एक ढाई महीने की मासूम को तीन बार बेचा गया। पिता तो बेटियों के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000080;"><strong>जुबिली न्यूज डेस्क</strong></span></p>
<p>ये खबर इंसानियत को शर्मसार करने वाली खबर है। इंसान इतना नीचे गिर चुका है कि उसे अब इंसान और जानवर में फर्क नहीं रह गया है। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई है। यहां एक ढाई महीने की मासूम को तीन बार बेचा गया।</p>
<p>पिता तो बेटियों के आदर्श होते हैं। पिता में बेटिया को सुपर मैन का अक्श नजर आता है, लेकिन दिल्ली में एक कलयुगी पिता ने इस रिश्ते को गाली देने का काम किया है। एक पिता गुरदीप ने अपनी ढाई माह की मासूम को 60 हजार रुपये में बेच दिया। उसके पास पहले से दो बेटियां थी इसलिए तीसरी बेटी के जन्म से खुश नहीं था। उसने मासूम को जाफराबाद में बच्ची को बेच दिया।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5-2/">कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी की पत्नी ने संबित पात्रा को लेकर क्या कहा?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/so-is-the-modi-government-sacrificing-the-environment-for-development/">तो क्या मोदी सरकार विकास के लिए पर्यावरण की बलि दे रही है?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/after-the-death-of-rajiv-tyagi-debit-the-methods-of-tv-debate/">राजीव त्यागी की मौत के बाद तो टीवी डिबेट के तौर-तरीकों पर डिबेट करो !</a></strong></span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-135582" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/new-born-baby.jpg" alt="" width="910" height="480" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/new-born-baby.jpg 910w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/new-born-baby-300x158.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/new-born-baby-768x405.jpg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/11/new-born-baby-310x165.jpg 310w" sizes="auto, (max-width: 910px) 100vw, 910px" /></p>
<p>हालांकि कुछ दिनों बाद जब उसे अपने काम पर शर्म आई तो वह सीधे महिला आयोग के पास पहुंचा। यहां से शुरू हुआ बच्ची को बरामद करने का अभियान।</p>
<p>पुलिस के अनुसार बच्ची की मां अमनदीप और पिता गुरदीप ने जाफराबाद में मनीषा नामक महिला को अपनी ढाई माह की बच्ची 60 हजार में बेच दी। पिता की निशानदेही पर दिल्ली महिला आयोग की टीम जाफराबाद इलाके में पहुंची और पुलिस से संपर्क किया। बताए गए पते पर मनीषा नहीं मिली, लेकिन मोबाइल पर मनीषा ने यह जरूर बताया कि बच्ची को उसने मादीपुर में दीपा एवं मंजू को बेच दिया है।</p>
<p>मनीषा के बताए पते पर आयोग और पुलिस की टीम तत्काल मादीपुर पहुंची, वहां इंदू नाम की महिला मिली। इंदू ने बताया कि मंजू एवं मनीषा ने उसके पास बच्ची छोड़ा जरूर था लेकिन फिलहाल दोनों उसे लेकर शकूरपुर में है।</p>
<p>पुलिस ने जब शकूरपुर में मंजू को पकड़ा तो उसने बताया कि बच्ची संजय नाम के कारोबारी को एक लाख रुपये में बेच दी है। संजय चावड़ी बाजार में रहते हैं और निसंतान हैं। पूरी रात यहां से वहां भागने के बाद गुरुवार सुबह बच्ची को संजय के पास से बरामद कर लिया गया।</p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :  <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/will-india-buy-russias-corona-vaccine-even-after-vaccines-are-suspected/">टीके पर संदेह के बाद भी क्या भारत खरीदेगा रूस की कोरोना वैक्सीन ?</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :   <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/president-of-ram-janmabhoomi-trust-mahant-nritya-gopal-das-corona-positive/">राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास कोरोना पॉजिटिव</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #800000;"><strong>यह भी पढ़ें :    <a style="color: #800000;" href="https://www.jubileepost.in/rajasthan-political-crisis-ashok-gehlot-sachin-pilot-congress-2/">अशोक गहलोत को अब किस बात का डर</a></strong> </span></p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-139840" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/swati-maliwal.jpg" alt="" width="729" height="577" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/swati-maliwal.jpg 504w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/12/swati-maliwal-300x237.