प्रेमेन्द्र श्रीवास्तव सेल…सेल…सेल… मुद्दों की सेल। सामने बोर्ड देखकर मैं चौंका। बात थी भी चौंकाने वाली। मैं उतना ही चौंका…
आज बाढ़ की बाढ़ सी आयी हुई है। पहाड़ों पर तो पानी ढोेने वाले बादल फटे पड़ रहे हैं। मानो…