स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान ने बढ़ाया सियासी पारा, इससे पहले भी दे चुके….

जुबिली न्यूज डेस्क

सपा एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को बकवास बताते हुए कुछ चौपाइयां हटवाने की मांग कर सियासी माहौल को गरमा दिया है। मामले में शीर्ष नेतृत्व ने चुप्पी साध रखी है तो सपा विधायक उनके बयान को निजी बता रहे हैं। देखा जाए तो स्वामी प्रसाद मौर्य पहली बार अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में नहीं आए हैं, बल्कि इस तरह के बयान वह पहले भी देते रहे हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह बयान उनका व्यक्तिगत है, इससे पार्टी से कोई मतलब नहीं है। इसे पार्टी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

पहले भी स्वामी दे चुके हैं कई विवादित बयान

गौरी गणेश की पूजा ना करें

वर्ष 2014 में बसपा में रहते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने शादियों में गौरी गणेश की पूजा करने पर सवाल उठाया था। कर्पूरी ठाकुर भागीदारी सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि शादियों में गौरी गणेश की पूजा नहीं करनी चाहिए। यह दलितों और पिछड़ों को गुमराह कर उनको गुलाम बनाने की साजिश है।

तीन तलाक का कारण हवस

भाजपा सरकार में मंत्री रहते हुए 29 अप्रैल 2017 को स्वामी प्रसाद मौर्य ने तीन तलाक को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि तीन तलाक देने वाले मुस्लिम सिर्फ  अपनी हवस मिटाने के लिए बीवियां बदलते हैं। तीन तलाक के पीछे ओछी मानसिकता है।

भाजपा ने किया राम का सौदा

नवंबर 2022 में मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि भाजपा के लोग राम का भी सौदा कर लेते हैं। ये जनता को और राम को भी बेच देते हैं। उस वक्त भी सपा ने किनारा कर लिया था।

सपाइयों ने जताई आपत्ति

सपा एमएलसी के बयान पर सपाइयों ने भी आपत्ति जताई है। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि यह उनका निजी बयान है, इससे पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। नेताओं को जनता की समस्याओं आदि पर बोलना चाहिए। किसी धार्मिक पुस्तक पर बोलने से बचना चाहिए। स्वामी प्रसाद ने अज्ञानतावश बयान दिया है। उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

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