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 729px) 100vw, 729px" /></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>फिलहाल पुलिस ने मानव तस्करी के आरोप में पिता अमनप्रीत, इंदु, मंजू, मनीषा एवं बच्ची को खरीदने वाले संजय को गिरफ्तार कर लिया है। बच्ची के पुनर्वास पर कार्य शुरू कर दिया गया है।</p>
<p>जब बच्ची के पिता से दिल्ली पुलिस ने पूछताछ की तो उसने बताया कि वह वाहन चालक है। पहले से दो बेटियां हैं, तीसरी बेटी हुई तो वह अवसाद में आ गया।</p>
<p>तालाबंदी के दौरान बच्ची के जन्म से यह तनाव और अधिक बढ़ गया। वह सोच में पड़ गया कि मामूली आमदनी में इतना खर्च कैसे उठाएगा। इसी बीच उसे मनीषा नामक महिला मिली जो बच्ची की कीमत देकर पालने की बात कह रही थी। वह झांसे में आ गया और बच्ची को 60 हजार में बेच दिया। जब उसे पता चला कि मनीषा ने बच्ची को आगे बेच दिया है तो उसे अपनी बच्ची की फ्रिक हुई और वह मदद के लिए आयोग की महिला पंचायत के पास पहुंचा।</p>
<h3><span style="color: #800000;"><strong>महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस को धन्यवाद कहा</strong></span></h3>
<p>दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि बुधवार देर रात से ही आयोग की टीम बच्ची की तलाश में जुट गई थी। पूरी रात मशक्कत कर, कई जगह छापे मारे और एक बड़े रैकेट जिसमें बच्ची को पांच बार बेचा गया उससे छुड़वाया। इस मामले में दिल्ली पुलिस का कार्य भी सराहनीय रहा। आयोग दिल्ली पुलिस का धन्यवाद करती हैं। इस मामले में पांच लोग गिरफ्तार भी हुए हैं। इन्हें सख्त सजा दिलाने के लिए भी आयोग काम करेगा।</p>
<p><iframe loading="lazy" title="EDITORs TALK : खतरे में विधायक , घटता रसूख !" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/67If5lWgqH0?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>यदि सोनू सूद होता भारत का प्रधानमंत्री तो&#8230;</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/sonu-sood-would-have-become-prime-minister-of-india/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Ali Raza]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 26 Jul 2020 15:29:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अविनाश भदौरिया कोरोना महामारी के चलते मन निराश है, ये निराशा सिर्फ मेरी नहीं शायद ज्यादातर लोगों की है। एक तो रोजगार, परिवार और भविष्य की चिंता से मन दुखी है दूसरी ओर जब अपने देश के नेताओं और राजनीतिक दलों के भाषण सुनो, उनकी कार्यशैली को देखो तो मन और निराशा में डूबने लगता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-180248 " src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/07/sood.jpg" alt="" width="832" height="832" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/07/sood.jpg 400w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/07/sood-300x300.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/07/sood-150x150.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 832px) 100vw, 832px" /></p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>अविनाश भदौरिया</strong></span></p>
<p>कोरोना महामारी के चलते मन निराश है, ये निराशा सिर्फ मेरी नहीं शायद ज्यादातर लोगों की है। एक तो रोजगार, परिवार और भविष्य की चिंता से मन दुखी है दूसरी ओर जब अपने देश के नेताओं और राजनीतिक दलों के भाषण सुनो, उनकी कार्यशैली को देखो तो मन और निराशा में डूबने लगता है।</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>क्या भाजपा, क्या कांग्रेस, क्या समाजवादी क्या दलितवादी और क्या साम्यवादी जिसको भी देखो सब के सब किसी सी ग्रेड फिल्म के कलाकार से कम नहीं लगते। </strong></span></p></blockquote>
