ईरान युद्ध के बीच पीएम मोदी की अपील पर सियासत तेज, राहुल गांधी ने साधा निशाना

नई दिल्ली। ईरान युद्ध और वैश्विक आर्थिक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की देशवासियों से की गई अपील पर सियासत तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालने की अपील की थी। अब कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जनता से त्याग मांग रहे हैं, लेकिन यह सरकार की नाकामी का सबूत है।

उन्होंने लिखा,
“मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे — सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं, ये नाकामी के सबूत हैं।”

राहुल गांधी ने आगे कहा कि 12 साल में देश को ऐसे हालात में पहुंचा दिया गया है कि अब जनता को बताया जा रहा है कि क्या खरीदना है और क्या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हर बार जिम्मेदारी लोगों पर डालकर खुद जवाबदेही से बचती है।

कांग्रेस नेता ने कहा,
“हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें। देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया संकट और ईरान युद्ध का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं और भारत को विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है।

पीएम मोदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे एक साल तक सोना न खरीदें। उन्होंने कहा कि गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करना समय की मांग है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कंपनियों से वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) को बढ़ावा देने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में देश ने ऑनलाइन मीटिंग्स और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को सफलतापूर्वक अपनाया था और जरूरत पड़ने पर फिर से उसी मॉडल को अपनाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ईंधन की बचत बेहद जरूरी है। उन्होंने लोगों से मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने की अपील की।

उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की एक बोरी करीब 3000 रुपये में बिक रही है, जबकि भारत सरकार किसानों को वही खाद करीब 300 रुपये में उपलब्ध करा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे आर्थिक दबाव और सरकार की विफलता बता रहा है, जबकि भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह देशहित में की गई अपील है।

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