गुजरात में मोदी सरकार पर राहुल का जोरदार प्रहार

जुबिली न्यूज डेस्क

राहुल गांधी ने एक बार फिर बीजेपी पर  निशाना साधा है। राहुल गांधी ने सरदार पटेल के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पटेल की मूर्ति लगाई लेकिन स्कूल बंद कर दिए। उन्होंने कहा कि पटेल आज होते तो वह भी यह नहीं चाहते। उन्होंने गुजरात में आंदोलन के लिए अनुमति वाले नियम पर सरदार पटेल का नाम लेते हुए भी बीजेपी को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इसलिए जो पटेल चाहते, कांग्रेस वही करेगी।

बता दे कि राहुल गांधी बूथ स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं की एक रैली को संबोधित कर रहे थे। रैली अहमदाबाद के साबरमती रीवरफ्रंट पर कांग्रेस के ‘बूथ योद्धाओं’ के ‘परिवर्तन संकल्प’ सम्मेलन नाम से आयोजित की गई थी।

उन्होने कहा कि लोकतंत्र पर आक्रमण, गुजरात की जनता पर आक्रमण, कोई कुछ नहीं बोल सकता है। यह ऐसा राज्य है जहां आंदोलन के लिए परमिशन लेनी पड़ती है। जिसके खिलाफ आंदोलन करना है, उसकी पहले परमीशन लेनी पड़ेगी। यह गुजरात है। हिंदुस्तान में किसी को बिजनस समझना हो तो वह गुजरात आए लेकिन छोटे और मध्यम व्यापारी गुजरात की स्ट्रेंथ हैं। गुजरात सरकार छोटे कारोबारियों की कोई मदद नहीं करती है। छोटे व्यापारियों को नोटबंदी से कोई फायदा नहीं हुआ। बड़े-बड़े उद्योगपतियों को ही फायदा हुआ। किसी भी व्यापारी से पूछिए तो बताएगा की जीएसटी से सिर्फ नुकसान, नुकसान, नुकसान है।

अगर आप अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना चाहो तो उन्हीं उद्योगपतियों से परमीशन लेनी पड़ेगी। क्या सरदार पटेल ने अंग्रेजों से आंदोलन के लिए परमीशन ली थी? क्या अंग्रेजों के पास जाकर कहा था कि भैया हमें आंदोलन की परमीशन दो? अगर आज सरदार पटेल होते और उनसे आप कहते की आंदोलन के लिए सरकार की परमीशन लेनी पड़ेगी तो सरदार पटेल कहते, ऐसी सरकार को निकाल बाहर फेंकों।

लड़ाई ‘कांग्रेस-बीजेपी के बीच नहीं

राहुल गांधी ने कहा कि 25 साल से गुजरात क्या सह रहा है वह समझते हैं। उन्होंने कहा कि लड़ाई कांग्रेस-बीजेपी के बीच नहीं है। लड़ाई किसी पार्टी से नहीं, समझना होगा कि किसके खिलाफ लड़ाई है? बीजेपी ने सरदार पटेल की मूर्ति बनाई। दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति स्थापित की। बीजेपी और आरएसएस के लोगों ने यह मूर्ति बनाई। सरदार पटेल क्या थे? उन्होंने अपनी जिंदगी किसके लिए दी? क्यों लड़े और किससे लड़े?सरदार पटेल एक व्यक्ति नहीं थे। वह गुजरात और हिंदुस्तान के किसानों की आवाज थे। उनके मुंह से जो निकलता था, वह गुजरात और हिंदुस्तान के किसानों के हित के लिए निकलता था। सरदार पटेल को पढ़ो, भाषण सुनो तो उनमें किसानों के खिलाफ उन्होंने अपनी जिंदगी में एक शब्द नहीं कहा। उन्होंने गुजरात की लोकतांत्रिक संस्थाओं को खड़ा किया। सरदार पटेल के बिना, अमूल पैदा नहीं हो सकता था।

किसानों के खिलाफ काले कानून लागू नहीं करते

सरदार पटेल होते तो अरबपतियों का कर्ज नहीं माफ करते। वह होते तो किसानों के खिलाफ काले कानून लागू नहीं करते। एक तरफ मूर्ति बनाते हैं दूसरी तरफ उनकी सोच पर आक्रमण करते हैं। हमने किसानों को कर्ज माफ किया। जिस राज्य में सत्ता मिली, वहां किसानों का सबसे पहला काम कर्जमाफी का ही किया। यहां भी 3 लाख रुपये तक का कर्ज माफ करेंगे।

‘गुजरात बन रहा ड्रग हब’

ड्रग्स मिला, गुजरात ड्रग्स का हब बन गया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। क्या कारण है कि हर दो-तीन महीने में मुद्रा पोर्ट में ड्रग्स मिलती है, जो गुजरात के युवाओं का भविष्य खत्म कर रही है। लेकिन कोई ऐक्शन नहीं हो रहा है। किसी गरीब व्यक्ति के घर में पुलिस ड्रग ढूंढ ले तो लाठी मारकर अंदर कर देंगे, लेकिन हजारों करोड़ रुपये की ड्रग मिलने के बाद कोई कार्रवाई नहीं, यह है गुजरात मॉडल। तीन-चार उद्योगपति ही गुजरात चला रहे हैं। उद्योगपतियों को जितनी जमीन चाहिए तुरंत दे दी जाती है। आदिवासी हाथ जोड़कर थोड़ी जमीन मांगे तो सवाल ही नहीं उठता। कुछ नहीं मिलेगा। जितना चिल्लाना है चिल्ला लो। गुजरात में बिजली का रेट हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा है। बिजली वितरण का ठेका दो तीन कंपनियों के पास ही हैं।

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