<p>इनके झूठे वादों और गंदे इरादों ने इतना अविश्वास पैदा कर दिया है कि मानवता, इंसानियत और ईमानदारी जैसे शब्द सुनकर चिढ़ सी होने लगी है लेकिन जब ख़बरें पढ़ता हूँ कि बॉलीवुड के एक अभिनेता ने फलाने को घर पहुँचाया ढिकाने को खाना खिलाया तो एकबार कि लगा कोई पीआर कंपनी छवि निर्माण में लगी होगी या फिर अब इन्हें भी चुनाव वगैरह लड़ना होगा।</p>
<p>फिर देखता हूँ कि ये बन्दा तो लगातार एक के बाद एक नेक काम किए ही जा रहा है मानो इसने पूरी दुनिया की मदद करने का बीड़ा उठा लिया है, आखिर क्यों और इससे भी बड़ा सवाल है कि वो इतना सब कर कैसे पा रहा है?</p>
<blockquote><p><span style="color: #ff0000;"><strong>जब सरकार के पास लोगों के इलाज के लिए बेड नहीं है। घर भेजने के लिए लोगों से किराया वसूला जाता है&#8230;बच्चों की फीस का बोझ सरकार को भारी लगता है&#8230;लम्बे समय तक सत्ता का सुख भोगने वाले विपक्षी दलों के नेता महंगे कैमरामैन को साथ लेकर भीड़ के बीच जाकर फोटो तो खींचा लेते हैं और उसे ट्वीटर पर पोस्ट कर सरकार पर निशाना साधते हैं लेकिन किसी के पास इनकी मदद के लिए कोई खास इंतजाम नहीं है&#8230;.बस ट्वीट करके अपने समर्थकों को ये बताने में व्यस्त हैं कि सरकार बुरी है लेकिन खुद कितने अच्छे हैं इसका कोई हिसाब नहीं है। इनसे जातिवाद और धर्म के नाम पर जहर तो उगला सकते हैं पर किसी की निस्वार्थ मदद के नाम पर चवन्नी भी न निकले।</strong></span></p></blockquote>
<p>ऐसे में आखिर सोनू सूद को कौन सा खजाना मिल गया है कि वो निरंतर लोगों की मदद कर रहे हैं। क्या कोई उनके पास अलादीन का चिराग है ? खैर जो भी लेकिन जिस तरह सोनू सूद इस निराशा के दौर में आशा की किरण बनकर निकले हैं उसके बाद दिल तो बस यही कहता है कि यदि सोनू सूद प्रधानमंत्री बन जाएं तो कितना सुन्दर होगा भारत मेरा। कितनी खुशहाली होगी हर चेहरे में। न कोई बेरोजगारी के चलते आत्महत्या करेगा न कोई बेटी के दहेज़ की फ़िक्र करेगा न कोई किसान फांसी के फंदे से लटकेगा। न कोई बच्चा भूखा रहेगा। शायद न कोई स्त्री सड़क पर बच्चे को जन्मेगी। काश कि सोनू सूद बन जाए भारत का प्रधानमंत्री।</p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/bollywood-kangana-ranaut-reacts-on-a-r-rehman-revelation/">एआर रहमान के इस खुलासे पर क्या बोली कंगना रनौत</a></strong></span></p>
<p><span style="color: #000080;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #000080;" href="https://www.jubileepost.in/ram-mandir-bhoomi-pujan-effected-maharashtra-politics/">राम मंदिर भूमि पूजन पर गरमाई सियासत, उद्वव बोले- हिम्मत है तो सरकार गिराओ</a></strong></span></p>
<p><iframe loading="lazy" title="जिस डॉन के दिमाग से  डरता  था दाऊद | jUBILEE TV" width="1220" height="686" src="https://www.youtube.com/embed/JezPWnV6rOk?feature=oembed" frameborder="0" allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" allowfullscreen></iframe></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मदर्स डे मनाना तो अहसान फरामोशी है</title>
		<link>https://www.jubileepost.in/https-www-jubileepost-in-to-celebrate-mota-disappointment/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Syed Mohammad Abbas]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2020 10:06:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Main Slider]]></category>
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					<description><![CDATA[शबाहत हुसैन विजेता आज मदर्स डे है. दुनिया माँ को विश कर रही है. माँ जो पैदा करती है. माँ जो परवरिश करती है. माँ जो जीना सिखाती है. माँ जो रिश्तों की पहचान करवाती है. माँ जिसके पाँव तले जन्नत है. माँ जिसके लिए औलाद एक मन्नत है. माँ जो अपने बच्चे को खिलाकर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #0000ff;"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-87885 alignleft" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/Shabahat-Husain-Vijeta-236x300.jpg" alt="" width="151" height="192" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/Shabahat-Husain-Vijeta-236x300.jpg 236w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2019/03/Shabahat-Husain-Vijeta.jpg 252w" sizes="auto, (max-width: 151px) 100vw, 151px" />शबाहत हुसैन विजेता</strong> </span></p>
<p>आज मदर्स डे है. दुनिया माँ को विश कर रही है. माँ जो पैदा करती है. माँ जो परवरिश करती है. माँ जो जीना सिखाती है. माँ जो रिश्तों की पहचान करवाती है. माँ जिसके पाँव तले जन्नत है. माँ जिसके लिए औलाद एक मन्नत है. माँ जो अपने बच्चे को खिलाकर ही सुलाती है. अपने लिए कुछ बाकी न हो तो आग पर पत्थर चढ़ाती है ताकि औलाद इस खुशफहमी में सो जाए कि खाना पक जाएगा तो माँ भी अपना पेट भर लेगी.</p>
<p>मोहब्बत नाम की शुरुआत माँ से ही होती है. माँ कैसी भी हो मगर उसके लिए सबसे बड़ी दौलत उसकी औलाद ही होती है. माँ के किरदार जैसा कोई दूसरा किरदार बना ही नहीं. माफ़ करने के मामले में दो ही इक्जाम्पिल सबसे बड़े हैं. पहला अल्लाह का और दूसरा माँ का. अल्लाह अपने हर बन्दे से यह उम्मीद करता है कि वह अपनी गल्तियों की माफी मांगे. दिल से माँगी गई माफी पर वह माफ़ कर देता है. मगर माँ माफ़ करने के मामले में अल्लाह से भी आगे निकल जाती है. कई ऐसे मामले हैं जिनमें औलाद को अपनी माँ से माफी मांगने का मौका नहीं मिला और उसकी अचानक मौत हो गई. ऐसी औलाद को माँ उसकी मौत के बाद उसकी सारी गलतियों के लिए माफ़ कर देती है.</p>
<p>माँ का ओहदा दुनिया में सबसे बड़ा ओहदा है. यही माँ पहले बेटी होती है. कुरआन में बेटे को नेमत और बेटी को रहमत बताया गया है. बेटियां रहमत होती हैं इसीलिये तो माँ के दिल में रहम कूट-कूटकर भरा होता है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-167846 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/mother.jpg" alt="" width="544" height="445" /></p>
<p>माँ की गोद को औलाद का पहला स्कूल बताया गया है. इसी स्कूल में इंसान इंसानियत का सबक पढ़ता है. यही वजह है कि औलाद जब गलत रास्ते पर जाती है तब उसकी परवरिश पर उंगलियां उठती हैं. परवरिश में बाप का नहीं माँ का ही रोल अहम माना गया है.</p>
<p>माँ के किरदार पर लिखने के लिए इतना कुछ है कि उसे पूरी तरह से कभी लिखा ही नहीं जा सकता. दुनिया में यह अकेला ऐसा रिश्ता है जिसमें मोहब्बत कोई बदला नहीं चाहती. औलाद सब कुछ हासिल कर लेने के बाद अपनी माँ को भूल जाए तो भी माँ कभी उफ़ नहीं करती. कभी उसका बुरा नहीं चाहती.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/daughters-are-pride-of-father/">डंके की चोट पर : बेटियां बाप का गुरूर होती हैं</a></strong></span></p>
<p>माँ का दर्जा दुनिया का सबसे बड़ा दर्जा है. इसी वजह से तो मुल्क को माँ का दर्जा दिया गया. मुल्क भी अपने हर बच्चे को एक जैसी नज़रों से देखता है और माँ भी अपने सब बच्चो को एक नजर से देखती है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-full wp-image-163831 alignright" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/04/Danke-Chote-Par-150x150-1.jpg" alt="" width="150" height="150" />रिश्तों पर रिसर्च करने वालों ने कहा है कि औलाद अपनी माँ के लिए पूरी ज़िन्दगी कितना भी कर ले लेकिन वह अपनी माँ के एक रात के अहसान को भी उतार नहीं सकता है. दुनिया में आने के बाद पहले तीन साल किसी भी बच्चे के लिए बहुत मुश्किल साल होते हैं. उस दौर में ज़रा सा इन्फेक्शन उसकी ज़िन्दगी की किताब को बंद कर सकता है लेकिन माँ बगैर कहीं कुछ भी लिखे हुए उसके हर पल का हिसाब रखती है. कब उसे दूध देना है. कब कौन सी दवा देनी है. कब उसे इंजेक्शन लगवाना है. उसके लिए वह हर जतन करती है जिससे उसके बच्चे की ज़िन्दगी मुश्किलों से बाहर निकल जाए.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/how-to-play-20-20-habit-test/">आदत टेस्ट खेलने की है, 20-20 कैसे खेलें</a></strong></span></p>
<p>माँ अपने बच्चे को सर्दी से बचाती है. बच्चा बिस्तर गीला कर दे तो खुद गीले में सो जाती है मगर बच्चे को सूखे में सुलाती है ताकि उसे कहीं सर्दी न लग जाए. मौसम गर्मी का हो और रात को बिजली चली जाए तो सारी रात माँ अपने बच्चे को पंखा झलती है ताकि वह कहीं जाग न जाए और उसकी नींद न खराब हो जाए. बच्चा बीमार हो जाए तो माँ यह भूल जाती है कि दिन है या रात.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-167848 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/mother-2-300x169.jpeg" alt="" width="575" height="324" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/mother-2-300x169.jpeg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/mother-2-1024x576.jpeg 1024w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/mother-2-768x432.jpeg 768w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/mother-2.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 575px) 100vw, 575px" /></p>
<p>बच्चा जब पहली बार करवट बदलता है, बच्चा जब पहली बार अपने बल पर उठकर बैठता है. बच्चा जब पहली बार घुटनों के बल आगे बढ़ना सीखता है. बच्चा जब पहली बार लड़खड़ा कर अपने पाँव पर चलता है, बच्चा जब पहली बार अपनी ज़बान से कुछ बोलता है. तो जो सबसे ज्यादा खुश होता है वह माँ होती है.</p>
<p><span style="color: #993300;"><strong>यह भी पढ़ें : <a style="color: #993300;" href="https://www.jubileepost.in/satan-will-call-but-not-to-go-to-the-mosque/">शैतान बुलाएगा मगर मस्जिद में जाने का नहीं</a></strong></span></p>
<p>माँ अपने बच्चे के लिए दुनिया की सारी खुशियों का इंतजाम करती है. बच्चे की हर जिद को वह खुशी-खुशी पूरा करती है. बच्चा क्या खायेगा, क्या पहनेगा, उसे किस चीज़ की कब ज़रुरत है. यह माँ को हमेशा मालूम होता है. यही वजह है कि जब बच्चा कुछ बता पाने की उम्र में नहीं होता है और अचानक से रोना शुरू कर देता है तब बगैर किसी मेडिकल पढ़ाई के माँ समझ जाती है कि बच्चे को कहाँ दर्द हो रहा है और उसे कौन सी दवा देकर ठीक किया जा सकता है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-167850 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/Mother-3-300x200.jpg" alt="" width="576" height="384" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/Mother-3-300x200.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/Mother-3.jpg 626w" sizes="auto, (max-width: 576px) 100vw, 576px" /></p>
<p>बच्चे का किरदार, बच्चे की शख्सियत, बच्चे की बहादुरी, बच्चे की रहमदिली, बच्चे की ईमानदारी सब उसे पैदा करने वाली माँ से तय होती है. हक़ और इन्साफ को बचाने के लिए कर्बला के मैदान में अपनी शहादत पेश करने वाले हज़रत इमाम हुसैन को कौन नहीं जानता. हजरत इमाम हुसैन पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की बेटी और मौला-ए-कायनात हजरत अली की शरीक-ए-हयात हजरत फात्मा ज़हरा के बेटे थे. हजरत फात्मा ज़हरा की शहादत के बाद हजरत अली ने उस दौर की सबसे बहादुर औरत हजरत उम्मुल बनीन से शादी की थी. यह शादी उन्होंने हजरत अब्बास जैसा बहादुर बेटा हासिल करने के लिए की थी. हजरत अली को अब्बास जैसा बेटा इसीलिये चाहिए था ताकि वह अपने बड़े भाई इमाम हुसैन के मददगार की शक्ल में कर्बला के मैदान खड़े हो सकें. बहादुर बेटे के लिए बहादुर माँ को चुनकर हजरत अली ने 1400 साल पहले ही यह बता दिया था कि बच्चे के किरदार माँ कितनी अहमियत रखती है.</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class=" wp-image-167852 aligncenter" src="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/Mother-4-300x199.jpg" alt="" width="568" height="377" srcset="https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/Mother-4-300x199.jpg 300w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/Mother-4-310x205.jpg 310w, https://www.jubileepost.in/wp-content/uploads/2020/05/Mother-4.jpg 615w" sizes="auto, (max-width: 568px) 100vw, 568px" /></p>
<p>बावजूद इसके इस दुनिया ने माँ के लिए सिर्फ एक दिन का चुनाव किया है. उसे मदर्स डे नाम दिया है. मदर्स डे मनाना हकीकत में खुद को पैदा करने वाली माँ से अहसान फरामोशी है. मदर्स डे तो हर वह दिन है जिस दिन हम सांस लेते हैं. हम हँसते हैं. हम रिश्तों को जीते हैं. हम ज़िन्दगी का मतलब समझते हैं. पैदा होने से लेकर मर जाने तक हर दिन माँ का ही दिन है. माँ वह किरदार है जिसे किसी एक दिन में कैद किया ही नहीं जा सकता.</p>
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